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ⓘ सम्राट कृष्ण देव राय. सम्राट कृष्णदेव राय भारत के प्रतापी सम्राटों में एक थे जिनके विजयनगर साम्राज्य की ख्याति विदेशों तक फैली हुई थी।माघ शुक्ल चतुर्दशी संवत् 1 ..



                                     

ⓘ सम्राट कृष्ण देव राय

"सम्राट कृष्णदेव राय भारत के प्रतापी सम्राटों में एक थे जिनके विजयनगर साम्राज्य की ख्याति विदेशों तक फैली हुई थी।माघ शुक्ल चतुर्दशी संवत् 1566 विक्रमी को विजयनगर साम्राज्य के सम्राट कृष्णदेव राय का राज्याभिषेक भारत के इतिहास की एक अद्भुत घटना थी। इस घटना को भारत में स्वर्णिम युग का प्रारम्भ माना जाता है, क्योंकि उन्होंने भारत में बर्बर मुगल सुल्तानों की विस्तारवादी योजना को धूल चटाकर आदर्श हिन्दू साम्राज्य की स्थापना की थी, जो आगे चलकर छत्रपति शिवाजी महाराज के हिन्दवी स्वराज्य का प्रेरणा स्रोत बना।

अद्भुत शौर्य और पराक्रम के प्रतीक सम्राट कृष्ण देव राय का मूल्यांकन करते हुए इतिहासकारों ने लिखा है कि इनके अन्दर हिन्दू जीवन आदर्शों के साथ ही सभी भारतीय सम्राटों के सद्गुणों का समन्वय था। इनके राज्य में विक्रमादित्य जैसी न्याय व्यवस्था थी, चन्द्रगुप्त मौर्य और सम्राट अशोक जैसी सुदृढ़ शासन व्यवस्था तथा श्रृंगेरी मठ के शंकराचार्य महान संत विद्यारण्य स्वामी की आकांक्षाओं एवं आचार्य चाणक्य के नीतिगत तत्वों का समावेश था। इसीलिए उनके सम्बन्ध में बाबर ने बाबरनामा में लिखा था कि काफिरों के राज्य विस्ताऔर सेना की ताकत की दृष्टि से विजयनगर साम्राज्य ही सबसे विशाल है।भारत में कृष्णदेव राय और भारत में राणा सांगा ही दो बड़े काफिर राजा हैं।

वैसे तो सन् 1510 ई. में सम्राट कृष्णदेव राय का राज्याभिषेक विजयनगर साम्राज्य के लिए एक नये जीवन का प्रारम्भ था किन्तु इसका उद्भव तो सन् 1336 ई. में ही हुआ था। कहते हैं कि विजय नगर साम्राज्य के प्रथम शासक हरिहर तथा उनके भाई बुक्काराय भगवान श्रीकृष्ण के भक्त थे और उन्हीं की प्रेरणा से अधर्म का विनाश और धर्म की स्थापना करना चाहते थे। हरिहर एक बार शिकार के लिए तुंगभद्रा नदी के तट पर स्थित वन क्षेत्र में गये, उनके साथ के शिकारी कुत्तों ने एक हिरन को दौड़ाया किन्तु हिरन ने डर कर भागने के बजाय शिकारी कुत्तों को ही पलट कर दौड़ा लिया। यह घटना बहुत ही विचित्र थी। घटना के बाद अचानक एक दिन हरिहर राय की भेंट महान संत स्वामी विधारण्य से हुयी और उन्होंने पूरा वृत्तान्त स्वामी जी को सुनाया। इस पर संत ने कहा कि यह भूमि शत्रु द्वारा अविजित और सर्वाधिक शक्तिशाली होगी। सन्त विधारण्य ने उस भूमि को बसाने और स्वयं भी वहीं रहने का निर्णय किया। यही स्थान विकसित होकर विजयनगर कहा गया। वास्तव में भारत के हिन्दु राजाओं की आपसी कटुता, अलाउद्दीन खिलजी के विस्तारवादी अभियानों तथा मोहम्मद तुगलक द्वारा भारत की राजधानी देवगिरि में बनाने के फैसलों ने स्वामी विद्यारण्य के हिन्दू ह्रदय को झकझोर दिया था, इसीलिए वे स्वयं एक शक्तिपीठ स्थापित करना चाहते थे। हरिहर राय के प्रयासों से विजयनगर राज्य बना और जिस प्रकार चन्द्रगुप्त के प्रधानमंत्री आचार्य चाणक्य थे, उसी प्रकार विजयनगर साम्राज्य के महामंत्री संत विद्यारण्य स्वामी और प्रथम शासक बने हरिहर राय। धीरे-धीरे हरिहर राय प्रथम का शासन कृष्णानदी के दक्षिण में भारत की अन्तिम सीमा तक फैल गया। शासक बदलते गये और हरिहर प्रथम के बाद बुक्काराय, हरिहर द्वितीय, देवराय प्रथम, देवराय द्वितीय, मल्लिकार्जुन और विरूपाक्ष के हाथों में शासन की बागडोर आयी, किन्तु दिल्ली सल्तनत से अलग होकर स्थापित बहमनी राज्य के मुगलशासकों से लगातार सीमाविस्तार हेतु संर्घष होता रहा। जिसमें विजयनगर साम्राज्य की सीमाऐं संकुचित हो गयीं।

