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छुट्टी

छुट्टी परम्परा या क़ानून द्वारा निर्धारित ऐसा दिन होता है जब साधारण दैनिक कार्य स्थगित या कम कर दिये जाते हैं। आमतौर से छुट्टियाँ व्यक्तियों को किसी राष्ट्रीय, धार्मिक, सांस्कृतिक या सामाजिक परम्परा या घटना मनाने के लिये दी जाती हैं। छुट्टियाँ में काम कितना घटाया जाता है, यह स्थानीय नियम, परम्परा, कार्य-प्रकाऔर व्यक्तिगत रुझान पर निर्भर करता है।

                                               

वर्ष

एक वर्ष या साल सूर्य की चारों ओर अपनी कक्षा में चलती पृथ्वी की कक्षीय अवधि है। पृथ्वी के अक्षीय झुकाव के कारण, एक वर्ष का कोर्स ऋतुओं के गुजरने को देखता है, और वह चिन्हित होता हैं मौसम में, दिवालोक के घंटों में, और परिणामस्वरूप, वनस्पति और मिट्टी उर्वरता में बदलावों द्वारा। ग्रह के शीतोष्ण और उपध्रुवीय क्षेत्रों में, चार ऋतु आमतौपर पहचाने जाते हैं: वसंत, ग्रीष्म, शरद और शीत ऋतु । उष्णकटिबन्धीय और उपोष्णकटिबन्धीय क्षेत्रों में, कई भौगोलिक क्षेत्र परिभाषित मौसम प्रस्तुत नहीं करते हैं; लेकिन मौसमी उष्णकटिबन्ध में, वार्षिक आर्द्और शुष्क ऋतु पहचाने जाते हैं और ट्रैक किए जाते हैं। चालू वर्ष 2020 ...

                                               

मास

मास या महीना, काल मापन की एक ईकाई है। भारतीय कालगणना में एक वर्ष में १२ मास होते हैं। इसी तरह ग्रेगरी कैलेण्डर में भी एक वर्ष में बारह मास होते हैं। विभिन्न संस्कृतियों में मासों के नाम अलग-अलग हैं।

                                               

महेश बरनवाल

महेश बरनवाल भारत के प्रसिद्ध कवि, लेखक व सम्पादक है। इन्होने कई किताबे भारत तथा विश्व के इतिहास पर लिखा है। इन्होने कई किताबे भारत के राज्यो पर भी लिखी है।

                                               

बृजवुड

बृजवुड उत्तर भारत के बृज क्षेत्र का चित्रपट उद्योग है। जहां बृजभाषा में चित्रपट निर्माण होता है। भारतीय सिनेमा में बृज के सिनेमा के आ जाने के बाद कलाकारों को अधिक काम मिलना प्रारम्भ हो गया तो बृज में बडे बडे फिल्म कार्यक्रम होने लगे। उत्तर प्रदेश में फिल्म निर्माण को बढाने के लिए बृजभाषा सिनेमा को बृजवुड नाम दिया गया। आज भारतीय सिनेमा के इतिहास में बृजवुड का अपना महत्व है।

                                               

लउरिया अरेराज

लउरिया अरेराज, बिहार के पूर्वी चम्पारन जिले का एक ऐतिहासिक महत्व का स्थल है जहाँ सम्राट अशोक द्वारा निर्मित एक स्तम्भ है जिस पर धर्मलेख खुदा हुआ है। यह स्तम्भ लउरिया नन्दनगढ़ से ५५ किमी दक्षिण-पश्चिम में है जहाँ एक दूसरा अशोक स्तम्भ स्थित है। प्रियदर्शी सम्राट अशोक ने छह ठोस पत्थरों के स्तम्भों पर जो धर्मलेख खुदवाया था, उसमें से एक पूर्वी चम्पारण जिले के अरेराज लौरिया में 249 ईसापूर्व में लगाया था जो आज भी सुरक्षित है। इतिहास के अनुसार सम्राट अशोक ने अपने राज्याभिषेक के 26 वर्ष वाद यह धर्मलेख लिखवाया था। इस धर्मलेख स्तम्भ का भार 34 टन है और यह साढ़े छत्तीस फुट ऊँचा है। इस स्तम्भ के उपर का ...

