Топ-100 ⓘ शाकम्भरी देवी माँ आदिशक्ति का एक सौम्य स्वरूप है। इन्हें चार
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ⓘ शाकम्भरी देवी माँ आदिशक्ति का एक सौम्य स्वरूप है। इन्हें चार भुजाओं और कही पर अष्टभुजाओं वाली के रुप में भी दर्शाया गया है। माँ समस्त भुमंडल की अधीश्वरी भुवनेश् ..



                                     

ⓘ शाकम्भरी

शाकम्भरी देवी माँ आदिशक्ति का एक सौम्य स्वरूप है। इन्हें चार भुजाओं और कही पर अष्टभुजाओं वाली के रुप में भी दर्शाया गया है। माँ समस्त भुमंडल की अधीश्वरी भुवनेश्वरी ही है। ये माँ ही वैष्णो, चामुंडा, कांगड़ा वाली, ज्वाला, चिंतापुरणी, कामाख्या, चंडी, बाला सुंदरी, मनसा, नैना और शताक्षी देवी कहलाती है। माँ शाकम्भरी ही रक्तदंतिका, छिन्नमस्तिका, भीमा,भ्रामरी और श्री दुर्गा है। माँ श्री शाकंभरी के देश मे अनेक सिद्धपीठ है। जिनमे सकरायपीठ और सांभर पीठ राजस्थान मे और सहारनपुर पीठ उत्तर प्रदेश मे है।चित्र:

पुराणों और धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार हिरण्याक्ष के वंश मे एक महादैत्य रूरु था। रूरु का एक पुत्र हुआ दुर्गम। दुर्गमासुर ने ब्रह्मा जी की तपस्या करके चारों वेदों को अपने अधीन कर लिया। वेदों के ना रहने से समस्त क्रियाएँ लुप्त हो गयी। ब्राह्मणों ने अपना धर्म त्याग कर दिया। चौतरफा हाहाकार मच गया। ब्राह्मणों के धर्म विहीन होने से यज्ञादि अनुष्ठान बंद हो गये और देवताओं की शक्ति भी क्षीण होने लगी। जिसके कारण एक भयंकर अकाल पड़ा। किसी भी प्राणी को जल नही मिला जल के अभाव मे वनस्पति भी सूख गयी। अतः भूख और प्यास से समस्त जीव मरने लगे। दुर्गमासुर के अत्याचारों से पीडि़त देवतागण शिवालिक पर्वतमालाओं में छिप गये तथा उनके द्वारा जगदम्बा की स्तुति करने पर महामाया माँ भुवनेश्वरी आयोनिजा रूप मे इसी स्थल पर प्रकट हुई। समस्त सृष्टि की दुर्दशा देख जगदम्बा का ह्रदय पसीज गया और उनकी आंखों से आंसुओं की धारा प्रवाहित होने लगी। माँ के शरीपर सौं नैत्र प्रकट हुए। शत नैना देवी की कृपा से संसार मे महान वृष्टि हुई और नदी- तालाब जल से भर गये। देवताओं ने उस समय माँ की शताक्षी देवी नाम से आराधना की। शताक्षी देवी ने एक दिव्य सौम्य स्वरूप धारण किया। चतुर्भुजी माँ कमलासन पर विराजमान थी। अपने हाथों मे कमल, बाण, शाक- फल और एक तेजस्वी धनुष धारण किये हुए थी। माता ने अपने शरीर से अनेकों शाक प्रकट किये। जिनको खाकर संसार की क्षुधा शांत हुई। इसी दिव्य रूप में माँ शाकम्भरी देवी के नाम से पूजित हुई। तत्पश्चात् वह दुर्गमासुर को रिझाने के लिये सुंदर रूप धारण कर शिवालिक पहाड़ी पर आसन लगाकर बैठ गयीं। इसी स्थल पर मां जगदम्बा ने दुर्गमासुर तथा अन्य दैत्यों का संहार किया व भक्त भूरेदेव को अमरत्व का आशीर्वाद दिया।मां की असीम अनुकम्पा से वर्तमान में भी सर्वप्रथम उपासक भूरेदेव के दर्शन करते हैं तत्पश्चात पथरीले रास्ते से गुजरते हुये मां शाकम्भरी देवी के दर्शन हेतु जाते हैं। जिस स्थल पर माता ने दुर्गमासुर नामक राक्षस का वध किया था वहाँ अब वीरखेत का मैदान है। जहाँ पर माता सुंदर रूप बनाकर पहाड़ी की शिखा पर बैठ गयी थी वहाँ पर माँ शाकम्भरी देवी का भवन है। जिस स्थान पर माँ ने भूरा देव को अमरत्व का वरदान दिया था वहाँ पर बाबा भुरादेव का मंदिर है। प्राकृतिक सौंदर्य व हरी- भरी घाटी से परिपूर्ण यह क्षेत्र उपासक का मन मोह लेता है। देवीपुराण के अनुसार शताक्षी, शाकम्भरी व दुर्गा एक ही देवी के नाम हैं।

                                     

1. इतिहास मे शाकम्भरी पीठ का महत्व

माँ शाकम्भरी पीठ का महत्व इतिहास मे भी कम नही है। आचार्य विष्णुगुप्त चाणक्य और चंद्रगुप्त ने काफी समय यहाँ बिताया था। आचार्य सत्यकेतु विद्यालंकार की पुस्तक आचार्य विष्णुगुप्त चाणक्य मे भी इसका उल्लेख है। चंद्रगुप्त के समय मे माँ शाकम्भरी पीठ स्रुघ्न देश का सबसे बड़ा तीर्थ स्थल था। माँ शाकम्भरी के दर्शन के लिए प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ सिद्धपीठ मे पहुँचती थी। उस समय शाकम्भरी देवी जाने का एकमात्र रास्ता वृहदहट्ट वर्तमान बेहट ही था। यहाँ से आगे का रास्ता घने जंगलों से होकर गुजरता था। वृहदहट्ट से श्रद्धालु टोली बनाकर शक्तिपीठ मे जाते थे।