1485ई. में कर्नाटक व तेलंगाना के सामंत सलुवा नरसिंहा ने बहमनी सुल्तानों को भी पराजित करके विजयनगर साम्राज्य को नरसिंहा साम्राज्य में बदल दिया। इसके बाद ऐसा लगाकि अब विजयनगर साम्राज्य इतिहास में समाहित हो जायेगा परन्तु 1510 ई. में इसका पुन: अभ्युदय प्रारम्भ हुआ और 20 वर्ष की अल्पआयु में कृष्णदेव राय का राज्याभिषेक हुआ।

इस राज्याभिषेक के समय पुर्तगालियों ने गोवा में अपना व्यापार सुरक्षित रखने के लिए बीजापुर के सुल्तान आदिलशाह पर आक्रमण करके गोवा पर विजय प्राप्त कर ली, किन्तु सम्राट कृष्णदेव राय ने अपनी कूटनीतिक चालों से मुगलिया सल्तनत के प्रतिनिधि आदिलशाह और पुर्तगालियों के मध्य युद्व की आग को हवा देने का काम करने का सतत प्रयास किया। वैसे पुर्तगाली गवर्नर सम्राट कृष्णदेव राय को दक्षिण का राजा मानता था। अपने राज्याभिषेक के साथ ही सम्राट कृष्णदेव राय ने अपना विजय अभियान भी प्रारम्भ कर दिया। सन् 1516 तक उड़ीसा के कई किलों पर विजय प्राप्त कर ली और उड़ीसा के राजा की पुत्री से विवाह करके मित्रता भी स्थापित की। इसी के साथ ही सम्राट कृष्णदेव राय ने पूर्वी प्रदेशों पर अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया। गोलकुंडा के सुल्तान कुली का मुकाबला करने के लिए वहां के सभी हिन्दू राजाओं को एकत्र किया क्योंकि सुल्तान कुली ने दक्षिण के छाटे-छोटे राज्यों पर आधिपत्य कर रखा था। इतिहासकार बताते हैं कि यह संघर्ष लगभन ढाई दशक तक चला। सन् 1534 में सुल्तान कुली बुरी तरह से घायल हो गया तथा चेचक के प्रभाव से शरीर भी विकृत हो गया। राज्याभिषेक वर्ष के बाद रायचूर का संघर्ष सम्राट कृष्णदेव राय के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण संघर्ष था। रायचूर एक सुरक्षित नगर था। जिसमें एक सुदृढ़ किला भी था, इसको जीतने की तीव्र ऊच्छा विजयनगर के पूर्व शासक नरसिंहा के मन में थी क्योंकि यह किला आदिलशाह ने नरसिंहा के पूर्व शासकों से छीन लिया था। वस्तुत: सम्राट कृष्ण देव राय की दृष्टि रायचूर के किले के साथ-साथ मुगल साम्राज्य को उखाड़ फेंकने पर भी थी।

सम्राट कृष्णदेव राय घोड़ों के बहुत शौकीन थे। उन्होंने सीड़े मरकर नामक एक मुगल को चालीस हजार सिक्के देकर गोवा के पोंड़ा में मुगलों से घोड़े खरीदने के लिए भेजा, किन्तु उस मुगल ने विश्वासघात किया और पोंड़ा के मुगलों के साथ सिक्के और घोड़े लेकर आदिलशाह के राज्यक्षेत्र में भाग गया। दोनों राज्यों की चालीस साल पुरानी संधि के आधापर दूसरे राज्य के अपराधी को संरक्षण देना संधि का उल्लंघन था, अत: सम्राट कृष्णदेव राय ने आदिलशाह को पत्र लिखकर बताया कि सीडेमरकर को धन सहित तुरंत विजयनगर साम्राज्य को सौंप दिया जाय, अन्यथा परिणाम भयानक होगा। आदिलशाह ने अहंकार के कारण उस मुगल अपराधी को विजय नगर भेजनेके बजाय सम्राट को पत्र लिखा कि काजी की सलाह के अनुसार सीड़े मरकर पैगम्बर के वेश का प्रतिनिधि और कानून का ज्ञाता है, अत: उसे विजयनगर को नहीं सौंपा जा सकता।

