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बाँसुरी
                                     

ⓘ बाँसुरी

बांसुरी काष्ठ वाद्य परिवार का एक संगीत उपकरण है। नरकट वाले काष्ठ वाद्य उपकरणों के विपरीत, बांसुरी एक एरोफोन या बिना नरकट वाला वायु उपकरण है जो एक छिद्र के पार हवा के प्रवाह से ध्वनि उत्पन्न करता है। होर्नबोस्टल-सैश्स के उपकरण वर्गीकरण के अनुसार, बांसुरी को तीव्र-आघात एरोफोन के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।

बांसुरीवादक को एक फ्लूट प्लेयर, एक फ्लाउटिस्ट, एक फ्लूटिस्ट, या कभी कभी एक फ्लूटर के रूप में संदर्भित किया जाता है।

बांसुरी पूर्वकालीन ज्ञात संगीत उपकरणों में से एक है। करीब 40.000 से 35.000 साल पहले की तिथि की कई बांसुरियां जर्मनी के स्वाबियन अल्ब क्षेत्र में पागई हैं। यह बांसुरियां दर्शाती हैं कि यूरोप में एक विकसित संगीत परंपरा आधुनिक मानव की उपस्थिति के प्रारंभिक काल से ही अस्तित्व में है।

                                     

1. इतिहास

खोजी गई सबसे पुरानी बांसुरी गुफा में रहने वाले एक तरुण भालू की जाँघ की हड्डी का एक टुकड़ा हो सकती है, जिसमें दो से चार छेद हो सकते हैं, यह स्लोवेनिया के डिव्जे बेब में पागई है और करीब 43.000 साल पुरानी है। हालांकि, इस तथ्य की प्रामाणिकता अक्सर विवादित रहती है। 2008 में जर्मनी के उल्म के पास होहल फेल्स गुहा में एक और कम से कम 35.000 साल पुरानी बांसुरी पाई गई। इस पाँच छेद वाली बांसुरी में एक वी-आकार का मुखपत्र है और यह एक गिद्ध के पंख की हड्डी से बनी है। खोज में शामिल शोधकर्ताओं ने अपने निष्कर्षों को अगस्त 2009 में नेचर नामक जर्नल में आधिकारिक तौपर प्रकाशित किया। यह खोज इतिहास में किसी भी वाद्य यंत्र की सबसे पुरानी मान्य खोज भी है। बांसुरी, पागए कई यंत्रों में से एक है, यह होहल फेल्स के शुक्र के सामने और प्राचीनतम ज्ञात मानव नक्काशी से थोड़ी सी दूरी पर होहल फेल्स की गुफा में पागई थी। खोज की घोषणा पर, वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया कि "जब आधुनिक मानव ने यूरोप को उपिनवेशिशत किया था, खोज उस समय की एक सुतस्थापित संगीत परंपरा की उपस्थिति को प्रदर्शित करती है". वैज्ञानिकों ने यह सुझाव भी दिया है कि, बांसुरी की खोज निएंदरथेल्स और प्रारंभिक आधुनिक मानव "के बीच संभवतः व्यवहारिक और सृजनात्मक खाड़ी" को समझाने में सहायता भी कर सकती है।

मेमथ के दांत से निर्मित, 18.7 सेमी लम्बी, तीन छिद्रों वाली बांसुरी दक्षिणी जर्मन स्वाबियन अल्ब में उल्म के निकट स्थिति Geißenklösterle गुफा से प्राप्त हुई है और इसकी तिथि 30000 से 37.000 वर्ष पूर्व निश्चित की गयी है 2004 में खोजी गयी थी और दो अन्य हंस हड्डियों से निर्मित बांसुरियां जो एक दशक पहले खुदाई में प्राप्त हुई थी जर्मनी की इसी गुफा से, जिनकी तिथि लगभग 36.000 साल पूर्व प्राप्त होती है प्राचीनतम ज्ञात वाद्ययंत्रों में से हैं।

पांच से आठ छिद्रों वाली नौ हज़ार वर्ष पुरानी गुडी शाबि्दक अर्थ "हड्डी" बांसुरी, जिनकी निर्माण लाल कलगी वाले क्रेन के पंख की हड्डियों से किया गया है, को मध्य चीन के एक प्रान्त हेन्नन मँ स्थित जिअहु के एक मकबरे से खनित किया गया है।