                                     

2. शक्तिपीठ शाकुम्भरी देवी सहारनपुर

माँ श्री शाकंभरी भगवती का अति पावन प्राचीन सिद्ध शक्तिपीठ शिवालिक पर्वतमाला के जंगलों में एक बरसाती नदी के किनारे है। जिसका वर्णन स्कंद पुराण,मार्कंडेय पुराण,भागवत आदि पुराणों मे मिलता है। माँ का यही शक्तिपीठ देवी का नित्य स्थान है। कहा जाता है कि माता यहाँ स्वयंभू स्वरूप मे प्रकट हुई थी। जनश्रुतियों के अनुसार जगदंबा के इस धाम के प्रथम दर्शन एक चरवाहे ने किये थे। जिसकी समाधि आज भी मंदिर परिसर मे बनी हुई है। माँ के दर्शन से पुर्व यहाँ देवी के अनन्य भक्त बाबा भूरादेव के दर्शन करने का विधान है। शाकम्भरी देवी माँ के वैसे तो अनेक धाम है। लेकिन सहारनपुर की जंगली पहाडियों मे विराजमान सिद्ध भवन की छटा ही कुछ निराली है। पहाड़ी की तलहटी मे माँ का मंदिर है। पंद्रह-सौलह सीढियाँ चढने के पश्चात माँ के अद्भुत स्वरूप के दर्शन होते हैं। संगमरमर के चबुतरे पर जिस पर चांदी मढी हुई है माता अपने चारों स्वरूपों और बाल गणेश के साथ विराजमान है। माता के चारों रूप सुंदर पोशाकों सोने व चांदी के आभुषणो से अलंकृत है। माँ के दायीं और भीमा एवं भ्रामरी देवी तथा बायीं और शताक्षी देवी प्रतिष्ठित है। देश मे ये एकमात्र ऐसा मंदिर है जहाँ दुर्गा के चार रूपो के दर्शन एक साथ होते है। माँ के दर्शन से पुर्व भुरा देव बाबा के दर्शन करने होते है। जिन्होंने देवासुर संग्राम में शामिल होकर अपने प्राणों का बलिदान दे दिया था। माता जगदंबा ने प्रसन्न होकर भुरादेव को यह वरदान दिया था कि जो भी प्राणी मेरे दर्शनार्थ आएगा वह प्रथम भुरादेव के ही दर्शन करेगा।अर्थात बगैर भुरादेव के दर्शन माता को अपनी पुजा स्वीकार नहीं होती। माँ श्री शाकम्भरी देवी जी साक्षात लक्ष्मी स्वरूपा है। शाकम्भरी देवी जी भगवान विष्णु के ही आग्रह करने पर शिवालिक की दिव्य पहाडियों पर स्वयंभू स्वरूप मे प्रकट हुई थी। माता शाकम्भरी के स्वरूप का विस्तृत वर्णन दुर्गा सप्तशती के मुर्ति रहस्य अध्याय मे मिलता है। कहा जाता है कि महाशक्ति ने आयोनिजा स्वरूप मे प्रकट हो शताक्षी अवतार धारण किया। देवी शताक्षी रचना का प्रतीक है। शताक्षी माँ ने ही शाकों द्वारा सबकी बुभुक्षा को शांत किया और श्री शाकम्भरी देवी कहलाई जोकि पालन का प्रतीक है। शाकम्भरी देवी ने ही दुर्गमासुर दानव का संहार करके जगत को शांति प्रदान की और दुर्गा कहलाई जोकि संहार का प्रतीक है। अतः जगदंबा शाकम्भरी देवी जी ही अप्रत्यक्ष रूप से परमशक्ति परमेश्वरी महामाया है। माँ का शक्तिपीठ अति प्राचीन है। माता के बुलाने पर भक्तजन चुंबकीय शक्ति की तरह दरबार की और खींचें चले आते है।माता के भवन की परिक्रमा मे काल भैरव,ज्वाला देवी,काली माता,शिवजी,गणेश भगवान, हनुमान जी नैना चरवाहा आदि के लघु मंदिर बने हुए है। जगत को तारने वाली और शरणागत का परित्राण करने वाली महाशक्ति जगत माता चंडिका साक्षात माँ शाकम्भरी ही है। माँ अंबा भगवती भवानी भुवनेश्वरी भंडारे भरने वाली है।माँ सर्वव्यापी और सर्वविदित है पुरातन काल मे माँ शाकम्भरी देवी ही हिमालय की पर्वत शृंखलाओं मे प्रकट हुई थी अतः माँ का सर्वाधिक प्राचीनतम तीर्थ यही है और सतयुग मे देवी सती का शीश भी यहाँ गिरा जो इसकी प्राचीनता की पुष्टि करता है। माँ शाकम्भरी चौहान सहित अनेक राजपूतो और अन्य जातियों की कुलदेवी है 8वीं शताब्दी के काल मे अनेकों राजपूत अपने राज्य का विस्तार करते हुए राजस्थान पहुंच गए वहाँ जाकर भी उन्होंने अपनी कुलदेवी माँ शाकम्भरी के भव्य मंदिर बनवाये और आशाएं पूरी करने वाली माँ शाकम्भरी आशापुरा नाम से भी विख्यात हुई।माँ आदिशक्ति जगतजननी जगदंबिका योगमाया शाकम्भरी जंगल मे मंगल करने वाली भगवती है। माँ के सिद्ध शक्तिपीठ का उल्लेख महाभारत के वन पर्व मे इस प्रकार है राजन उस पवित्र देवी स्थान की यात्रा करे जो तीनों लोको मे शाकम्भरी के नाम से विख्यात है "। यहाँ पर यह वर्णन शिवालिक पर्वत पर विराजमान शाकम्भरी देवी का ही है क्योंकि इस वर्णन मे शाकेश्वर महादेव का भी उल्लेख है जो शाकम्भरी देवी मंदिर के पीछे पहाड़ी की गोद मे है। लेकिन वर्तमान मे उन लोगों की कमी नही है जो इस मंदिर की प्राचीनता को लेकर संदेह करते है। अगर मंदिर की प्राचीनता के बारे मे पता करना है तो महाभारत के वनपर्व और स्कंद पुराण के केदारखंड का अध्ययन नितांत आवश्यक है क्योंकि केवल अनुमान लगाने से कुछ हासिल नही हो सकता। पांडवों द्वारा स्थापित पांच शिवमंदिर भी यहाँ है यथा बडकेश्वर महादेव, शाकेश्वर महादेव, इन्दरेश्वर महादेव, कमलेश्वर महादेव और वटुकेश्वर महादेव।
                                     