इस हठवादिता के विरूद्व सम्राट कृष्णदेव राय ने 7.36.000 सैनिकों की विशाल सेना के साथ रायचूपर धावा बोल दिया। कूटनीतिक तरीके से बरार, बीदर और गोलकुंडा के सुल्तानों को उन्होंने आदिलशाह के पक्ष में न बोलने के लिए भी तैयाकर लिया। इन सुल्तानों को पता था कि यदि हमने आदिलशाह की मदद की तो सम्राट कृष्णदेव के कोप से हमें भी जूझना पड़ेगा। परिणामत: ये सभी आदिलशाह के सहयोग में नहीं खड़े हुए जबकि सभी हिन्दू राजाओं को उन्होंने कृष्णा नदी के तट पर एक जुट करके बीजापुर की आदिलशाही सेना पर आक्रमण कर दिया। भयभीत होकर आदिलशाह युद्व के मैदान से भाग गया तथा सम्राट कृष्णदेवराय की विजय हुयी।

सम्राट कृष्णदेव राय की इस विजय को दक्षिण भारत की महत्वपूर्ण विजय कहा गया, जिसके बहुत दूरगामी परिणाम सामने आये, जो निम्नवत् हैं-

1. आदिलशाह की शक्ति और सम्मान को चकनाचूर करके बीजापुर के उस अहंकार को उन्होंने तोड़ दिया, जिसमें वह दक्षिण भारत का सुल्तान बनने का स्वप्न अपनी आंखों में सजोए हुए था। 2. दक्षिण भारत के अन्य मुगल शासकों के दिल दहल गये और वे अपने जीवित रहने के लिए राह तलाशने लगे। 3. पुर्तगाली इतना भयभीत हो गये कि उन्हें लगा कि उनका व्यापार हिन्दुओं की सहायता के बिना संभव नहीं है। 4. भारतीयों में आत्मगौरव और स्वाभिमान का प्रबल जनज्वार खड़ा हो गया। सम्राट कृष्णदेव राय ने इस सफलता पर विजयनगर में शानदार उत्सव का आयोजन किया, जिसमें मुगल शासकों ने अपने दूत भेजे, जिनको सम्राट कृष्णदेव राय ने कड़ी फटकार लगाई। यहां तक कि आदिलशाह के दूत से उन्होंने कहा कि आदिलशाह स्वयं यहां आकर मेरे चरणों का चुम्बन करे और अपनी भूमि तथा किले हमें समर्पित करे तब हम उसे क्षमा कर सकते हैं।

वीरता के साथ-साथ विजयनगर का साम्राज्य शासन व्यवस्था के आधापर विश्व में अतुलनीय था। सुन्दर नगर रचना और सभी को शांतिपूर्वक जीवन यापन करने की सुविधा यहां की विशिष्टता में चार चांद लगाती थी। जाति और पूजा पद्वति के आधापर किसी प्रकार का भेदभाव नहीं था। यहां पर राजा को धर्म, गौ एवं प्रजा का पालक माना जाता था। सम्राट कृष्णदेव राय की मान्यता थी कि शत्रुओं को शक्ति के आधापर कुचल देना चाहिए और ऐसा ही उन्होंने व्यवहार में भी दिखाया। विजयनगर साम्राज्य के सद्गुणों की स्पष्ट झलक उनके दरबार के प्रसिद्व विद्वान तेनाली राम के अनेक दृष्टान्तों से मिलती है, जो आज भी भारत में बच्चों के अन्दर नीति और सद्गुणों के विकास के लिए सुनाये जाते हैं। सम्राट कृष्णदेवराय के शासन में कौटिल्य के अर्थशास्त्र को आर्थिक विकास का आधार माना गया था, जिसके फलस्वरूप वहां की कृषि ही जनता की आय का मुख्य साधन बन गयी थी। इनकी न्याय प्रियता पूरे भारत में प्रसिद्व थी। लगभग 10 लाख की सैन्य शक्ति, जिसमें 32 हजार घुड़सवार तथा एक छोटा तोप खाना और हाथी भी थे, वहां की सैनिक सुदृढ़ता को प्रकट करता था।