इतिहास
                                     

ⓘ इतिहास

इतिहास का प्रयोग विशेषत: दो अर्थों में किया जाता है। एक है प्राचीन अथवा विगत काल की घटनाएँ और दूसरा उन घटनाओं के विषय में धारणा इतिहास शब्द का तात्पर्य है यह निश्चय था "। ग्रीस के लोग इतिहास के लिए "हिस्तरी" शब्द का प्रयोग करते थे। "हिस्तरी" का शाब्दिक अर्थ "बुनना" था। अनुमान होता है कि ज्ञात घटनाओं को व्यवस्थित ढंग से बुनकर ऐसा चित्र उपस्थित करने की कोशिश की जाती थी जो सार्थक और सुसंबद्ध हो।

इस प्रकार इतिहास शब्द का अर्थ है - परंपरा से प्राप्त उपाख्यान समूह जैसे कि लोक कथाएँ, वीरगाथा जैसे कि महाभारत या ऐतिहासिक साक्ष्य। इतिहास के अंतर्गत हम जिस विषय का अध्ययन करते हैं उसमें अब तक घटित घटनाओं या उससे संबंध रखनेवाली घटनाओं का कालक्रमानुसार वर्णन होता है। दूसरे शब्दों में मानव की विशिष्ट घटनाओं का नाम ही इतिहास है। या फिर प्राचीनता से नवीनता की ओर आने वाली, मानवजाति से संबंधित घटनाओं का वर्णन इतिहास है। इन घटनाओं व ऐतिहासिक साक्ष्यों को तथ्य के आधापर प्रमाणित किया जाता है।

                                     

1. इतिहास का आधार एवं स्रोत

इतिहास के मुख्य आधार युगविशेष और घटनास्थल के वे अवशेष हैं जो किसी न किसी रूप में प्राप्त होते हैं। जीवन की बहुमुखी व्यापकता के कारण स्वल्प सामग्री के सहारे विगत युग अथवा समाज का चित्रनिर्माण करना दु:साध्य है। सामग्री जितनी ही अधिक होती जाती है उसी अनुपात से बीते युग तथा समाज की रूपरेखा प्रस्तुत करना साध्य होता जाता है। पर्याप्त साधनों के होते हुए भी यह नहीं कहा जा सकता कि कल्पनामिश्रित चित्र निश्चित रूप से शुद्ध या सत्य ही होगा। इसलिए उपयुक्त कमी का ध्यान रखकर कुछ विद्वान् कहते हैं कि इतिहास की संपूर्णता असाध्य सी है, फिर भी यदि हमारा अनुभव और ज्ञान प्रचुर हो, ऐतिहासिक सामग्री की जाँच-पड़ताल को हमारी कला तर्कप्रतिष्ठत हो तथा कल्पना संयत और विकसित हो तो अतीत का हमारा चित्र अधिक मानवीय और प्रामाणिक हो सकता है। सारांश यह है कि इतिहास की रचना में पर्याप्त सामग्री, वैज्ञानिक ढंग से उसकी जाँच, उससे प्राप्त ज्ञान का महत्व समझने के विवेक के साथ ही साथ ऐतिहासक कल्पना की शक्ति तथा सजीव चित्रण की क्षमता की आवश्यकता है। स्मरण रखना चाहिए कि इतिहास न तो साधारण परिभाषा के अनुसार विज्ञान है और न केवल काल्पनिक दर्शन अथवा साहित्यिक रचना है। इन सबके यथोचित संमिश्रण से इतिहास का स्वरूप रचा जाता है।

                                     

2. इतिहास का आरंभ

लिखित इतिहास का आरंभ पद्य अथवा गद्य में वीरगाथा के रूप में हुआ। फिर वीरों अथवा विशिष्ट घटनाओं के संबंध में अनुश्रुति अथवा लेखक की पूछताछ से गद्य में रचना प्रारंभ हुई। इस प्रकार के लेख खपड़ों, पत्थरों, छालों और कपड़ों पर मिलते हैं। कागज का आविष्कार होने से लेखन और पठन पाठन का मार्ग प्रशस्त हो गया। लिखित सामग्री को अन्य प्रकार की सामग्री-जैसे खंडहर, शव, बर्तन, धातु, अन्न, सिक्के, खिलौने तथा यातायात के साधनों आदि के सहयोग द्वारा ऐतिहासिक ज्ञान का क्षेत्और कोष बढ़ता चला गया। उस सब सामग्री की जाँच पड़ताल की वैज्ञानिक कला का भी विकास होता गया। प्राप्त ज्ञान को को सजीव भाषा में गुंफित करने की कला ने आश्चर्यजनक उन्नति कर ली है, फिर भी अतीत के दर्शन के लिए कल्पना कुछ तो अभ्यास, किंतु अधिकतर व्यक्ति की नैसर्गिक क्षमता एवं सूक्ष्म तथा क्रांत दृष्टि पर आश्रित है। यद्यपि इतिहास का आरंभ एशिया में हुआ, तथापि उसका विकास यूरोप में विशेष रूप से हुआ।