प्राचीनतम प्रचलित आड़ी बांसुरी चीन के हुबेई प्रांत के सुइज़्हौ स्थल पर जेंग के मारकिस यी की कब्र में पागई एक ची 篪 बांसुरी है। यह 433 ई.पू. उत्तर झाऊ वंश से संबंधित है। यह रोगन किए हुए बांस से बनी हुई बंद छोरों वाली होती है तथा इसके पांच छिद्र शीर्ष की ओर न होकर दूसरे छोपर होते हैं। परम्परा के अनुसार, कन्फ्युशियस के द्वारा संकलित एवं संपादित शी जिंग में ची बांसुरी का वर्णन है।

बाइबिल की जेनेसिस 4:21 में जुबल को, "उन सभी का पिता जो उगब और किन्नौर बजाते हैं", बताया गया है। पूर्ववर्ती हिब्रू शब्द कुछ वायु वाद्य यंत्रों या सामान्यतः वायु यंत्रों को संदर्भित करता है, उत्तरवर्ती एक तारदार वाद्य यंत्र या सामान्यतः तारदार वाद्ययंत्र को संदर्भित करता है। अतएव, जूडियो ईसाई परंपरा में जुबल को बांसुरी इस बाईबिल पैराग्राफ के कुछ अनुवादों में प्रयुक्त शब्द का आविष्कारक माना जाता है। पहले के कुछ बांसुरी टिबियासघुटने के नीचे की हड्डी से बने हुए थे। भारतीय संस्कृति एवं पुराणों में भी बांसुरी हमेशा से आवश्यक अंग रहा है, एवं कुछ वृतातों द्वारा क्रॉस बांसुरी का उद्भव भारत में ही माना जाता है क्योंकि 1500 ई.पू. के भारतीय साहित्य में क्रॉस बांसुरी का विस्तार से विवरण है।

                                     

2. बांसुरी ध्वनि विज्ञान

जब यंत्र के छिद्र के आर-पार वायु धारा प्रवाहित की जाती है, जिससे छिद्पर वायु कंपन होने के कारण बांसुरी ध्वनि उत्पन्न करता है।

छिद्र के पार वायु एक बरनॉली या सिफॉन सृजित करती है जिसका प्रभाव वॉन कारमन वोरटैक्स स्ट्रीट तक होता है। यह बांसुरी में सामान्यतः मौजूद बेलनाकार अनुनादी गुहिका में वायु को उत्तेजित करती है। वादक यंत्र के छिद्रों को खोल एवं बंद कर के ध्वनि के स्वर में परिवर्तन करता है, इस प्रकार यह अनुनादी की प्रभावी लंबाई एवं इसके सदृश अनुनाद आवृत्ति में परिवर्तन होता है। वायु दाब में परिवर्तन के द्वारा एवं किसी भी छिद्र को खोले और बंद किये बगैर आधारभूत आवृत्ति के अलावा भी बांसुरी को गुणित स्वर पर अनुवाद के द्वारा वादक स्वर में भी परिवर्तन कर सकता है।

अधिक ध्वनि के लिये बांसुरी को अपेक्षाकृत बड़े अनुनादक, बड़ी वायु धारा या बड़े वायु धारा वेग का प्रयोग करना होगा. सामान्यतः बांसुरी की आवाज इसके अनुनादक और ध्वनि छिद्रों को बढ़ा करके बढ़ायी जा सकती है। इसलिए पुलिस की सीटी, जो बांसुरी का एक रूप है, अपने स्वर में बहुत विस्तृत होती है एवं इसीलिये पाइप आर्गन एक कंसर्ट बांसुरी की तुलना में अधिक तेज आवाज का हो सकता है: एक बड़े ऑर्गन पाइप में कुछ क्यूबिक फीट वायु हो सकती है एवं इसके ध्वनि छिद्र कुछ चौड़े हो सकते हैं, जबकि कंसर्ट बांसुरी की वायु धारा की माप एक इंच से थोड़ी ही बड़ी होती है।

वायु धारा को एक उचित कोण एवं वेग से प्रवाहित करना चाहिये अन्यथा बांसुरी में वायु में कंपन नहीं होगा. फिलिप्ड या नलिका वाली बांसुरियों में, संक्षिप्त रूप से गठित एवं स्थापित वायु मार्ग सिकुड़ेगा एवं खुली खिड़की के पार लेबियम रैम्प किनारे तक वायु प्रवाहित होगी. पाइप ऑर्गन में, यह वायु एक नियंत्रित धौकनी ब्लोअर द्वारा प्रवाहित होती है।

