Топ-100 ⓘ रीतियाँ .. सूचना | यह क्या है?
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ⓘ रीतियाँ ..



                                               

रितु वर्मा

                                               

जिप्सी शलभ

जिप्सी शलभ लेपिडॉप्टेरीय कीट है, जो लाइमैनट्राइडी कुल के अंतर्गत आता है। इस कुल के अंतर्गत कुछ बड़े भयंकर कीट भी पाए जाते हैं। ये शलभ मध्यम आकार के होते हैं। इनकी टाँगें घने बालों से ढँकी रहती हैं। इस कुल के शलभ प्राय: रात्रि में उड़नेवाले होते हैं, परंतु कुछ दिन में भी उड़ते हैं। जिप्सी शलभ के वयस्क नर का रंग भूरा होता है, जिसमें कुछ पीले निशान होते हैं जो डेढ़ इंच तक फैले होते है। दिन में यह स्वच्छंदता से उड़ता है। मादा शलभ के पंख, जिनपर काले निशान होते हैं, लगभग सफेद होते हैं। इसका शरीर भारी और पुष्ट होता है तथा पांडु रंग के बालों से ढँका रहता है। पंख लगभग दो इंच तक फैले होते हैं, परंतु ...

                                               

आचार्य वामन

आचार्य वामन प्रसिद्ध अलंकारशास्त्री थे। उनके द्वारा प्रतिपादित काव्यलक्षण को रीति-सिद्धान्त कहते हैं। वामन द्वारा रचित काव्यालङ्कारसूत्र, काव्यशास्त्र का दर्शन निर्माण का प्रथम प्रयास है। यह ग्रन्थ सूत्र रूप में है। वे रीति को काव्य की आत्मा कहते हैं।

                                               

मेधातिथि

मेधातिथि मनुस्मृति के प्राचीनतम भाष्यकार हैं। उन्होने मनुस्मृति पर मनुभाष्य नामक एक विशद टीका लिखी है। अपने ग्रंथ में ये कुमारिल का उल्लेख करते हैं अत: इनका जीवनकाल सातवीं शताब्दी क बाद का होना चाहिए। मनुस्मृति पर लिखी मिताक्षरा १०७६ से ११२१ में इनका उल्लेख है। अत: डॉ० गंगानाथ झा के अनुसार इनका काल नवीं शताब्दी ठहरता है। डॉ० बुहलर इनको कश्मीर का तथा जॉली दक्षिण का मानते हैं। केवल इतना ही इनके ग्रंथ के आधापर स्वीकार किया जा सकता है कि ये कश्मीर की बोली तथा कश्मीऔर पंजाब के रीति रिवाजों से पूर्णत: परिचित थे। इनका एक अन्य ग्रंथ स्मृति विवेक भी था।

                                               

रीतिमुक्त कवि

रीतिमुक्त कवि वे हैं जिन्होंने न तो लक्षण ग्रंथों की रचना की न ही लक्षण ग्रंथों की रीति से बँधकर अपनी रचनाएँ कीं। इस प्राकर रीतिकालीन कविता के दौर में भी ये लोग परंपरागत शैली से हट कर स्वच्छंद रूप से रचना करते रहे। रीतिकाल में एक ओर तो रीति का अनुपालन करने वाले कवि थे जो लक्षणों के अनुसार नख-शिख वर्णन में लगे हुए थे वहीं इसके विपरीत रीतिमुक्त कवियों ने संस्कृत साहित्य से सुन्दरी के लक्षण न लेकर प्रेम और श्रृंगार की की अभिव्यक्ति के लौकिक रूप को महत्व दिया जो भारतीय पद्धति में एक नई चीज के रूप में देखा जा सकता है।

                                               

नील

नील के अधिक विकल्पों के लिए यहां जाएं - नील नील Indigo एक रंजक है। यह सूती कपड़ो में पीलेपन से निज़ात पाने के लिए प्रयुक्त एक उपादान है। यह चूर्ण पाउडर तथा तरल दोनो रूपों में प्रयुक्त होता है। यह पादपों से तैयार किया जाता है किन्तु इसे कृत्रिम रूप से भी तैयार किया जाता है। भारत में नील की खेती बहुत प्राचीन काल से होती आई है। इसके अलावा नील रंजक का भी सबसे पहले से भारत में ही निर्माण एवं उपयोग किया गया।