3. मंदिर की भौगोलिक अवस्था

माता का मंदिर चारों और से पहाडियों से घिरा हुआ है जिनकी ऊंचाई 500 से 800 मीटर तक है। इस क्षेत्र मे बेर, बेलपत्र, सराल, तुरड, महव्वा,आंवला,तेंदू, कढाई, शीशम, खैर, सराल, आम, जामुन, डैक,अमलतास, पलाश,नीम, सांगवान, साल आदि के पेड़ अत्यधिक पाये जाते है। इसके अतिरिक्त शिवालिक की ये पहाडियां आयुर्वेद औषधियों से परिपूर्ण है। इस क्षेत्र मे बंदर, काले मुंह वाले लंगूर, हाथी, हिरन, चित्तल, जंगली बकरे, मुर्गे, तोते, सेह, बलाई, लोमडे, गुलदार, माहें, तेंदुए आदि वन्य जीव निवास करते हैं। शाकम्भरी देवी सिद्धपीठ के उत्तर की और सात किमी दूर सहंस्रा ठाकुर धाम है जोकि प्राकृतिक आभा से परिपूर्ण है। सहंस्रा ठाकुर के पास ही प्राचीन गौतम ऋषि की गुफा, सुर्यकुंड आदि पवित्र स्थान है। शाकम्भरी देवी मंदिर के पास ही माता छिन्नमस्ता देवी और मनसा देवी का संयुक्त मंदिर है। माता छिन्नमस्ता का मंदिर चार शिव मंदिरों के बीच मे है पूर्व मे कमलेश्वर महादेव,पश्चिम मे शाकेश्वर महादेव, उत्तर मे वटुकेश्वर महादेव और दक्षिण मे इन्दरेश्वर महादेव के मंदिर है। माता शाकम्भरी देवी के मंदिर से एक फर्लांग आगे पहाडियों के बीच प्राचीन रक्तदंतिका देवी का मंदिर है जिसका जीर्णोद्धार 1968 के लगभग मे हुआ था। रक्तदंतिका मंदिर से कुछ आगे महाकाली की प्राचीन गुफा भी है। माता शाकंभरी देवी मंदिर के बारे में मान्यता है कि नवरात्र की चतुर्दशी पर यहां शेर भी शीश नवाने के लिए आता था। जब माता का शेर यहां शीश नवाने के लिए आता था तब सभी भक्त रास्ता छोड़ देते थे और शेर शीश नवाकर चुपचाप चला जाता था। आज आसपास आबादी होने की वजह से शेर तो नही आता लेकिन शेर के आने के आने के प्रमाण जरूर मिलते हैं। इस मंदिर के बारे में ऐसी भी धारणा है कि इस मंदिर परिक्षेत्र में तेल से कोई भी खाद्य पदार्थ नहीं बनाया जाता था अगर कोई भूलवश भी तेल से खाद्य पदार्थ बनाने की कोशिश भी करता था तो उसकी दुकान में आग लग जाती थी इसलिए यहां पर सभी भोजन सामग्री घी से बनाई जाती थी।



                                     

4. आस - पास के प्राचीन तीर्थ

इस पावन सिद्धपीठ के लगभग 100 किलोमीटर दायरे के अंदर काफी और प्राचीन तीर्थ भी हैं जिनका वर्णन वेदों और पुराणों में किया गया है। माता शाकंभरी देवी मंदिर से 90 किलोमीटर दूर पूर्व की ओर हरिद्वार तीर्थ है जो कि उत्तराखंड राज्य मे है। सिद्धपीठ से 78 किलोमीटर दूर दक्षिण की ओर देवबंद नामक स्थान पर प्राचीन माता त्रिपुरा बाला सुंदरी का मंदिर है। इस पंचकोसी सिद्धपीठ से लगभग 81 किलोमीटर दूर पश्चिम की ओर श्री आदिबद्री तीर्थ और माता मंत्रा देवी और सरस्वती नदी का उद्गम स्थल है जो कि हरियाणा के यमुनानगर जिले में आता है। सिद्धपीठ से लगभग 35 किलोमीटर दूर पश्चिम की ओर यमुनानगर जिले में ही कालेश्वर महादेव का प्राचीन मठ है। शाकंभरी देवी से लगभग 99 किलोमीटर दूर त्रिलोकपुर धाम है जहां माता बाला सुंदरी का भव्य मंदिर है जोकि हिमाचल राज्य के जिला सिरमौर में पड़ता है। वर्तमान में माता शाकुंभरी देवी की गणना उत्तर भारत की प्रसिद्ध नौ देवी स्थलों मे की जाती है अगर उत्तर भारत की नौ देवियों के नाम आए तो बिना माता शाकंभरी की यात्रा के नौ देवियों की यात्रा संपूर्ण नहीं मानी जाती। नौ देवियों के नाम इस प्रकार हैं माता वैष्णो देवी कटरा,मां चामुंडा देवी, मां वज्रेश्वरी देवी कांगड़ा,मां ज्वाला देवी,मां चिंतपूर्णी देवी,मां नैना देवी,मां मनसा देवी पंचकूला,मां कालिका देवी,मां शाकम्भरी देवी लेखक अनिल सागडी