गैर फिपिल बांसुरी में वायु धारा निश्चित रूप में वादक के होठों से प्रवाहित होती है जिसे इंबोशर कहा जाता है। इससे वादक को विशेषकर फिपिल/ नलिका बांसुरियों की तुलना में स्वर, ध्वनि व आवाज की अभिव्यक्ति की विस्तृत श्रंखला की सुविधा प्राप्त होती है। हालांकि, इससे नौसिखिए वादक को रिकॉर्डर जैसे नलिका बांसुरियों की तुलना में अंतिम सिरे से बजने वाले या अनुप्रस्थ बांसुरियों द्वारा पूरी ध्वनि उत्पन्न करने में पर्याप्त कठिनाई होती है। अनुप्रस्थ एवं अंतिम सिरे से बजने वाले बांसुरी को बजाने के लिये अधिक वायु की आवश्यकता होती है जिसमें गहरे श्वसन की आवश्यकता होती है एवं यह चक्रीय श्वसन को पर्याप्त जटिल बनाता है।

सामान्यतः गुणवत्ता या "ध्वनि रंग", जिसे स्वर कहते हैं, में परिवर्तन होता है क्योंकि बांसुरी कई भागों एवं गहनताओं में सुर उत्पन्न कर सकते हैं। ध्वनि-रंग में छिद्र की आंतरिक आकृति जैसे कि शंक्वाकार नोक में परिवर्तन के द्वारा परिवर्तन या सुधार किया जा सकता है। सुर एक आवृति है जो एक निम्न रजिस्टर पूर्णांक गुणक है या बांसुरी का "आधारभूत" नोट है। सामान्यतः उच्च सुर उच्च अंशों की उत्पत्ति में वायु धारा पतली अधिक रूपों में कंपन, तीव्र वायु के अनुनाद को उत्तेजित करने के लिये अधिक ऊर्जा उपलब्ध कराना एवं छिद्र के पार कम गहरे वायु धारा का अधिक छिछले परावर्तन हेतु प्रवाहित की जाती है।

ध्वनि विज्ञान निष्पादन एवं स्वर के प्रति शीर्ष जोड़ ज्यामिति विशेष रूप से जटिल प्रतीत होती है, लेकिन उत्पादकों के मध्य किसी विशेष आकार को लेकर कोई सर्वसम्मति नहीं है। इमबोशर छिद्र की ध्वनि विज्ञान बाधा सबसे जटिल मानदंड प्रतीत होती है। ध्वनि विज्ञान बाधा को प्रभावित करने वाले जटिल कारकों में शामिल हैं: चिमनी की लंबाई ओठ-प्लेट और शीर्ष नली के मध्य छिद्र, चिमनी का व्यास एवं रडी या चिमनी के अंत सिरे का घुमाव तथा वाद्य यंत्र के "गले में कोई डिजाइन प्रतिबंध जैसा कि जापानी नोहकन बांसुरी में.

एक अध्ययन में, जिसमें व्यावसायिक वादकों की आँख में पट्टी बांधी गई, यह पाया गया कि वे विभिन्न धातुओं से बने वाद्य यंत्रों में कोई अंतर नहीं खोज पाये. आँख बंद करके सुनने पर पहली बार में कोई भी वाद्य यंत्र की सही पहचान नहीं कर पाया एवं दूसरी बार में केवल चाँदी यंत्र ही पहचाना जा सका. अध्ययन का यह निष्कर्ष है कि "दीवार की सामग्री का यंत्र द्वारा उत्पन्न ध्वनि स्वर या गतिज विस्तापर कोई गौर करने योग्य प्रभाव होने का प्रमाण नहीं मिला". दुर्भाग्यवश, यह अध्ययन शीर्षजोड़ डिजाइन पर नियंत्रण नहीं करता जो कि सामान्यतः स्वर को प्रभावित करने वाला माना जाता है ऊपर देखें. नियंत्रित स्वर परीक्षण यह दर्शाते है कि नली का द्रव्यमान परिवर्तन उत्पन्न करता है एवं अतः नली घनत्व एवं दीवार की मोटाई परिवर्तन पैदा करेगी. हमें ध्वनि की पहचान हेतु इलैक्ट्रॉनिक संवेदकों की तुलना में मानव कानों की सीमाओं का भी ध्यान रखना चाहिये.