एशिया में चीनियों, किंतु उनसे भी अधिक इस्लामी लोगों को, जिनको कालक्रम का महत्व अच्छे प्रकार ज्ञात था, इतिहासरचना का विशेष श्रेय है। मुसलमानों के आने के पहले हिंदुओं की इतिहास संबंध में अपनी अनोखी धारण थी। कालक्रम के बदले वे सांस्कृतिक और धार्मिक विकास या ह्रास के युगों के कुछ मूल तत्वों को एकत्रित कर और विचारों तथा भावनाओं के प्रवर्तनों और प्रतीकों का सांकेतिक वर्णन करके तुष्ट हो जाते थे। उनका इतिहास प्राय: काव्यरूप में मिलता है जिसमें सब कच्ची-पक्की सामग्री मिली जुली, उलझी और गुथी पड़ी है। उसके सुलझाने के कुछ-कुछ प्रयत्न होने लगे हैं, किंतु कालक्रम के अभाव में भयंकर कठिनाइयाँ पड़ रही हैं।

वर्तमान सदी में यूरोपीय शिक्षा में दीक्षित हो जाने से ऐतिहासिक अनुसंधान की हिंदुस्तान में उत्तरोत्तर उन्नति होने लगी है। इतिहास की एक नहीं, सहस्रों धाराएँ हैं। स्थूल रूप से उनका प्रयोग राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में अधिक हुआ है। इसके सिवा अब व्यक्तियों में सीमित न रखकर जनता तथा उसके संबंध का ज्ञान प्राप्त करने की ओर अधिक रुचि हो गई है।

भारत में इतिहास के स्रोत हैं: ऋग्वेद और अन्‍य वेद जैसे यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद ग्रंथ, इतिहास पुराणस्मृति ग्रंथ आदि। इन्हें ऐतिहासिक सामग्री कहते हैं।

पश्चिम में हिरोडोटस को प्रथम इतिहासकार मानते हैं।

                                     

3. इतिहास का क्षेत्र

इतिहास का क्षेत्र बड़ा व्यापक है। प्रत्येक व्यक्ति, विषय, अन्वेषण आंदोलन आदि का इतिहास होता है, यहाँ तक कि इतिहास का भी इतिहास होता है। अतएव यह कहा जा सकता है कि दार्शनिक, वैज्ञानिक आदि अन्य दृष्टिकोणों की तरह ऐतिहासिक दृष्टिकोण की अपनी निजी विशेषता है। वह एक विचारशैली है जो प्रारंभिक पुरातन काल से और विशेषत: 17वीं सदी से सभ्य संसार में व्याप्त हो गई। 19वीं सदी से प्राय: प्रत्येक विषय के अध्ययन के लिए उसके विकास का ऐतिहासिक ज्ञान आवश्यक समझा जाता है। इतिहास के अध्ययन से मानव समाज के विविध क्षेत्रों का जो व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त होता है उससे मनुष्य की परिस्थितियों को आँकने, व्यक्तियों के भावों और विचारों तथा जनसमूह की प्रवृत्तियों आदि को समझने के लिए बड़ी सुविधा और अच्छी खासी कसौटी मिल जाती है।

इतिहास प्राय: नगरों, प्रांतों तथा विशेष देशों के या युगों के लिखे जाते हैं। अब इस ओर चेष्ठा और प्रयत्न होने लगे हैं कि यदि संभव हो तो सभ्य संसार ही नहीं, वरन् मनुष्य मात्र के सामूहिक विकास या विनाश का अध्ययन भूगोल के समान किया जाए। इस ध्येय की सिद्ध यद्यपि असंभव नहीं, तथापि बड़ी दुस्तर है। इसके प्राथमिक मानचित्र से यह अनुमान होता है कि विश्व के संतोषजनक इतिहास के लिए बहुत लंबे समय, प्रयास और संगठन की आवश्यकता है। कुछ विद्वानों का मत है कि यदि विश्वइतिहास की तथा मानुषिक प्रवृत्तियों के अध्ययन से कुछ सर्वव्यापी सिद्धांत निकालने की चेष्टा की गई तो इतिहास समाजशास्त्र में बदलकर अपनी वैयक्तिक विशेषता खो बैठेगा। यह भय इतना चिंताजनक नहीं है, क्योंकि समाजशास्त्र के लिए इतिहास की उतनी ही आवश्यकता है जितनी इतिहास को समाजशासत्र की। वस्तुत: इतिहास पर ही समाजशास्त्र की रचना संभव है।