                                     

5. मंदिऔर देवी दर्शन

माँ शाकम्भरी देवी के भवन से लगभग एक किमी पहले बाबा भूरादेव का मंदिर है। भूरादेव के प्रथम दर्शन कर यात्री आगे प्रस्थान करते हैं। आगे का मार्ग पथरीला है जो एक खोल से होकर जाता है। वर्षा ऋतु मे खोल मे पानी भी आ जाता है। तब यात्रा स्थगित कर देनी चाहिए क्योंकि पानी का बहाव अधिक होता है। थोड़ा आगे चलने पर माँ शाकम्भरी देवी प्रवेश द्वार आता है। कुछ और आगे चलने पर माता का भवन दिखाई देने लगता है। माता के मंदिर मे प्रवेश करने से पहले श्रध्दालु पंक्ति मे लग जाते हैं और सीढिया चढकर माता के भवन मे पहुंच जाते हैं। माता के गर्भगृह मे माता शाकम्भरी देवी दाहिने भीमा, भ्रामरी और बाल गणेश तथा बायें और शताक्षी देवी की प्रतिमा विराजमान है। ये प्रतिमाएँ काफी प्राचीन है। लेकिन माता शाकम्भरी देवी की प्रतिमा अधिक प्राचीन है बाकी प्रतिमाओं को आदिगुरु शंकराचार्य जी ने स्थापित किया था। मंदिर की परिक्रमा मे कई देवी-देवताओ के लघु मंदिर बने हुए हैं।
                                     

6. शाकम्भरी देवी के अन्य मंदिर

सकराय धाम

माता शाकम्भरी देवी के मुख्य तीन मंदिर है। माता का दुसरा प्रमुख मंदिर राजस्थान के सकराय गाँव मे अरावली की पर्वतमालाओं की शांत मालकेतु घाटी मे है। यहाँ पर माता के दर्शन ब्रह्माणी और रुद्राणी के रूप मे होते है। माता का यह मंदिर सीकर जिले मे स्थित है। उदयपुरवाटी से यह लगभग १६ किमी की दूरी पर स्थित है। कस्बे के शाकंभरी गेट से १५ किलोमीटर दूर अरावली की पहाडिय़ों के बीच सकरायपीठ माता शाकंभरी का प्राचीन मंदिर स्थित है। मां शाकंभरी के मंदिर की स्थापना सैकड़ों वर्ष पूर्व में हुई थी। माता के मंदिर में ब्रह्माणी व रूद्राणी के रूप में दो प्रतिमाएं विराजमान हैं।सिद्धपीठ होने से माता की ख्याति आज पूरे भारत में फैली हुई है। मंदिर के पुजारियों के अनुसार माता शाकंभरी के प्राचीन तीन मंदिर है। पहला प्राचीन मंदिर यहां सकराय में तो दूसरा उत्तर प्रदेश के सहारनपुर मे है और तीसरा राजस्थान के ही साम्भर मे है।माँ का यह पावन धाम अरावली की सुंदर पहाडियों की शांत मालकेतू घाटी मे है। प्रतिदिन सुबह साढ़े पांच बजे और शाम को पौने सात बजे माता की आरती होती है। नवरात्र में माता के दरबार में जगह शतचंडी अनुष्ठानों का आयोजन होता है। जगदंबा के दरबार मे अब तक पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा सिंह पाटिल, पूर्व उप राष्ट्रपति भैरूसिंह शेखावत, मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, सपा के अमरसिंह पहुंच चुके है। इनके अलावा फिल्म स्टार मनोज कुमार, अजय देवगन, काजोल, तनिशा सहित सैंकड़ों अति विशिष्टजन नवरात्र में मां शाकम्भरी के दरबार में दर्शन कर चुके है क्योंकि माँ की लीला अति विचित्र है। मैय्या के चमत्कारो को सुन हर कोई सकराय दौड़ा जाता है। मां शाकंभरी के जाने के लिए एकमात्र मार्ग उदयपुरवाटी से होकर गुजरता है। इसके अलावा जयपुर रोड से गौरिया के रास्ते से होते हुए भी मां शाकंभरी के दरबार में श्रद्धालु पहुंचते हैं लेकिन पहाडिय़ों के मध्य निकले इस रास्ते मे काफी खतरनाक मोड़ है। कहा जाता है कि यहाँ माँ शाकम्भरी अर्थात ब्रह्माणी को सात्विक और रूद्राणी को तामसिक भोजन परोसा जाता था। भोग के समय देवी की मूर्तियों के बीच पर्दा लगाया जाता था। एक दिन भूलवश माँ ब्रह्माणी अर्थात शाकम्भरी के भोग के थाल से रूद्राणी अर्थात काली का भोग थाल छू गया। तब माँ की मूर्ति का मुख तिरछी और हो गया। अतः इस मंदिर से तामसिक भोग की प्रथा बंद हुई और दोनों माताओं को सात्विक भोग दिया जाने लगा। माँ शाकम्भरी के भक्त सकराय धाम की यात्रा कर अपनी जीवन यात्रा धन्य बनाये

साम्भर धाम

माता का यह स्थान जयपुर जिले मे साम्भर कस्बे के पास साम्भर झील मे एक छोटी सी पहाड़ी पर है। चिलचिलाती धूप और रेगिस्तान की तपती रेत के बीच यह आध्यात्मिक स्थान है। माता का यह मंदिर