                                     

3. बांसुरी की श्रेणियाँ

अपने आधारतम रूप में बांसुरी एक खुली नलिका हो सकती है जिसे बोतल की तरह बजाया जाता है। बांसुरी की कुछ विस्तृत श्रेणियां हैं। ज़्यादातर बांसुरियों को संगीतकार या वादक ओठ के किनारों से बजाता है। हालांकि, कुछ बांसुरियों, जैसे विस्सल, जैमशोर्न, फ्लैजिओलैट, रिकार्डर, टिन विस्सल, टोनेट, फुजारा एवं ओकारिना में एक नली होती है जो वायु को किनारे तक भेजती है "फिपिल" नामक एक व्यवस्था. इन्हें फिपिल फ्लूट कहा जाता है। फिपिल, यंत्र को एक विशिष्ट ध्वनि देता है जो गैर-फिपिल फ्लूटों से अलग होती है एवं यह यंत्र वादन को आसान बनाता है, लेकिन इस पर संगीतकार या वादक का नियंत्रण कुछ कम होता है।

बगल से अथवा आड़ी बजायी जाने वाली बांसुरियों जैसे कि पश्चिमी संगीत कवल, डान्सो, शाकुहाची, अनासाज़ी फ्लूट एवं क्वीना के मध्य एक और विभाजन है। बगल से बजाई जाने वाले बांसुरियों में नलिका के अंतिम सिरे से बजाये जाने की के स्थान पर ध्वनि उत्पन्न करने के लिये नलिका के बगल में छेद होता है। अंतिम सिरे से बजाये जाने वाली बांसुरियों को फिपिल बांसुरी नहीं समझ लेना चाहिये जैसे कि रिकॉर्डर, जो ऊर्ध्ववत बजाये जाते हैं लेकिन इनमें एक आंतरिक नली होती है जोकि ध्वनि छेद के सिरे तक वायु भेजती है।

बांसुरी एक या दोनों सिरों पर खुले हो सकते हैं। ओकारिना, जुन, पैन पाइप्स, पुलिस सीटी एवं बोसुन की सीटी एक सिरे पर बंद क्लोज़ एंडेड होती है। सिरे पर खुली बांसुरी जैसे कि कंसर्ट-बांसुरी एवं रिकॉर्डर ज्यादा सुरीले होते हैं अतएव वादक के लिये बजाने में अधिक लोचशील तथा अधिक चटख ध्वनि वाले होते हैं। एक ऑर्गन पाइप वांछित ध्वनि के आधापर खुला या बंद हो सकता है।

बांसुरियों को कुछ विभिन्न वायु स्त्रोतों से बजाया जा सकता है। परंपरागत बांसुरी मुँह से बजायी जाती हैं, यद्यपि कुछ संस्कृतियों में नाक से बजायी जाने वाली बांसुरी प्रयोग होती है। ऑर्गन के फ्लू पाइपों को, जोकि नलिका बांसुरी से ध्वनिक रूप में समान होते हैं, धौकनी या पंखों के द्वारा बजाया जाता है।



                                     

3.1. बांसुरी की श्रेणियाँ वैस्टर्न कंसर्ट बांसुरी

वैस्टर्न कंसर्ट बांसुरी, 19वीं सदी के जर्मन बांसुरी का वंशज है। यह एक आढ़ी या अनुप्रस्थ बांसुरी है जोकि शीर्ष पर बंद होती है। इसके शीर्ष के नजदीएक दरारनुमा छेद होता है जिससे वादक बजाता है। बांसुरी में गोलाकार ध्वनि छिद्र होते हैं जोकि इसके बारोक पूर्वजों के अंगुली छिद्र से बड़े होते हैं। ध्वनि छिद्र का आकार एवं स्थिति, प्रमुख कार्यप्रणाली, एवं बांसुरी के विस्तार में नोट्स को उत्पन्न करने के लिये अंगुली के प्रयोग का विकास 1832 से 1847 के मध्य थिओबाल्ड बोहम ने किया था एवं यंत्र के गतिज विस्तार एवं तान ध्वनि का उतार चढ़ाव में उनके उत्तराधिकारियों ने महान सुधार किया। कुछ परिष्कारों के साथ किंगमा प्रणाली एवं अन्य परंपरागत रूप से स्वीकृत अंगुली प्रणालियों को विरल अपवाद स्वरूप छोड़कर वैस्टर्न कंसर्ट बांसुरी मूलतः बोहम की डिजाइन तक ही सीमित रहे एवं बोहम प्रणाली के नाम से जाने जाते है।

स्टैण्डर्ड कंसर्ट बांसुरी को सप्तक सी स्वर में स्वर बद्ध किया गया है एवं इसका विस्तार मध्य सी या ढ़ेड़ पायदान नीचे, जब बी फुट को यंत्र के साथ जोड़ा गया हो से प्रारंभ होकर तीसरे सप्तक जाता है। इसका तात्पर्य है कि कंसर्ट बांसुरी सर्वाधिक प्रचलित आर्केस्ट्रा यंत्रों में से एक है, इसका अपवाद पिकोलो है जो एक सप्तक ऊपर बजता है। जी आल्टो एवं सी बांस बांसुरी का प्रयोग यदा-कदा ही होता है एवं इन्हें क्रमशः पूर्ण चतुर्थ सप्तक एवं कंसर्ट बांसुरी से एक सप्तक नीचे स्वरबद्ध किया गया है। बांस की तुलना में आल्टो बांसुरी के अंश अधिक लिखे जाते हैं। एक आर्मेनियाई संगीतज्ञ यह मानता है कि सिरिंग में राष्ट्रीय आर्मेनियाई यंत्रों के सभी गुण मौजूद हैं।