विजयनगर साम्राज्य अपनी आदर्श हिन्दू जीवन शैली के लिए विश्व-विख्यात था। जहां के महाराजा कृष्णदेव राय वैष्णव होने के बावजूद भी जैन, बौद्व, शैव, लिंगायत जैसे भारतीय पंथों ही नहीं ईसाई, यहूदी और मुसलमानों जैसे अभारतीय पंथों को भी पूरी धार्मिक स्वतंत्रता प्रदान करते थे। ऐसे सर्वव्यापी दृष्टिकोण का परिणाम था कि ई. 1336में स्थापित विजयनगर साम्राज्य हिन्दू और मुसलमान या ईसाईयों के पारस्परिक सौहार्द तथा समास और समन्वित हिन्दू जीवन शैली का परिचायक बना जबकि इससे दस वर्ष बाद अर्थात 1347 ई. में स्थापित बहमनी राज्य हिन्दुओं के प्रति कटुता, विद्वेष और बर्बरता का प्रतीक बना।

पन्द्रहवीं शताब्दी में विजय नगर साम्राज्य का वर्णन करते हुए इटली के यात्री निकोलो कोंटी ने लिखा था कि यह राज्य भारत का सबसे शक्तिशाली राज्य है, इसके राजकोष में पिघला हुआ सोना गंढों में भर दिया जाता है तथा देश की सभी अमीर गरीब जातियों के लोग स्वर्ण आभूषण पहनते हैं।

सोलहवीं शताब्दी में पुर्तगाली यात्री पेइज ने यहां की समृद्वि का वर्णन करते हुए लिखा था कि यहां के राजा के पास असंख्य सैनिको की शक्ति, प्रचुर मात्रा में हीरे जवाहरात, अन्न के भंडार तथा व्यापारिक क्षमता के साथ-साथ अतुलनीय कोष भी हैं। एक और पुर्तगाली यात्री न्यूनिज ने भी इसी बात की पुष्टि करते हुए लिखा है कि विजयनगर में विश्व की सर्वाधिक प्रसिद्व हीरे की खानें, यहां की समृद्वि को प्रकट करती हैं।

सैनिक और आर्थिक ताकत के अतिरिक्त सम्राट कृष्णदेव राय उच्चकोटि के विद्वान भी थे। संस्कृत, कन्नड़, तेलगू तथा तमिल भाषाओं को प्रोत्साहन देने के साथ ही उन्होंने अपने साम्राज्य में कला और संस्कृति का पर्याप्त विकास किया। उन्होंने कृष्णा स्वामी, रामा स्वामी तथा विट्ठल स्वामी जैसे भव्य मंदिरों का निर्माण कराया तथा संत स्वामी विद्यारण्य की स्मृति में बने हम्पी मंदिर का विकास भी कराया। संत विद्यारण्य स्वामी साधारण संत नहीं थे। उन्होंने मां भुवनेश्वरी देवी के श्री चरणों में बैठ कर गहरी अनुभूति प्राप्त की थी तथा स्वामी भारतीकृष्ण तीर्थ जी महाराज के शिष्य के रूप में श्रृंगेरी मठ के शंकराचार्य के पद को सुशोभित किया था। विजयनगर साम्राज्य के इस कुशल योजनाकार ने 118 वर्ष की आयु में जब अपना जीवन त्याग दिया तो कर्नाटक की जनता ने पम्पा क्षेत्र हम्पी के विरूपाक्ष मंदिर में इस महान तपस्वी की भव्य प्रतिमा की स्थापना की, जो आज भी भक्तों के लिए पेरणा स्रोत है। विजयनगर साम्राज्य को विश्व में आदर्श हिन्दू राज्य के रूप में मानने के पीछे सम्राट कृष्णदेव राय का प्रेरणादायी व्यक्तित्व अपना महत्वपूर्ण स्थान रखता है। लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं

                                     
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शब्दकोश

अनुवाद

तेनालीराम के किस्से: करे कोई भरे कोई Who Tales of.