पृथ्वीराज चौहान के समय बनाया गया था। उससे पहले यहाँ जंगल होता था और घाटी देवी की बनी कहलाती थी। राजस्थान की राजधानी जयपुर से करीब 100 किलोमीटर दूर सांभर कस्बे में स्थित मां शाकंभरी मंदिर करीब 2500 साल पुराना बताया जाता है। शाकंभरी को दुर्गा का अवतार माना जाता है। मंदिर में भादवा सुदी अष्टमी को मेला आयोजित होता है। दोनों ही नवरात्रों में माता के दर्शन करने के लिए दूर-दूर से भक्त आते हैं। दंत कथाओं और स्थानीय लोगों के मुताबिक मां शाकंभरी की कृपा से यहां चांदी की भूमि उत्पन्न हुई। चांदी के साथ ही यहां इस बात को लेकर झगड़े शुरू हो गए। जब समस्या ने विकट रूप ले लिा तो मां ने यहां बहुमूल्य सम्पदा और बेशकीमती चांदी को नमक में बदल दिया। इस तरह से सांभर झील की उत्पत्ति हुई। वर्तमान में करीब 90 वर्गमील में यहां नमक की झील है।

इसके अलावा देवी के अन्य धाम

शाकम्भरी धाम कटक शाकम्भरी धाम केदारहिल्स शाकम्भरी देवी हरिद्वार



                                     

7. बनशंकरी देवी

माँ बनशंकरी देवी का मंदिर भारत के कर्नाटक राज्य के बागलकोट जिले में बादामी के पास स्थित एक हिंदू मंदिर है। मंदिर को बनशंकरी या वनशंकरी कहा जाता है क्योंकि यह तिलकारण्य वन में स्थित है। मंदिर की देवी को शाकुम्भरी भी कहा जाता है, जो देवी आदिशक्ति का स्वरूप है।
                                     

8. शाकम्भरी देवी का स्वरूप

माता शाकम्भरी देवी के स्वरूप का विस्तृत वर्णन श्री दुर्गा सप्तशती के अंत में मूर्ति रहस्य में मिलता है। इसके अनुसार शाकंभरी देवी नीलवर्णा है । नील कमल के समान उनके नेत्र हैं। गंभीर नाभि है। त्रिवल्ली से विभूषित सूक्ष्म उदर वाली है । यह माता कमल पर विराजमान हैं। उनके एक हाथ में कमल है जिन पर भंवरे गूंज रहे हैं ये परमेश्वरी अत्यंत तेजस्वी धनुष को धारण करती हैं। ये ही देवी शाकम्भरी है शताक्षी तथा दुर्गा नाम से भी यही कही जाती है। ये ही विशोका, दुष्टदमनी,सती,चंडी,मां गौरी,कालिका तथा विपत्तियों का विनाश करने वाली पार्वती है। जो मनुष्य शाकम्भरी का ध्यान जब पूजा स्तुति और नमस्कार करता है ।वह शीघ्र ही अन्न पान,फल और अमृत रूपी अक्षय फल पाता है।

                                     

9. पंचकोसी सिद्धपीठ

माँ शाकुम्भरी देवी के मंदिर को पंचकोसी सिद्धपीठ कहते हैं। देवताओं के आग्रह पर माँ ने पंचकोसी सिद्धपीठ मे आसन लगाया था। माँ की महिमा का वर्णन शाकम्भरी चालीसा मे इस प्रकार है- पांचकोस की खोल तुम्हारी तेरी लीला अति विस्तारी पंचकोसी सिद्धपीठ की महिमा श्रीदेवी भागवत् मे शाकम्भरी,शताक्षी महात्म्य मे मिलती है उसके अनुसार देवता माँ शाकम्भरी को पंचकोसी मे विराजित रहने वाली कह रहे हैं।

                                     

10. शाकम्भरी देवी की महिमा

जय शाकंभरी माता ब्रह्मा विष्णु शिव दाता हम सब उतारे तेरी आरती री मैया हम सब उतारे तेरी आरती

संकट मोचनी जय शाकंभरी तेरा नाम सुना है री मैया राजा ऋषियों पर जाता मेधा ऋषि भजे सुमाता हम सब उतारे तेरी आरती

मांग सिंदूर विराजत मैया टीका शुभ सजे है सुंदर रूप भवन में लागे घंटा खूब बजे है री मैया जहां भूमंडल जाता जय शाकंभरी माता हम सब उतारे तेरी आरती

क्रोधित होकर चली मात जब शुंभ निशुंभ को मारा को मारा महिषासुर की बांह पकड़ कर धरती पर दे मारा मैया मारकंडे विजय बताता पुष्पा ब्रह्मा बरसाता हम सब उतारे तेरी आरती

चौसठ योगिनी मंगल गाने भैरव नाच दिखावे। भीमा भ्रामरी और शताक्षी तांडव नाच सिखावें री मैया रत्नों का हार मंगाता दुर्गे तेरी भेंट चढ़ाता हम सब उतारे तेरी आरती

कोई भक्त कहीं ब्रह्माणी कोई कहे रुद्राणी तीन लोक से सुना री मैया कहते कमला रानी री मैया मां से बच्चे का नाता ना ही कपूत निभाता हम सब उतारे तेरी आरती

सुंदर चोले भक्त पहनावे गले मे सोरण माला शाकंभरी कोई दुर्गे कहता कोई कहता ज्वाला री मैया दुर्गे में आज मानता तेरा ही पुत्र कहाता हम सब उतारे तेरी आरती

शाकंभरी मैया की आरती जो भी प्रेम से गावें सुख संतति मिलती उसको नाना फल भी पावे री मैया जो जो तेरी सेवा करता लक्ष्मी से पूरा भरता हम सब उतारे तेरी आरती



                                     