                                               

सूचना नीति

प्राचीन भारतीय व्यवस्था में सूचनाओं के आदान-प्रदान की विशिष्ट रीतियों और उसके विशिष्ट प्रयोजन का उल्लेख विभिन्न भारतीय धर्म ग्रंथों में मिलता है । ऋग्वेद से लेकर पंचम वेद महाभारत में सूचनाओं के आदान-प्रदान के तरीके उसकी विभिन्न रीतियां उसकी विशिष्ठता के साथ साथ सूचनाओं की परि - सीमाएं और उसके प्रदान किए जाने के ढंग का विस्तृत विवरण देखा जा सकता है। डॉ मनीष कुमार चौबे द्वारा लिखित पुस्तक प्राचीन वांग्मय में सूचना अधिकार में इसकी विस्तार से चर्चा की गई है। यह पुस्तक राधा पब्लिकेशन नई दिल्ली के द्वारा वर्ष 2012 में प्रकाशित है।

                                               

पद गीत

पद-गायन राजस्थान में प्रचलित विधा हैं। जिसमे कलाकार ढोलक और मजिरो की सहयता से अपनी रचनाओ को संगीतमय बनाते हैं। इसमें एक मुख्य गायक होता हैं जो मेड़िया कहलाता हैं। अन्य साथी उसके द्वारा उठाये गए बोलो को ले प्रदान करते हैं। पद-गायन के मुख्य विषय सामाजिक व्यवस्थाओ से संबंधित होते हैं। जिनके माध्यम से रीति-रिवाजो, अंधविश्वासों पर भी कटाक्ष किये जाते हैं।

                                               

तालमुद

तालमुद यहूदियों की परम्पराओं का संग्रह है। इसका रचनाकाल 5वीं शताब्दी ई.पू. से 3वीं सदी ई. तक का माना जाता है। तालमुद दो तरह के शास्त्रों का सम्मिलित रूप है। इसका प्रथम भाग के शास्त्र मिश्नाह कहलाते है। मिश्नाह में यहूदी रीति रिवाजों का वर्णन किया गया है। तथा इसके दूसरे भाग के शास्त्र को गेमारा कहते हैं। गेमारा में यहूदी रब्बियों द्वारा सभी परम्पराओं पर लिखी गई टीकाएं शामिल हैं।

                                               

विवाहसूक्त

विवाहसूक्त में विवाह पद्धतियों का वर्णन किया गया है। विवाह को एक पवित्र संस्कार माना गया है जो जीवन भर का अटूट सम्बन्ध होता था और मरने के बाद ही छूटता था।

                                     

ⓘ रीतियाँ

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  • च ल ब ण ड क म म ल ई ज त ह उनम स म ख य र त य न च बत ई गई ह - इ ग श ल र त - इस र त म ब हर स द खन पर प रत य क रद द म य त क वल
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द्रुतशीतक
                                               

द्रुतशीतक

विश्वास वह है, जो वाष्प संपीड़न या शोषण प्रशीतन चक्र के उपयोग के द्वारा किसी भी तरल पदार्थ से गर्मी के अर्क. इस तरह ठंढा यह तरल पदार्थ था जब एक गर्मी दुश्मन यह गुजरता के माध्यम से ले जाया जाता है, जिससे वायु या कोई उपकरण, आदि । लाजिमी है, बना रहे हैं.

                                               

हज़्ब

उर्दू साहित्य की कविता है जिसमें किसी भी व्यक्ति, समाज, रीति-रिवाज, संस्था, आदि, की निंदा की GRI किया जा करने के लिए. वहाँ व्यंग्य के साथ आक्रोश और घृणा का भाव भी होता है. यह कोई नियमित रूप से नहीं है.

शब्दकोश

अनुवाद
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