अद्भुत शौर्य और पराक्रम के प्रतीक सम्राट कृष्ण देव राय का मूल्यांकन करते हुए इतिहासकारों ने लिखा है कि इनके अन्दर हिन्दू जीवन आदर्शों के साथ ही सभी भारतीय सम्राटों के सद्गुणों का समन्वय था। इनके राज्य में विक्रमादित्य जैसी न्याय. महान सम्राट कृष्णदेव राय का संपूर्ण वेबदुनिया. दक्षिण भारत में मुस्लिम वर्चस्व को निशाना बनाकर विजयनगर एक ऐसे शक्तिशाली साम्राज्य के रूप में उभर कर सामने आया जिसमें कई महान शासकों ने शासन किया था। 15 वीं शताब्दी के आसपास साम्राज्य में आयी गिरावट को कृष्णदेव राय. महान सम्राट कृष्ण देवराय के बारे में 19 रोचक. सम्राट कृष्णदेव राय भारत के प्रतापी सम्राटों में एक थे जिनके विजयनगर साम्राज्य की ख्याति विदेशों तक फैली हुई थी​।. श्री कृष्ण देव राय की जीवनी Sri Krishna Maps of India. सम्राट कृष्णदेव राय Samrat Krishnadev Rai. By: कामत, सूर्यनाथ Kamath, Suryanath. Material type: materialTypeLabel BookPlace: नई दिल्ली New DelhiPublisher: प्रभात प्रकाशन Prabhat PrakashanYear: 2008​Description: 151 p.ISBN: 8173153914.Subject s Hindi - Fiction.


General Knowledge About Krishn Dev Rai कृष्णदेव राय से.

हरिहर 2 विजयनगर के राजा कृष्णदेव राय ने गोलकुंडा का युद्ध किस राजा के साथ लड़ा था? कुली कृषणदेव राय अब्दुल रज्जाक विजयनगर आया था। वीर विजय के सिंचाई पर विजयनगर के किस शासक ने चीन के सम्राट के पास अपना राजदूत भेजा?. 8 अगस्त: राज्याभिषेक दिवस महान हिन्दू सम्राट. Univarta: नयी दिल्ली 08 अगस्त वार्ता भारतीय एवं विश्व इतिहास में 08 अगस्त की प्रमुख घटनाएं इस प्रकार हैं: 1509 विजय नगर साम्राज्य के सम्राट के रूप में महाराज कृष्णदेव राय की ताजपोशी हुई।.


कृष्ण देवराय एकात्मता स्तोत्र Google Sites.

22वीं कड़ी राजा राममोहन राय पर, जिन्होंने ख़त्म की सती प्रथा. 13 दिसंबर 2015 14 वीं कड़ी दक्षिण भारत में विजय नगर साम्राज्य के महान राजा कृष्णदेव राय के बारे में. 12 अक्तूबर पांचवी कड़ी में महान सम्राट अशोक की विरासत पर नज़र. 10 अगस्त. कृष्णदेव राय ने अमुक्त माल्यद नामक प्रसिद्ध. उनके पिता सम्राट बिम्बिसार थे अजातशत्रु ने अपने पिता को बंदी बना कर सत्ता हासिल कर ली. दक्षिण के महान राजा कृष्णदेवराय विजयनगर के शासक थे उन्होने दक्षिण भारत में मुग़ल शासन की बढ़त को रोक दिया और बहुत से मंदिर बनवाये. भारतीय एवं विश्व इतिहास में 08 अगस्त की प्रमुख. 1509 विजय नगर सम्राज्य के सम्राट के रूप में महाराज कृष्णदेव राय की ताजपोशी हुई। 1609 वेनिस की सीनेट ने गैलिलियो द्यारा तैयार दूरबीन का निरीक्षण किया। 1700 डेनमार्क और स्वीडन ने शांति संधि पर हस्ताक्षर किये। 1771 इंग्लैंड. पुरंदर दास Spirtual Awareness. कृष्णदेवराय Кришнадеварайя Тулува.





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A. हरिहर राय, B. कृष्णदेव. C. बुक्का राय, D. देवराय प्रथम 28 कृष्णदेव राय ने उड़ीसा के गजपति शासक को कब पराजित किया? d 32 निम्नलिखित में से किस किस विदेशी यात्री ने कृष्णदेव राय के शासनकाल में विजयनगर साम्राज्य की यात्रा की थी? d. विजयनगर साम्राज्य – Buy Books Online – Vidhyapeeth Times. ह्वेनसांग के अनुसार – सम्राट शीलादित्य हर्ष अपने राज्य की 3 4 आय धार्मिक कार्यों पर व्यय करता था, सती प्रथा का चलन पुर्तगाली यात्री Portuguese traveller डुआर्ट बारबोसा Duarte Barbosa कृष्णदेव राय के समय में विजयनगर की यात्रा पर. अभिभाषण President of India. बारात घर में श्री नायक सेवा समिति ने रविवार को सम्राट कृष्णदेव राय की 549वीं जयंती मनाई। समिति पदाधिकारियों, सदस्यों ने समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने, सामाजिक जागरूकता अभियान चलाने व नशे से दूर रहने, सीएए का.