11. कैसे पहुंचे

शाकुंभरी देवी का प्रसिद्ध मंदिर उत्तर प्रदेश राज्य के जिला सहारनपुर में पड़ता है। इसके लिए सबसे पहले सहारनपुर पहुंचना होता है। दिल्ली से सहारनपुर लगभग 182 किलोमीटर दूर पड़ता है और पंजाब की ओर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अंबाला वाया यमुना नगर मार्ग अत्याधिक सुगम है । चंडीगढ़ से पंचकूला होते हुए नेशनल हाईवे 73 द्वारा सीधे सहारनपुर पहुंचा जा सकता है । सहारनपुर के निकटतम हवाई अड्डा देहरादून चंडीगढ़ और दिल्ली है जो लगभग 50 से 150 किलोमीटर तक के दायरे में हैं। हिमाचल प्रदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सहारनपुर आना जरूरी नहीं है। पौंटा साहिब से हथिनी कुंड बैराज होते हुए बेहट पहुंचा जा सकता है। बेहट से शाकंभरी देवी का मंदिर 16 किमी दूर है।

                                     

12. मंदिर

माता शाकम्भरी देवी सिद्धपीठ के मंदिरों की सूची इस प्रकार है- 1शाकम्भरी देवी द्वार जो सिद्धपीठ से दो किमी पहले है। 2माता बगलामुखी मंदिर 3शनिदेव मंदिर 4पंचमुखी हनुमान मंदिर 5बडकेश्वर महादेव मंदिर 6भूरादेव मंदिर 7इन्दरेश्वर महादेव मंदिर 8मनसा/ छिन्नमस्ता मंदिर 9कमलेश्वर हादेव मंदिर 10शाकेश्वर महादेव मंदिर 11शंकराचार्य आश्रम 12शाकम्भरी संस्कृत माध्यमिक विद्यालय 13श्री शाकम्भरी देवी भवन मंदिर 14बीरखेत का मैदान 15वटुकेश्वर महादेव मंदिर 16रक्तदंतिका मंदिर 17महाकाली की गुफा 18प्रेत शिला 19सहंस्रा ठाकुर धाम 20सूर्यकुण्ड 21गौतम ऋषि की गुफा 22बाणगंगा

माता शाकुंभरी देवी का मंदिर शिवालिक की पर्वत मालाओं में बना हुआ है। यह स्थान प्राचीन सिद्ध शक्तिपीठ है। प्राचीन सिद्ध शक्तिपीठ होने के कारण भी यह उपेक्षित रहा । सरकार यहां कोई भी विकास कार्य नहीं करवा सकती। जनमानस को वर्षा ऋतु के दौरान बरसाती नदी से निकलकर मंदिर जाना होता है। मंदिर तक पहुंचने के लिए 1 किलोमीटर तक कोई सड़क नहीं है बल्कि नदी के बीच से गुजर कर जाना होता है। बरसात के दिनों में जब नदी में भयंकर बाढ़ आती है तो काफी श्रद्धालु बह जाते हैं। जिससे जानमाल का काफी नुकसान होता है। शारदीय नवरात्र के दौरान यहां एक बहुत बड़ा मेला लगता है। वैसे यहां पर साल में तीन बड़े मेले लगते हैं। जिनमें शारदीय नवरात्र मेला मुख्य माना जाता है। इस मेले में देश के विभिन्न भागों से करोड़ों श्रद्धालु श्रद्धा की जोत मन में जगा कर माता के दरबार में हाजिरी देने आते हैं। प्रमुख प्रधान शक्तिपीठ होने के बाद भी यहां पर जिला प्रशासन द्वारा बनागई तो तमाम व्यवस्थाएं धरी की धरी रह जाती है। शारदीय नवरात्र के दौरान नदी में बाढ़ आ जाती है और पूरा मेला तहस-नहस हो जाता है। इस शक्तिपीठ में मूलभूत सुविधाएं श्रद्धालुओं को मिलनी चाहिए ताकि शक्तिपीठ की गरिमा बनी रहे और अचानक आई बाढ़ से निपटा जा सके। यहां चढ़ावे के रूप में इतनी राशि चढ़ती है कि सरकार को अपनी ओर से एक रुपया भी खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
                                     

13. पुराणों मे शाकम्भरी पीठ का उल्लेख

माँ शाकम्भरी पीठ का वर्णन स्कंद पुराण, भागवत् पुराण, शिव पुराण, मारकंडेय पुराण, कनक धारा स्तोत्र, देवी पुराण, महाभारत आदि ग्रंथों मे मिलता है। महाभारत के वनपर्व के अनुसार,

ततो गच्छेत राजेन्द्र देव्या स्थानं सुदुर्लभं। शाकम्भरीति विख्याता त्रिषुलोकेशु विश्रुता।। दिव्यवर्ष सहस्त्र शाकेन किल सुव्रता आहार सा कृतवती मासि मासि नराधिप ऋषियों अभ्यागतास्तत्र देव्या भक्त्यातपोधना: आतिथ्य च कृतम तेषाम् शाकेन किल भारत

                                     
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शब्दकोश

अनुवाद

माँ शाकम्भरी देवी मन्दिर ऐसी मान्यता है Maa.