                                     

3.1. इतिहास का क्षेत्र सैन्य इतिहास

सैन्य इतिहास युद्ध, रणनीतियों, युद्ध, हथियाऔर युद्ध के मनोविज्ञान से संबंधित है। 1970 के दशक के बाद से "नए सैन्य इतिहास" जो जनशक्ति से अधिक सैनिकों के साथ, एवं रणनीति से अधिक मनोविज्ञान के साथ और समाज और संस्कृति पर युद्ध के व्यापक प्रभाव से संबंधित है।

                                     

3.2. इतिहास का क्षेत्र धर्म का इतिहास

धर्म का इतिहास सदियों से धर्मनिरपेक्ष और धार्मिक इतिहासकारों दोनों के लिए एक मुख्य विषय रहा है, और सेमिनाऔर अकादमी में पढ़ाया जा रहा है। अग्रणी पत्रिकाओं में चर्च इतिहास, कैथोलिक हिस्टोरिकल रिव्यू, और धर्म का इतिहास शामिल है। विषय व्यापक रूप से राजनीतिक और सांस्कृतिक और कलात्मक आयामों से लेकर धर्मशास्त्और मरणोत्तर गित तक फैला हुआ है। यह विषय दुनिया के सभी क्षेत्रों और जगहों में धर्मों का अध्ययन करता है जहां मनुष्य रहते हैं।

                                     

3.3. इतिहास का क्षेत्र सांस्कृतिक इतिहास

1980 और 1990 के दशक में सांस्कृतिक इतिहास ने सामाजिक इतिहास कि जगह ले ली। यह आम तौपर नृविज्ञान और इतिहास के दृष्टिकोण को भाषा, लोकप्रिय सांस्कृतिक परंपराओं और ऐतिहासिक अनुभवों की सांस्कृतिक व्याख्याओं को देखने के लिए जोड़ती है। यह पिछले ज्ञान, रीति-रिवाजों और लोगों के समूह के कला के अभिलेखों और वर्णनात्मक विवरणों की जांच करता है। लोगों ने कैसे अतीत की अपनी स्मृति का निर्माण किया है, यह एक प्रमुख विषय है। सांस्कृतिक इतिहास में समाज में कला का अध्ययन भी शामिल है, साथ ही छवियों और मानव दृश्य उत्पादन प्रतिरूप का अध्ययन भी है।

                                     

3.4. इतिहास का क्षेत्र राजनयिक इतिहास

राजनयिक इतिहास राष्ट्रों के बीच संबंधों पर केंद्रित है, मुख्यतः कूटनीति और युद्ध के कारणों के बारे में। हाल ही में यह शांति और मानव अधिकारों के कारणों को देखता है। यह आम तौपर विदेशी कार्यालय के दृष्टिकोण और लंबी अवधि के रणनीतिक मूल्यों को प्रस्तुत करता है, जैसा कि निरंतरता और इतिहास में परिवर्तन की प्रेरणा शक्ति है। इस प्रकार के राजनीतिक इतिहास समय के साथ देशों या राज्य सीमाओं के बीच अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के संचालन का अध्ययन है। इतिहासकार म्यूरीयल चेम्बरलेन ने लिखा है कि प्रथम विश्व युद्ध के बाद, "राजनयिक इतिहास ने ऐतिहासिक जांच के प्रमुख के रूप में संवैधानिक इतिहास का स्थान ले लिया, जोकि कभी सबसे ऐतिहासिक, सबसे सटीक और ऐतिहासिक अध्ययनों के सबसे परिष्कृत था"। उन्होंने कहा कि 1945 के बाद, प्रवृत्ति उलट गई है, अब सामाजिक इतिहास ने इसकी जगह ले लिया है।

                                     