                                     

4. एक्सटर्नल लिंक्स

  • Essay on the Jiahu flutes हेइल्ब्रन टाइमलाइन ऑफ़ आर्ट हिस्ट्री से द मेट्रोपोलिटन म्यूज़ियम ऑफ़ आर्ट

द मेट्रोपोलिटन म्यूज़ियम ऑफ़ आर्ट पर दुनिया भर से बांसुरियों का एक संकलन

  • Pair of ivory flutes by Johann Wilhelm Oberlender, mid 18th century, Nuremberg
  • Walking Stick Flute and Oboe, Georg Henrich Scherer, Butzbach, ca. 1750–57
  • Porcelain flute, Saxony, 1760–1790
  • Glass flute, Claude Laurent, Paris, 1813
  • Flute by Garion, Paris, ca. 1720–1740
  • nature.com New flutes document the earliest musical tradition in southwestern Germany
  • मुक्त निर्देशिका परियोजना पर बाँसुरी

साँचा:Western concert flutes

                                     
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शब्दकोश

अनुवाद

Bansuri बाँसुरी Amar Ujala Kavya.

औटककुषल बाँसुरी Autakkushal Baansuri G. Shankar Kurup. By: कुरुप, जी. शंकर Kurup, G. Shankar. Material type: materialTypeLabel BookPublisher: New Delhi Bharatiya Jnanpith, 2006Edition: 6th.Description: 395p. 22 cm.ISBN: 8126303824.Subject s Malayalam literature Malayalam poetryDDC. भगवान कृष्ण की बाँसुरी है बहुत खास, घर या Patrika. सभी खुश हो जाते। एकदिन अचानकसे भगवन् आए और बाँस के पौधे से कहने लगे, तुम्हें अपने आप को मुझपर न्योछावर करना होगा। बाँस के पौधे ने कहा, जी प्रभु। जब श्रीकृष्ण जी ने उसे काटा, उसमें छेद किया उसकी चीख, कराह निकली, लेकिन जब बाँसुरी का रूप. Best बाँसुरी Quotes, Status, Shayari, Poetry YourQuote. 52 Pages Size 7.2 MB मुफ्त डाउनलोड करें बाँसुरी पी.डी.ऍफ़ प्रारूप में Free Download Bansuri in PDF Format.


ऐसा था बाँसुरी के बजैया का बालपन । in Hindi.

शहनाई हो या बाँसुरी दोनों पर गायकी और तन्त्रकारी दोनों अंग बजायी. जाती है। और यही कारण है कि यहाँ के स्वर वाद्य कलाकार दुनियाँ में. सबसे अधिक जाने जाते हैं। बनारस संगीत घराने में स्वर वाद्यों का क्या महत्व हैं? हम बड़े गौरव के साथ कहते. बाँसुरी बनें तो गूँजे प्रभु का स्वर World Gayatri. धुमधाम से हुआ गणेशजी का आगमन मुख्याधिकारी ने बाँसुरी की धुन पर उतारी आरती. कुबेरनाथ राय निषाद बाँसुरी निबंध. बाँसुरी बहुत ही लोकप्रिय एवं उच्चकोटि का वाद्य है। प्रस्तुत पुस्तक में बाँसुरी का प्रारम्भिक परिचय, बाँसुरी की विभिनन मुद्राएँ, बाँसुरी की बनावट, बाँसुरी के प्रकार, बाँसुरी पकड़ने एवं अंगुलियाँ चलाने की विधि, संगीत के बारे में आवश्यक. बाँसुरी हिंदी शब्दमित्र. गीताश्री वैशाली की प्राचीन कहानियाँ लिख रही थीं लेकिइन कहानियों में अंबपाली नहीं आई थी अभी तक। अंबपाली के बिना वैशाली की कोई कहानी हो सकती है क्या भला? ख़ैर, उनकी इस नई कहानी में वैशाली है, अंबपाली और स्त्री मन का.


जानिए वास्तु व जीवन में बाँसुरी की महत्वपूर्ण.