लखनऊ। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वह देवबंद से करीब 40 किमी दूर सहारनपुर में स्थित शाकम्भरी पीठ से चुनाव प्रचार की शुरुआत करेंगे। उल्‍लेखनीय है कि बीएसपी सुप्रीमो मायावती और समाजवादी पार्टी के अध्‍यक्ष अखिलेश. स्वाती शाकम्भरी को 2018 का मैसाम युवा सम्मान. लोकसभा चुनाव: अखिलेश को जवाब देने योगी आदित्यनाथ शाकंभरी पीठ से करेंगे चुनाव प्रचार की शुरुआत. सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वह देवबंद से करीब 40 किमी दूर सहारनपुर में स्थित शाकम्भरी पीठ से चुनाव प्रचार की शुरूआत करेंगे। उन्होंने. पांच शहरों में रिलीज हुई जय मां शाकम्भरी. Comments. आप यहाँ पर शाकम्भरी gk, मंदिर question answers, jaipur general knowledge, rajasthan सामान्य ज्ञान, questions in hindi, notes in hindi, pdf in hindi आदि विषय पर अपने जवाब दे सकते हैं। इस टॉपिक पर कोई भी जवाब प्राप्त नहीं हुए हैं क्योंकि यह हाल ही में जोड़ा गया. क्या सच में लोगो का भीषण अकाल में भरण पोषण करने. भगवती शताक्षी शाकम्भरी. भगवती शाकम्भरी. प्राचीन समयकी बात है। दुर्गम नामका एक महान् दैत्य था। उसका जन्म हिरण्याक्षके कुलमें हुआ था तथा उसके पिताका नाम रुरु था। ​देवताओंका बल वेद है। वेदके लुप्त हो जानेपर देवता भी नहीं. Shakambari Purnima. हरि ॐ श्री शाकुम्भरी अम्बाजी की आरती कीजो। ऐसी अद्भुत रूप हृदय धर लीजो, शताक्षी दयालु की आरती कीजो। तुम परिपूर्ण आदि भवानी मां, सब घट तुम आप बखानी मां.


श्री शाकम्भरी जयंती Hindi News Latest पंजाब केसरी.

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भागलपुर:माँ शाकम्भरी वार्षिक जयंती पर निकली.

शाकंभरी सहारनपुर । मां शाकं भरी देवी के दर्शन करने से मनुष्य के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। नवरात्र सहित अन्य दिनों में रोजान लाखों श्रद्धालु मां के दर्शन करने पहुंचते हैं। इन दिनों. शाकम्भरी पूर्णिमा आज, जानिए इसकी Namaste. माँ शाकम्भरी देवी मन्दिर ऐसी मान्यता है कि माँ शाकम्भरी मानव के कल्याण के लिये धरती पर आयी थी। मां शाकंभरी के तीन शक्तिपीठों की, नौ देवियों में से एक. मां शाकम्भरी की ताज़ा ख़बर, मां शाकम्भरी. सम्पूर्ण भारतवर्ष में प्रसिद्ध मां शाकम्भरी देवी शक्तिपीठ ऐसा शक्तिपीठ है जिसके बारे में यह मान्यता है कि इस स्थान पर रहकर देवी ने एक सहस्र वर्षों तक हर माह के अंत में एक बार शाकाहार करते हुए घोर तप किया था। इस तीर्थ की. राज्य पोषित. मां शाकम्भरी को 151 फीट लंबी चुनरी चढ़ा कर भक्तों ने नवाया शीश, तेज धूप. उदयपुरवाटी. 151 फीट लंबी माता की दो चुनरी, डीजे पर बजते माता के भजन, जयकारों की कृतलध्वनि के साथ बढ़ते श्रद्धालु। नवरात्र की नवमीं पर रविवार को माता शाकंभरी के.





सीएम बघेल आज माँ शाकम्भरी महोत्सव में होंगे.

Dharma Karma News in Hindi: शाकम्भरी पूर्णिमा के दिन ऐसा करने से भरा रहेगा अन्न व धन का भंडार. जानिए कैसे मनाये शाकम्भरी देवी जयंती Hindi News. माता शाकम्भरी देवी जयंती मनाई धूमधाम से…. By. Aman Verma. January 22, 2019. 0. 61. Share on Facebook Tweet on Twitter. SHARE Previous articleसमाजवादी विकास विजन सामाजिक न्याय पदयात्रा का समापन. Next articleमाता शाकम्भरी देवी जयंती मनाई धूमधाम से….


शाकम्भरी प्रदेश के सांस्कृतिक विकास E Pustakalaya.

Опубликовано: 26 дек. 2017 г. शाकंभरी नवरात्र, 9 दिनों तक होती है तंत्र मंत्र से. धार्मिक हिन्दी फिल्म जय मां शाकम्भरी को जिप सदस्य व पूर्व प्रधान पूसाराम गोदारा ने फीता काटकर दर्शकों के समक्ष प्रदर्शनार्थ प्रस्तुत किया। इस अवसर पर उपस्थित दर्शकों को सम्बोधित करते हुए गोदारा ने कहा कि यह शिक्षाप्रद Следующая Войти Настройки Конфиденциальность Условия. देवी शाकम्भरी मंदिर शुक्रताल उत्तर प्रदेश पर्यटन. बन्दउ माँ शाकम्भरी चरणगुरू का धरकर ध्यान, शाकम्भरी माँ चालीसा का करे प्रख्यान ॥ आनंदमयी जगदम्बिका अनन्तरूप भण्डार, माँ शाकम्भरी की कृपा बनी रहे हर बार ॥ ॥ चालीसा ॥ शाकम्भरी माँ अति सुखकारी, पूर्ण ब्रह्म सदा दुःखहारी ॥ काकरण जगत.


मां शाकम्भरी पूजा महोत्सव 21 को अंबा Naidunia.

लखनऊ, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लोकसभा चुनाव प्रचार का आगाज सहारनपुर में स्थित शाकम्भरी पीठ से करेंगे। बसपा सुप्रीमो मायावती और समाजवादी. भगवती शताक्षी शाकम्भरी Ekvastra. Опубликовано: 1 янв. 2020 г.


Shakambhari mata chalisha bhajan lyrics.

स्वाती शाकम्भरी को 2018 का मैसाम युवा सम्मान. नयी दिल्ली​, 09 सितम्बर वार्ता चालीस वर्ष से कम आयु के मैथिली साहित्यकारों के प्रोत्साहन के लिए प्रतिवर्ष दिया जाने वाला मैसाम युवा सम्मान इस वर्ष बिहार के समस्तीपुर जिला. शाकम्भरी माता टेम्पल के पास बिक्री के लिए. मूल्य Rs. 0 पृष्ठ 96 साइज 3 MB लेखक रचियता कस्तूरचंद कासलीवाल Kasturchand Kasleeval शाकम्भरी प्रदेश के सांस्कृतिक विकास में जैनधर्म का योगदान पुस्तक पीडीऍफ़ डाउनलोड करें, ऑनलाइन पढ़ें, Reviews पढ़ें Shakambhari Pradesh Ke Sanskritik Vikas. Know unknown facts about Maa Shakambari Devi Hindi News. बोले,मोदी फिर से पीएम बन बढ़ाएंगे विकास रथ को आगे और करेंगे आतंकवाद का खात्मा सहारनपुर गौरव सिंघल । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को प्रदेश की पहली लोकसभा सीट सहारनपुर में.