3.5. इतिहास का क्षेत्र आर्थिक इतिहास

यद्यपि 19वीं सदी के उत्तरार्ध से ही आर्थिक इतिहास अच्छी तरह से स्थापित है, हाल के वर्षों में शैक्षिक अध्ययन पारंपरिक इतिहास विभागों से स्थानांतरित हो कर अधिक से अधिक अर्थशास्त्र विभागों की तरफ चला गया है। व्यावसायिक इतिहास व्यक्तिगत व्यापार संगठनों, व्यावसायिक तरीकों, सरकारी विनियमन, श्रमिक संबंधों और समाज पर प्रभाव के इतिहास से संबंधित है। इसमें व्यक्तिगत कंपनियों, अधिकारियों और उद्यमियों की जीवनी भी शामिल है यह आर्थिक इतिहास से संबंधित है; व्यावसायिक इतिहास को अक्सर बिजनेस स्कूलों में पढ़ाया जाता है

                                     

3.6. इतिहास का क्षेत्र पर्यावरण इतिहास

पर्यावरण का इतिहास एक नया क्षेत्र है जो 1980 के दशक में पर्यावरण के इतिहास विशेष रूप से लंबे समय में और उस पर मानवीय गतिविधियों का प्रभाव को देखने के लिए उभरा।

                                     

3.7. इतिहास का क्षेत्र विश्व इतिहास

विश्व इतिहास पिछले 3000 वर्षों के दौरान प्रमुख सभ्यताओं का अध्ययन है। विश्व इतिहास मुख्य रूप से एक अनुसंधान क्षेत्र की बजाय एक शिक्षण क्षेत्र है। इसे 1980 के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान और अन्य देशों में लोकप्रियता हासिल हुई थी, जिससे कि छात्रों को बढ़ते हुए वैश्वीकरण के परिवेश में दुनिया के लिए व्यापक ज्ञान की आवश्यक होगी।

                                     

4. इतिहासकार

इतिहासकार पिछली घटनाओं के बारे में जानकारी एकत्र करते हैं, इकट्ठा करते हैं, व्यवस्थित करते हैं और प्रस्तुत करते हैं। वे इस जानकारी को पुरातात्विक साक्ष्य के माध्यम से खोजते हैं, जो भुतकाल में प्राथमिक स्रोत जैसे पाण्डुलिपि,शिलालेख आदि में लिखे गए होते हैं जैसे जगह, नाम आदि। इतिहासकारों की सूची में, इतिहासकारों को उस ऐतिहासिक काल के क्रम में समूहीकृत किया जा सकता है, जिसमें वे लिख रहे थे, जो जरूरी नहीं कि वह अवधि, जिस अवधि में वे विशेषीकृत थीं क्रॉनिकल्स और एनलिस्ट, हालांकि वे सही अर्थों में इतिहासकार नहीं हैं, उन्हें भी अक्सर शामिल किया जाता है।

                                     

5. छद्मइतिहास

छद्मइतिहास उन लेखों/रचनाओं के लिये प्रयुक्त किया जाता है जिनकी सामग्री की प्रकृति इतिहास जैसी होती है किन्तु वे इतिहास-लेखन की मानक विधियों से मेल नहीं खाती। इसलिये उनके द्वारा दिये गये निष्कर्ष भ्रामक एवं अविश्वसनीय बन जाते हैं। प्राय: राष्ट्रीय, राजनैतिक, सैनिक, एवं धार्मिक विषयों के सम्बन्ध में नये एवं विवादित और काल्पनिक तथ्यों पर आधारित इतिहास को छद्मइतिहास की श्रेणी में रखा जाता है।

                                     

6. प्रागितिहास

मानव सभ्यता कि इतिहास वस्तुत: मानव के विकास का इतिहास है, पर यह प्रश्न सदा विवादग्रस्त रहा है कि आदि मनव और उसकी सभ्यता का विकास कब और कहाँ हुआ। इतिहास के इसी अध्ययन को प्रागैतिहास कहते हैं। यानि इतिहास से पूर्व का इतिहास। प्रागैतिहासिक काल की मानव सभ्यता को ४ भागों में बाँटा गया है।

  • आदिम पाषाण काल
  • धातु काल
  • पूर्व पाषाण काल
  • उत्तर पाषाण काल
                                     

7. प्राचीनतम सभ्यताएँ

असभ्यता से अर्धसभ्यता, तथा अर्धसभ्यता से सभ्यता के प्रथम सोपान तक हज़ारों सालों की दूरी तय की गई होगी। लेकिन विश्व में किस समय किस तरह से ये सभ्यताएँ विकसित हुईं इसकी कोई जानकारी आज नहीं मिलती है। हाँ इतना अवश्य मालूम हो सका है कि प्राचीन विश्व की सभी सभ्यताएँ नदियों की घाटियों में ही उदित हुईं और फली फूलीं। दजला-फ़रात की घाटी में सुमेर सभ्यता, बाबिली सभ्यता, तथा असीरियन सभ्यता, नील की घाटी में प्राचीन मिस्र की सभ्यता तथा सिंधु की घाटी में सिंधु घाटी सभ्यता या द्रविड़ सभ्यता का विकास हुआ।