भारतीय शास्त्रीय संगीत के बाँसुरी वाद्य को जगप्रसिद्ध बनानेवाले महान पंडित स्व. पन्नालाल घोष जी के १०८ वें जन्मदिन पर विनम्र अभिवादन। उन्हें बांसुरी के मसीहा, नयी बांसुरी के जन्मदाता और भारतीय शास्त्रीय संगीत का युगपुरुष, जिसने. Bansuri Hindi Kavita by Naresh Saxena Posham Pa. मुरली या वंशी. वंशी, वेणुः. बंसरी. बाँसुरी. बनसरी. बंसुरी, मुरली. बांसरी. बंसरी, मोरली, वांसळी. बांसरी, पिर्लु. बाँसुरी​, मुरली, वंशी. बाँशी, बाँसीं, बंशी. बाँही, बंशई, बाँशी. बासी. बंशी, बइंशी. पिल्लनग्रोवि. पुल्लांकुऴल्. मुरळि, ओटक्कुऴल्. गोपियाँ श्रीकृष्ण की बाँसुरी क्यों. अगर आप बाँसुरी नाम का मतलब, अर्थ, राशिफल के साथ बाँसुरी नाम की राशि क्या है जानना चाहते हैं, तो यहाँ Bansuri naam ka meaning, matlab, arth in hindi के साथ Bansuri naam ki rashi kya hai बतागई है।.





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बाँसुरी बजाते हुए अप्सराएँ द्वारा François Boucher किसी कला प्रिंट जैसा।. अंबपाली, बाँसुरी वादक और वीणा वादक जानकीपुल. Map and directions of places including Thikana Shri Govind Devji Mandir, Jaipur, Gangori Bazaar, J.D.A. Market, Brahampuri, Jaipur, Rajasthan, India to help you plan your trip.


कृष्ण और उनकी बाँसुरी मॉम्सप्रेस्सो Momspresso.

बांसुरी काष्ठ वाद्य परिवार का एक संगीत उपकरण है। नरकट वाले काष्ठ वाद्य उपकरणों के विपरीत, बांसुरी एक एरोफोन या बिना नरकट वाला वायु उपकरण है जो एक छिद्र के पार हवा के प्रवाह से ध्वनि उत्पन्न करता है। होर्नबोस्टल सैश्स के उपकरण वर्गीकरण के अनुसार, बांसुरी को तीव्र आघात एरोफोन के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।. बाँसुरी लॉग इन या साइन अप करें. अपने गुरु का, अपने भगवान् का निष्कपट भक्त। मैंने अपनी जिन्दगी का कण कण, क्षण क्षण, अणु अणु अपने प्रभु की भक्ति में गुजारा है। मैंने तो स्वयं को बस केवल एक पोली बाँसुरी भर बना लिया। सच तो यह है कि अपने पूरे जीवन में मैंने कुछ किया ही नहीं।. श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर उनकी बाँसुरी की समृद्ध. इस पृष्ठ में झारखण्ड में उपयुक्त वाद्य यंत्र बाँसुरी की जानकरी दी गयी है ।. Bansuri Chali Aao बाँसुरी चली आओ. वांसुरी वादक sharechat champion please like my video वासुरी धुन सुननी है तो फॉलो जरूर करे वासुरी की झनकार बाँसुरी ​बांसुरी की धुन कृष्णा वासुरी मधुर बासुरी बांसुरी @ Noni kataria @ SANTOSH KUMAR RAJ @ fari @ Mahendra.


बाँसुरी का पर्यायवाची – SandeepBarouli.

बाँसुरी अत्यंत लोकप्रिय सुषिर वाद्य यंत्र माना जाता है, क्योंकि यह प्राकृतिक बांस से बनायी जाती है, इसलिये लोग उसे बांस बांसुरी भी कहते हैं।. भगवान श्री कृष्ण की बाँसुरी में ऐसी क्या Vokal. जगदीश त्रिगुणायत बाँसुरी बज रही नामक पुस्तक के लेखक जगदीश त्रिगुणायत हैं. हाईटेक होगी कृष्ण की बाँसुरी वेबदुनिया. मूल्य Rs. 0 पृष्ठ 52 साइज 599.41 MB लेखक रचियता पं. सोहनलाल द्विवेदी Pt. Sohanlal Dwivedi बाँसुरी पुस्तक पीडीऍफ़ डाउनलोड करें, ऑनलाइन पढ़ें, Reviews पढ़ें Bansuri Free PDF Download, Read Online, Review. गीत सज जाएगा मेरे होंठो पे भी, बाँसुरी धुन सुना. एक हाथ में बाँसुरी और दूसरे हाथ में सुदर्शन चक्र लेकर महा इतिहास रचने वाले भगवान. भगवान श्रीकृष्ण अपनी सरस एवं मोहक लीलाओं तथा परम पावन उपदेशों से अन्तः एवं बाह्य दृष्टि द्वारा जो अमूल्य शिक्षण उन्होंने दिया था वह किसी. बाँसुरी का अर्थ सूफ़ीनामा Sufinama. एक हाथ में बाँसुरी और दूसरे हाथ में सुदर्शन चक्र लेकर महा इतिहास रचने वाले भगवान. भगवान श्रीकृष्ण अपनी सरस एवं मोहक लीलाओं तथा परम पावन उपदेशों से अन्तः एवं बाह्य दृष्टि द्वारा जो अमूल्य शिक्षण उन्होंने दिया था वह किसी Следующая Войти Настройки Конфиденциальность Условия. बाँसुरी के समान पतला और सीधा HinKhoj Dictionary. Goonge Sur Bansuri ke,authored by Pannalal Patel.