शाकम्भरी माता साँभर Archives मिशन कुलदेवी.

गुरुवार की रात करें शाकम्भरी लक्ष्मी साधना खजाने के देवता कुबेर समान मिलेगा धन!! पैसा खुदा तो माँ शाकम्भरी का वेबसाईट आप mbhri,in विजिट करे एवं अधिक जानकारी पायें एवं अपने सभी ग्रुप में भेजें – पुण्य के भागीदार बने!! जीवन में. माता शाकम्भरी देवी जयंती मनाई धूमधाम से…. Crime. आद्या शक्ति पधान, शाकम्भरी चरण युगल I प्रणमिअ पुनि करि ध्यान, नील कमल रुचि अति बिमल II ॥चौपाई॥ जय श्री शाकम्भरी जगदम्बे, सकल चराचर जग अविलम्बए I जयति सृष्टि पालन संहारिणी, भव सागर दारुण दुःख हारिणी II. नमो नमो शाकम्भरी माता, सुख. पर्यटन धर्मस्थल: मां शाकम्भरी, जिन्होंने एक सहस्र. आज पौष मास की पूर्णिमा है। मार्कडेय पुराण के अनुसार, इस दिन माता शाकंभरी की जयंती है। माता शाकंभरी को देवी दुर्गा का रूप कहा गया है। माना जाता है कि प. मां शाकम्भरी news in hindi, मां शाकम्भरी से जुड़ी. थानाभवन क्षेत्र में शाकम्भरी देवी के दर्शन कर वहां से वापस लौट रही पिकअप गाड़ी का टायर फट गया। गाड़ी सड़क किनारे बने गड्ढे में पलट गई। हादसे में लगभग तीस महिला पुरुष व बच्चे घायल हो गए।.


शाकम्भरी देवी की आरती । Shakumbhari Devi वेबदुनिया.

शक्तिपीठ शाकुम्भरी, जिसका मतलब शक्ति देवी शाकुम्भरी का निवास है, उत्तर भारत में उत्तर प्रदेश राज्य में सहारनपुर के उत्तर में 40 किलोमीटर की दूरी पर जसमोर गांव के क्षेत्र में स्थित है। इसमें हिंदू देवताओं के दो महत्वपूर्ण मंदिर हैं: एक​. Shakambari Purnima 2019 Date शाकम्भरी पूर्णिमा के. क्र. नाम, डाउनलोड देखे. 1.1, श्री विधि के क्षेत्र विस्तार से धान की उत्पादकता वर्धन, डाउनलोड देखे. 1.2, द्विफसलीय क्षेत्र विस्तार हेतु रबी फसल प्रदर्शन, डाउनलोड देखे. 1.3, ग्रीष्मकालीन धान के बदले दलहन, तिलहन, मक्का फसल को प्रोत्साहन, डाउनलोड.





सीएम योगी लोकसभा चुनाव अभियान का आगाज.

धार्मिक हिन्दी फिल्म जय मां शाकम्भरी को जिप सदस्य व पूर्व प्रधान पूसाराम गोदारा ने फीता काटकर दर्शकों के समक्ष प्रदर्शनार्थ प्रस्तुत किया। इस अवसर पर उपस्थित दर्शकों को सम्बोधित करते हुए गोदारा ने कहा कि यह शिक्षाप्रद Следующая Войти Настройки. मां शाकम्भरी के दरबार में होती है हर मुराद पूरी. मां शाकम्भरी परिवार की ओर से शनिवार को खरमनचक में मां शाकम्भरी का पांचवां वार्षिक उत्सव धूमधाम से मनाया गया। मां का आकर्षक दरबार सजा.


श्री शाकम्भरी चालीसा Shri Shakambhari Blocks Infotech.

सहारनपुर: जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती तसमीम बानो ने सिद्धपीठ मां शाकम्भरी देवी पर आयोजित होने वाले मेले के संबंध के चालक के अचानक ट्रैक्टर मोडऩे से सिद्धपीठ शाकम्भरी देवी दर्शन को जा रहे श्रद्धालुओं की पिकअप ट्रैक्टर ट्राली से. सहारनपुर मुख्यमंत्री योगी ने शाकम्भरी देवी का. इन्दौर । सृष्टि में फल फूल, वनस्पति और साग सब्जी की आपूर्ति करने वाली देवी मां शाकम्भरी का जयंती महोत्सव शुक्रवार.


शाकम्भरी माता मंदिर जयपुर राजस्थान 60210.

शाकम्भरी में सजा मां का दरबार, घट स्थापना के साथ गुप्त नवरात्र शुरू उदयपुरवाटी. माता शाकम्भरी के मंदिर में मंगलवार को घट स्थापना के साथ गुप …. सिद्धपीठ शाकम्भरी देवी. श्री शाकम्भरी माता शाकम्भरी देवी दुर्गा के अवतारों में एक हैं। दुर्गा के सभी अवतारों में से रक्तदंतिका,भीमा, भ्रामरी, शताक्षी तथा शाकंभरी प्रसिद्ध हैं।. 151 Feet Length Chunari For Shakambari Mata मां शाकम्भरी. 1 इलाहाबाद जिले में, 2 सहारनपुर जिले में, 3 आगरा जिले में, 4 मेरठ जिले में.


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