तुलुव राजवंश GK in Hindi सामान्य ज्ञान एवं करेंट.

Home Samanya Gyan Great Emperor Krishnadevaraya Story, Biography, History in Hindi सम्राट कृष्णदेव राय का जीवन परिचय, जीवनी इस महान सम्राट का साम्राज्य अरब सागर से लेकर बंगाल की खाड़ी तक भारत के बड़े भूभाग में फैला हुआ था, जिसमे आज के. विजयनगर साम्राज्य के सम्राट या शासक Jagran Josh. अपने बसागए नगर नागलपुरा को पेयजल और सिंचाई का पानी उपलब्ध कराने के लिए कृष्णदेव राय ने पुर्तगाली इंजीनियर की मदद से सन 1424 में बुक्का राय प्रथम 1354 से 1377 द्वारा हरिद्रा नदी पर बनवाया गया बांध जब टूट गया तब सम्राट देव राय.


सम्राट कृष्णदेव राय का जीवन परिचय, जीवनी GkSection.

एक बार सम्राट कृष्णदेव राय अमरकंटक की यात्रा पर गये. साथ में प्रमुख दरबारी और अंगरक्षक भी थे. नर्मदा नदी के किनारे उन्हें एक सिद्ध संत के दर्शन हुए. संत पृथ्वी से एक फुट ऊँचे शून्य में स्थित थे. आँखे बंद थी. मुंह में निरंतर ॐ के. जमालपुरम मंदिर Khammam जमालपुरम मंदिर Photos. Hi विजयनगर साम्राज्य कृष्णदेवराय विजयनगर साम्राज्य के सर्वाधिक कीर्तिवान राजा थे। वे स्वयं कवि और कवियों के संरक्षक थे। तेलुगु भाषा में उनका काव्य अमुक्तमाल्यद साहित्य का एक रत्न है। इनकी भारत के प्राचीन इतिहास पर आधारित पुस्तक वंशचरितावली तेलुगू. जल संकट का समाधान: विजयनगर के जल कौशल के अंग्रेज. शासक कब बना 1509 ई. में ○ कृष्णदेव राय के किन यूरोपवासियों के साथ मैत्रिपूर्ण संबंध थे पुर्तगालियों के साथ. किस विजयनगर सम्राट ने उम्मात्तूर के विद्रोही सामंत गंगराय का दमन किया कृष्ण देवराय ○ गोलकुंडा का युद्ध. विजयनगर साम्राज्य के महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर. इस साइट में सम्राट अशोक का एक चित्रण है और यह सम्राट अशोक का पहला संपादन था जिसमें पहले अशोका नाम के बजाय वर्ष 1520 में कृष्णदेवराय ने सईद माराकर को अपनी सेवा में एक मुस्लिम, गोवा में घोड़ों को खरीदने के लिए बड़ी रकम के. सम्राट कृष्ण देव राय की जन्मतिथि ने खड़ा किया. कृष्णदेव राय ने अमुक्त माल्यद नामक प्रसिद्ध ग्रन्थ की रचना किस भाषा में किया था कल्याणम की रचना की थी कृष्णदेव राय के दरबार में तेलगु साहित्य के आठ कवी रहते थे, जिसे अष्ठ दिग्गज कहा जाता था कृष्णदेव राय के शासन काल को संगीत सम्राट तानसेन अकबर के दरबार में आने से पूर्व किसके दरबार में थे.