                                     
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भारत का भाषाई इतिहास
                                               

भारत का भाषाई इतिहास

भारत में वतर्मान समय में सैकड़ों भाषाएँ बोलू जातीं है। इनके विकास का इतिहास बहुत पुराना है। भारत की वर्तमान भाषाओं को अनेक समूहों में बाँटा जाता है। भारत के भाषाई इतिहास के स्रोत ब्राह्मी लिपि के साथ आरम्भ होते हैं जो तृतीय शताब्दी ईसापूर्व में जन्मी मानी जाती है। किन्तु सिन्धु घाटी लिपि में लिकी वस्तुएँ भी खुदाई में मिलीं हैं किन्तु इस लिपि को अभी तक ठीक-ठीक पढ़ा नहीं जा सका है।

विजयनगर की सैन्यशक्ति
                                               

विजयनगर की सैन्यशक्ति

विजयनगर साम्राज्य के पास एक विशाल स्थाई थलसेना थी। इसके अलावा उनके पास एक शक्तिशाली जलसेना भी थी। विजयनगर की सेना शत्रुओं से रक्षा के काम आती थी, विशेषकर बहमनी सल्तनत से उनकी बहुत लम्बी शत्रुता बनी रही। अपनी शक्तिशाली सेना के बल पर ही विजयनगर दक्षिण भारत के इतिहास का सबसे अधिक केन्द्रीय राजनीति वाला राज्य बना। किन्तु साम्राज्य की आय का एक बड़ा भाग सेना पर ही खर्च हो जाता था जिससे अर्थव्यस्था पर दबाव पड़ता था।

                                               

शिवराई

साँचा:Infobox coin शिवराई मराठा साम्राज्य के शासनकाल के समय मुद्रित ताबे की मुद्रा थी। यह १९वीं शताब्दी के अन्त तक प्रचलन में थी, मुख्यतः बॉम्बे प्रेसिडेन्सी क्षेत्र में।

                                               

अंजन कोलीय

महाराजा अंजन कोलीय प्रचीन भारतवर्ष मे कोलीय गणराज्य के कोली महाराजा थे एवं गणराज्य की राजधानी का नाम रामग्राम एवं देवदह था। महाराजा अंजन कोलीय भारत के इतिहास मे पहले ऐसे शासक हैं जिन्होंने अपने राज मे सर्व प्रथम गणतंत्र की स्थापना की थी। उनका विवाह शाक्य गणराज्य की राजकुमारी सुलक्षणा एवं यशोधरा से हुआ था। महाराजा अंजन कोलीय के दो पुत्रियां मायादेवी और महाप्रजापति गौतमी की शादी शाक्य गणराज्य के राजकुमार शुद्धोधन के साथ हुई।

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अनुवाद

इतिहास का महत्व.

History of 30 january: 30 जनवरी का इतिहास Navbharat Times. दमोह का इतिहास बहुत प्राचीन है। सिंग्रामपुर में मिले पौराणिक काल के पाषाण हथियार इस बात का साक्ष्य है कि यह स्थान करोड़ो वर्ष पहले से मानव सभ्यता का पालना रहा है। 5वीं शताब्दी मे यह पाटिलीपुत्र के भव्य एवं शक्तिशाली गुप्त साम्राज्य. भारत का इतिहास वीडियो. इतिहास में एमए Welcome to Jawaharlal Nehru University. ऐतिहासिक रूपरेखा इतिहास और राजस्व रिकॉर्ड के पन्नों में, सरवट को परगना के रूप में जाना जाता था, जिसे सम्राट शाजहाँ ने अपने एक प्रमुख सरदार सय्यैद मुज़फ्फर खान जागीर के रूप में दिया था। उसने 1633 में खेरा और सूज्डू की भूमि को मिलाकर.


प्राचीन इतिहास इन हिंदी.