विकास की बाँसुरी, फ़ासिस्ज़्म के तम्बू! खबर की.

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शुमार रहे घनश्याम तिवाड़ी की पार्टी भारत वाहिनी पार्टी को बाँसुरी चिह्न दिया गया है। खींसवर से विधायक हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी को बोतल चिह्न मिला है।. बाँसुरी संगीत उपकरण. Meaning of बाँसुरी in English बाँसुरी का अर्थ बाँसुरी ka Angrezi Matlab Pronunciation of बाँसुरी बाँसुरी play. Meaning of बाँसुरी in English. Noun. Flute Bansuri, baansuree. आज का मुहूर्त. muhurat. शुभ समय में शुरु किया गया कार्य अवश्य ही निर्विघ्न रूप से.


बाँसुरी की टेर Garbhanal.

सूफ़ीनामा उर्दू शब्दकोश में शब्द बाँसुरी का अर्थ देखें. जानिये क्यों भगवान श्रीकृष्ण को प्रिय हैं बाँसुरी. लेकिन ज़मीनी सच्चाइयों को देखते हुए यही लगता है कि चैन की बाँसुरी बजाना उनके लिए आसान नहीं होगा. यह सच है कि बिहार से अलग होकर राज्य बनने के बाद यह अब तक औद्योगिक निवेश के वादों का सबसे बड़ा दौर है लेकिन औद्योगिक घरानों. बाँसुरी अंग्रेजी हिंदी शब्दकोश रफ़्तार. बाँसुरी को शान्ति, शुभता एवं स्थिरता का प्रतीक माना जाता है. यह उन्नति, प्रगति एवं सकारात्मक गुणों की वृद्धि की सूचक भी होती है. फेंगशुई और हमारे शास्त्रों में शुभ वस्तुओं में बाँसुरी का अत्यधिक महत्व है. फेंगशुई के उपायों का महत्व.


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श्री राधे ओ नन्ही सी बांसुरी,मोय याकौ भेद बताय। ये अधरा मेरी साधना, तू क्यों चिपकी जाय।। - - - - - - - - - - - - - - - बाँसुरी कटी,घिसी,पोली भई, सहे छेद पर छेद। स्वर गूँजत आराध्य के,ना अन्तर में भेद ।। मोपै भई न साधना,ना कीन्ही फरियाद। साधन बन गयी. ये बांसुरी तेरी बांसुरी बनी है सौतन मेरी चाहत की. बाँसुरी एक लोकप्रिय वाद्य. बाँसुरी अत्यंत लोकप्रिय सुषिर वाद्य यंत्र माना जाता है, क्योंकि यह प्राकृतिक बांस से बनायी जाती है, इसलिये लोग उसे बांस बांसुरी भी कहते हैं। बाँसुरी बनाने की प्रक्रिया काफ़ी कठिन नहीं है, सब से पहले. गूँगे सुर बाँसुरी के पन्नालाल पटेल. एक हाथ में बाँसुरी और दूसरे हाथ में सुदर्शन चक्र लेकर महा इतिहास रचने वाले भगवान. भगवान श्रीकृष्ण अपनी सरस एवं मोहक लीलाओं तथा परम पावन उपदेशों से अन्तः एवं बाह्य दृष्टि द्वारा जो अमूल्य शिक्षण उन्होंने दिया था वह किसी Следующая Войти Настройки.





बाँसुरी नाम का अर्थ, मतलब, राशि, राशिफल myUpchar.