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में सम्राट कृष्णदेव राय का राज्याभिषेक विजयनगर साम्राज्य के लिए एक नये जीवन का प्रारम्भ था किन्तु इसका उद्भव तो सन् 1336 ई. में ही हुआ था। कहते हैं कि विजय नगर साम्राज्य के प्रथम शासक हरिहर तथा उनके भाई बुक्काराय भगवान श्रीकृष्ण के भक्त​. विजयनगर साम्राज्य Question RajasthanGyan. राजा कृष्ण देवराय के पूर्वजों ने एक महान साम्राज्य की नींव रखी जिसे विजयनगर साम्राज्य लगभग 1350 ई. से 1565 ई. कहा गया। देवराय ने इसे विस्तार दिया और मृत्यु पर्यंत तक अक्षुण बनाए रखा। विजयनगर साम्राज्य की स्थापना इतिहास की एक कालजयी. कटोरे का जल Telaniram Ki Kahani. प्रश्न 5 विजयनगर के राजा कृष्णदेव राय ने गोलकुंडा का युद्ध किस राजा के साथ लड़ा था अ कुली कुतुब शाह ब कुतुबुद्दीन ऐबक स इस्माइल आदिल शाह द प्रतापरुद्र गजपति उत्तर. SHOW ANSWER. प्रश्न 6 किस विजयनगर सम्राट ने उम्मात्तूर के विद्रोही.


कृष्णदेव राय के बारे में आप क्या जानते हैं?.

तुलुव राजवंश तीसरा राजवंश था जिसने विजयनगर साम्राज्य पर शासन किया। इसमें विजयनगर साम्राज्य के सबसे शक्तिशाली राजा कृष्णदेव राय भी हुए। उनके शासनकाल में 1491 से 1570 तक पांच सम्राट शामिल थे। उन्होंने विजयनगर के साथ लगभग. MoES Library catalog. दो हाथ धुआँ सम्राट कृष्णदेव राय का दरबार लगा हुआ था.अचानक चतुराई की चर्चा चल निकली.मंत्री ने कहा महाराज आपके दरबार में चतुरों की कमी नहीं.यदि अवसर दिए जाय,तो यह बात सिद्ध हो सकती है. सम्राट गंभीर हो गए.दरबार के कोने में. Page 1 D - - चतुर्थ अध्याय डॉ. बालशौरि रेड्डी के. धरती का पुत्र उपन्यास में सम्राट कृष्णदेवराय के शासनकाल में उनकी. राजधानी की शोभा अद्भुत थी, जिसे देख स्वयं पांड्य राजा की पुत्री गौरी अभिभूत. हुई। विजयनगर की सम्पन्नता का परिचय देते हुए पांड्य राजा कहते हैं बेटी! विश्व के. चार पाँच.


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एक बार कृष्णदेव राय कश्मीर की यात्रा पर गये। वहां उन्होंने सुनहरे रंग के फूल वाला एक पौधा देखा वह पौधा सम्राट को इतना पसंद आया कि लौटने पर एक पौधा अपन. विदेशी यात्री Foreign Travellers in Indian History Sansar. सम्राट कृष्णदेव राय भारत के प्रतापी सम्राटों में एक थे जिनके विजयनगर साम्राज्य की ख्याति विदेशों तक फैली हुई थी।माघ शुक्ल चतुर्दशी संवत् 1566 विक्रमी को विजयनगर साम्राज्य के सम्राट कृष्णदेव राय का राज्याभिषेक भारत के इतिहास की एक अद्भुत घटना थी।. विजयनगर के किस शासक ने चीन के सम्राट के पास अपना. उत्तर. देवराय द्वितीय किस विजयनगर सम्राट ने उम्मात्तूर के विद्रोही सामंत गंगराय का दमन किया उत्तर. कृष्ण देवराय गोलकुंडा का युद्ध किस किस के बीच लड़ा गया उत्तर. कृष्ण देवराय एवं कुलीकुतुबशाह के बीच विजयनगर साम्राज्य की. Page 1 चन्द्रशेखर आजाद यदि वीरों की पूजा हम नहीं. तालिकोट का युद्ध राजा कृष्ण देवराय की मृत्यु के बाद उनके बेटे अच्युत राय 1530 में गद्दी पर बैठे। उसके बाद 1542 में सदाशिव राय राजा बने, लेकिन वे केवल औपचारिक राजा थे। वास्तविक सत्ता आलिया राम के हाथ में थी। आलिया राय एक बहादुर सेनापति.