इतिहास चमोली जिले की वेबसाइट India Chamoli. इतिहास. नवादा ऐतिहासिक विरासत का एक स्थान रहा है राजा बृहधृत ने इस क्षेत्र में मगध साम्राज्य की स्थापना की थी और इस इलाके में बृहधृत, मौर्य, कानाह और गुप्ता जैसे कई राजवंशों का वर्चस्व था जो मध्य और उत्तरी भारत के कई राज्यों पर शासन.


इतिहास वीडियो.

इतिहास Coal India Limited. महासमुन्द जिला अपनी सांस्कृतिक इतिहास के लिए प्रसिद्ध है। यह क्षेत्र सोमवंशीय सम्राट द्वारा शासित दक्षिण कोशल की राजधानी थी, यह सीखने का केंद्र भी हैं। यहाँ बड़ी संख्या में मंदिर हैं,जो अपने प्राकृतिक और सौंदर्य के कारण हमेशा. इतिहास किसे कहते है. इतिहास जिला सिद्धार्थनगर उत्तर प्रदेश सरकार India. बक्सर जिले के अपने मूल जिले भोजपुर के साथ निकट संबंध हैं और उनका एक पुराना और दिलचस्प इतिहास है। बक्सर प्रसिद्ध देवताओं, देवताओं के युद्धक्षेत्और पुराणों के अनुसार राक्षसों और आधुनिक इतिहास में विदेशी आक्रमण और देशवासियों के बीच. इतिहास औरंगाबाद बिहार में आपका स्वागत है India. इतिहास का प्रयोग विशेषत: दो अर्थों में किया जाता है। एक है प्राचीन अथवा विगत काल की घटनाएँ और दूसरा उन घटनाओं के विषय में धारणा इतिहास शब्द का तात्पर्य है यह निश्चय था। ग्रीस के लोग इतिहास के लिए हिस्तरी शब्द का प्रयोग करते थे। हिस्तरी का शाब्दिक अर्थ बुनना था।. इतिहास फर्रुखाबाद India Farrukhabad. Gk update News in Hindi: 30 जनवरी भारत के इतिहास का सबसे दुखद दिन है। देश दुनिया के इतिहास में 30 जनवरी की अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं का सिलसिलेवार ब्योरा इस प्रकार है।.





इतिहास जिला आगर मालवा, मध्य प्रदेश शासन भारत.

उत्तर प्रदेश का इतिहास काफी हद तक समग्र भारत देश के इतिहास के साथ साथ ही चला है। लगभग 4000 साल पुराना इतिहास है उत्तर प्रदेश का। अपने प्रारंभिक काल के उत्तर प्रदेश में आर्यमूल के लोग ही मुख्यतः निवास करते थे, जिनका प्रमुख व्यवसाय खेती था।. इतिहास जिला सीतापुर. उत्तर प्रदेश सरकार India. इतिहास. इस जिले के वर्तमान क्षेत्र कोशल राज्य का एक हिस्सा था यह प्राचीनआर्य संस्कृति का मुख्य केंद्र है उत्तर में हिमालय से घिरा हुआ है, दक्षिण में श्यादिका नदी है दक्षिण में पंचाल राज्य और पूर्व में मगध राज्य है.इसके आलावा इस.


इतिहास जिला बाराबंकी, उत्तर प्रदेश सरकार India.

इतिहास. सामान्य सम्मेलनों के मुताबिक हरदोई जिले के संबंध में हिरणकश्यप के साथ संबंधित है इसका वर्तमान नाम हरदोई इसके पहले नाम हरिद्रोही है। कुछ लोगों के नजदीक में यह जिला हरदेवबक्ष द्वारा उपनिवेश में था और सिर्फ इसलिए इस वजह से शहर. इतिहास जिला महासमुंद India महासमुंद Mahasamund. इतिहास. चमोली जिले द्वारा कवर किया जाने वाला क्षेत्र कुमाऊं के पौड़ी गढ़वाल जिले का 1 9 60 तक हिस्सा था । यह गढ़वाल मार्ग के पूर्वोत्तर के किनारे पर स्थित है और मध्य या मध्य हिमालय में प्राचीन हिमालय पर्वत के तीन हिस्सों में से एक. इतिहास District Bilaspur, Government of Himachal Pradesh India. इतिहास. मुजफ्फरपुर जिला, लीची की भूमि 1875 में प्रशासनिक सुविधा के लिए तिहुत के पहले जिले को विभाजित करके बनाया गया था। वर्तमान जिला मुजफ्फरपुर 18 वीं शताब्दी में अपने अस्तित्व में आया और ब्रिटिश राजवंश के तहत एक अमील राजस्व.