कर रही नित प्रीति का आह्वान बाँसुरी प्रेम का बनी शर संधान बाँसुरी आतुर हुए अधर,स्पर्श को व्याकुल आह्लाद मन विह्वल है तान बाँसुरी। युगों युगों का मधुर आलाप बाँसुरी हर लेती है. Read more hindi poetry, hindi shayari, hindi kavita on amar ujala kavya. Dictionary भारतवाणी Part 282. रोहित वेमुला की आत्महत्या एक निराश युवा की निजी त्रासदी नहीं है. उसकी आत्महत्या देश की त्रासदी है, जिस पर देश को चिन्तित होना चाहिए, देश को सोचना चाहिए कि हम जैसा देश गढ़ रहे हैं, उसमें ऐसी त्रासदियाँ क्यों होती हैं,. धुमधाम से हुआ गणेशजी का आगमन मुख्याधिकारी ने. Information provided about बाँसुरी के समान पतला और सीधा Banasuri ke saman patala aur sidha. बाँसुरी के समान पतला और सीधा Banasuri ke saman patala aur sidha meaning in English इंग्लिश मे मीनिंग is REEDLIKE बाँसुरी के समान पतला और सीधा ka matlab english me. बाँसुरी Bansuri OurHindi. मन की बाँसुरी अब रीतने लगी है। गाहे बगाहे कोई आ जाता फूँक देता जीर्ण जर्जर ध्वनि बज उठती। फिर कोई मर्सिया गुनगुनाने लगता। मैं और मैं डूबने लगता।. जानें शब्दार्थ. किसी भी शब्द का अर्थ और पर्यायवाची जानने के लिए डबल क्लिक.


बाँसुरी Vikaspedia.

एक बाँसुरी भारतीय उपमहाद्वीप से निकलने वाली एक साइड ब्लो फ्लूट है। यह बांस से निर्मित एक एरोफोन है, जिसका उपयोग हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में किया जाता है। इसे हिंदू धर्म के ऋग्वेद और अन्य वैदिक ग्रंथों में नाड़ी और तुनवा कहा जाता है। इसके महत्व. Map of ।। हरि बोल।। बाँसुरी बना लो कान्हा, होठों से. बाँसुरी. संज्ञा. परिभाषा बाँस आदि का बना हुआ, मुँह से फूँककर बजाया जाने वाला एक बाजा वाक्य में प्रयोग श्याम ने बंसी बजाई। समानार्थी शब्द बंसी, बेनु, वेणु, मुरली लिंग स्त्रीलिंग संज्ञा के प्रकार जातिवाचक गणनीयता गणनीय.


सुषमा स्वराज की आखिरी इच्छा पूरी, बेटी बाँसुरी.

Find an answer to your question 45MithlMSHETFriHitriRITINikiएक मुहावरे के अनुसार, इनमें से किसके बिना बाँसुरी नहीं बज सकती​. श्री राधे बाँसुरी संवाद Amar Ujala. बाँसुरी की टेर. 02 Jun 2017 AM 2761. श्री अरविन्द कहते थे कि मानव जाति के इतिहास में वह समय भी आता है जब युध्द को मित्र की तरह गले लगाना पड़ता है। गहरे आशय से भरी उनकी यह बात मुझे हिरण्यकश्यपु के वध की याद दिलाती है और कहने का मन होता है. कान्हा की बांसुरी में आज भी कायम है जलवा. भारत प्राचीनतम मौलिक संस्कृति वाला देश है । इसकी अपनी अद्धभुत संगीत परंम्पराएँ है । संगीत कला के माध्यम से ही मनुष्य अपनी प्रतिभा को पूर्णतः साकाकर पाता है तथा अपने दीर्घ सृजन जीवन को और दीर्घ बनाता है। वर्तमान में बाँसुरी की मधुर. एक हाथ में बाँसुरी और दूसरे हाथ में सुदर्शन चक्र. यारो सुनो! ये दधि के लुटैया का बालपन । और मधुपुरी नगर के बसैया का बालपन ।। मोहन सरूप निरत करैया का बालपन । बन के ग्‍वाल गौएँ चरैया का बालपन ।। ऐसा था बाँसुरी के बजैया का बालपन । क्या क्या कहूँ मैं किशन कन्हैया का बालपन ।. Page 1 षष्ठ: अध्याय बनारस संगीत के स्वर वाद्य. Ghar mein bansuri flute kyon rakhni chahiye? कहते हैं श्री कृष्ण सोलह कलाओं से परिपूर्ण हैं। श्रीकृष्ण की सबसे प्रिय वस्तुओं में से एक है – बाँसुरी! श्रीकृष्ण जब बाँसुरी बजाते थे तो पूरा गोकुल मुग्ध होकर उनकी बाँसुरी सुना करता था।.


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