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हम्पी का इतिहास सम्राट अशोक के समय से मिलता है। मध्यकाल तक यह कई राजवंशों की राजधानी रही, लेकिन हम्पी की वास्तविक प्रसिद्धि और समृद्धि मध्य काल में विजयनगर साम्राज्य से जुड़ी है। इसने तुलुववंशीय राजा कृष्णदेव राय के. What Happened With Saraswati Devi As She Dont Have The Value. कृष्णदेव राय विजयनगर साम्राज्य के महानता सब के पतन के वंश का नाम था तुलु वंश राजा कृष्णदेव राज के पूर्वजों ने एक महान साम्राज्य की नींव रखी थी जिसे की. भारत के महान शासक का नाम ले तो उसमें सम्राट अशोक का नाम ₹100 है. Blogs महान सम्राट कृष्णदेव राय Lookchup. सम्राट कृष्णदेव राय की जीवनी Life History of Krishnadevaraya in Hindi कृष्णदेव राय का जन्म का जन्म 16 फरवरी 1471 में हम्पी कर्नाटक​ में हुआ. Saksham Kurukshetra. यदुवंनशी आयर सम्राट कृष्ण देव राय दक्षिण भारत के एक मात्र हिन्दू साम्राज्य के महाराज ।। उपाधि आंध्रभोज एक विश्वविख्यात आयर साम्राज्य था विशेष लोग. Convert JPG to PDF online convert jpg to - CBSE. महान सम्राट कृष्णदेव राय उपद्रवियों की पौ बारह पुलिस प्रशासन द्वारा प्रताड़ितों पर ही जुल्म!. जप अनुष्ठान का संकल्प. विहिप प्रन्यासी मण्डल बैठक 27, 28, 29 दिसम्बर, 2017 भुवनेश्वर. विस्थापन दिवस विषयक विचार गोष्ठी. कासगंज.


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भारत के सर्वाधिक शक्तिशाली शासक कृष्ण देवराय 1509 ई 1529 ई राजा कृष्ण देवराय के पूर्वजों ने एक महान साम्राज्य hindi.​ 02 महान हिन्दू सम्राट कृष्णदेव राय जिन्होंने कई घुसपैठी मुगल सुल्तानों को अकेले चटाई थी धूल!! महाराजा. कृष्ण देव राय किस महान साम्राज्य के शासक थे? Vokal. Report. 2. विजयनगर के किस शासक ने चीन के सम्राट के पास अपना राजदूत भेजा. 1. हरिहर प्रथम. 2. बुक्का प्रथम. 3. कृष्णदेवराय. 4. 8. निम्नांकित में से किसके राज्यारोहण को अब 500 वर्ष गुजर गए हैं. 1. कुलोत्तुंग प्रथम. 2. कृष्णदेव राय. 3. राजराय प्रथम. 4. यदुवंनशी आयर सम्राट कृष्ण देव राय YADAV वैदिक. यह एक पारंपरिक अनुष्ठान कुछ लोगों के अनुसार एक त्योहार है जिसकी शुरुआत सम्राट श्रीकृष्ण देवरयालु या कृष्ण देवराय के शासन काल में हुई थी। ग्रामीण इलाकों में सूखे की स्थिति का सामना करने के लिये यह तब मनाया जाता है जब. तेनाली रामा के तमिल संस्करण का प्रसारण 16 जनवरी. उत्तम कुमार, गम्हरिया झारखंड के सरकारी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों का सामान्य ज्ञान बढ़ाने के उद्देश्य से झारखंड शिक्षा परियोजन ….


सम्राट कृष्ण देव राय. सम्राट कृष्णदेव राय भारत के.

लक्ष्मीजी के दर्शन. राजा कृष्णदेव राय दीवाली पर धूमधाम से लक्ष्मी पूजन कराते थे। राजा कृष्णदेव राय ने मंत्री से कहा, राज्य के गरीबों में एक कंबल बांट दो। मंत्री ने एक बार सम्राट कृष्णदेव राय तेनालीराम से नाराज हो गए। उन्होंने उससे. दो हाथ धुआँ हिन्दीकुंज,Hindi Website Literary Web Patrika. विजयनगर साम्राज्य का सबसे प्रभावशाली शासक कौन था उत्तर. कृष्णादेव राय 3. कृष्णदेव राय शासक कब बना उत्तर. 1509 ई. देवराय द्वितीय 22. किस विजयनगर सम्राट ने उम्मात्तूर के विद्रोही सामंत गंगराय का दमन किया उत्तर. कृष्ण देवराय 23. जब राजा कृष्णदेव राय ने बीजापुर के सुल्तान. विजय नगर के सम्राट कृष्णदेव राय न केवल सांस्कृतिक और धार्मिक बल्कि सामाजिक क्षेत्र के भी उस दौर के सबसे महानतम राजाओं में प्रसिद्ध थे। इस राज्य का, भक्ति काल को बुलंदियों पर पहुँचाने का विशेष योगदान है। इसी राज्य की बहुमूल्य भेंट है.


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