इतिहास चतरा India Chatra.

केंद्र में प्रवेश करने वाले छात्रों को 1 प्राचीन इतिहास या 2 मध्यकालीन इतिहास या 3 आधुनिक इतिहास में विशेषज्ञता के दौरान एक लोचदार कार्यक्रम की पेशकश की जाती है। अपनी विशेषज्ञता के पाठ्यक्रमों के साथ, छात्रों को सर्वेक्षण ए ​. भारत का 20 लाख साल पुराना इतिहास देखेंगे?. भारत और दुनिया के बीच के संबंध तलाशने के लिए मुंबई में सजी है एक ख़ास प्रदर्शनी. इतिहास जिला उन्नाव, उत्तर प्रदेश सरकार भारत Unnao. इतिहास. धनबाद जिले को 1956 में पूर्व माणभूम जिले के सदर प्रखंड के पुराने धनबाद प्रखंड, चास और चंदनक्यारी पुलिस स्टेशनों को बनाते हुए गठित किया गया था। धनबाद 1928 से पुलिस जिला है। 1971 के बाद, बिहार राज्य के जिलों के पुनर्गठन ने धनबाद जिले. इतिहास जिला ऊना, हिमाचल प्रदेश सरकार भारत Una. इतिहास. आम तौपर यह स्वीकार किया जाता है कि आगरा महाभारत के समय से एक प्राचीन शहर था और फिर भी दिल्ली सल्तनत के मुस्लिम शासक सुल्तान सिकंदर लोदी ने 1504 में आगरा की स्थापना की। सुल्तान की मृत्यु के बाद, शहर अपने बेटे सुल्तान​.


इतिहास District Jashpur, Government of Chhattisgarh इंडिया.

आगर नगर का इतिहास प्रागेतिहासिक काल के आरम्भ से आरम्भ होता है यहाँ लाल घाटी तथा समीपवर्ती क्षेत्र में गोलाश्म, मध्यप्रदेश व उत्तर पूर्वाश्म उपकरण प्राप्त होते है परमार काल में इस क्षेत्र का महत्त्व अक्षुण्य व रेखांकनीय रहा है, जिसके. इतिहास खगड़िया जिले में आपका स्वागत है India. भारत का इतिहास История Индии. इतिहास जिला नैनीताल, उत्तराखण्ड सरकार भारत. अंबकेरी, बड़गांव, नसीरपुऔर हुलास हड़प्पा संस्कृति के केंद्र थे क्योंकि इन क्षेत्रों में हड़प्पा सभ्यता के समान बहुत सी चीजें मिलती थीं। आर्यों के दिनों से ही, इस क्षेत्र का इतिहास तार्किक तरीके से मिलता है लेकिन वर्तमान अन्वेषण और.





इतिहास ज़िला मुरैना, म.प्र. शासन भारत.

फर्रुखाबाद जनपद का इतिहास बहुत ही दूरस्थ प्राचीनकाल का है । कांस्य युग के दौरान कई पूर्व ऐतिहासिक हथियाऔर उपकरण यहां मिले थे। संकिसा और कम्पिल में बड़ी संख्या में पत्थर की मूर्तियां मिलती हैं। फर्रुखाबाद जनपद मूर्तिकला में महान. इतिहास भागलपुर India Bhagalpur. इतिहास. करनाल शहर, महाभारत के प्रसिद्ध राजा कर्ण द्वारा स्थापित किया गया था। सन् 1739 में करनाल प्रमुखता से असित्तव मे आया जब नादिर शाह ने करनाल में मुहम्मद शाह को हराया था। जीन्द के राजा गोपाल सिंह ने 1863 में करनाल पर कब्जा कर लिया. इतिहास जिला दमोह मध्य प्रदेश सरकार भारत इंडिया. इतिहास. 1857 1858 के आजादी के संघर्ष के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी से ब्रिटिश क्राउन तक सत्ता का हस्तांतरण किया गया। जैसे ही आदेश बहाल किया गया था, नागरिक प्रशासन को जिले में फिर से स्थापित किया गया था जिसका नाम उन्नाव नाम था, उन्नाव में. इतिहास जिला धनबाद, झारखण्ड सरकार भारत Dhanbad. अतः बांका का सही इतिहास अवलोकन हेतु भागलपुर जिला के इतिहास को समझना जरूरी है । ग्रंथों एवं पुरानों की संरक्षित परंपरा के अनुसार, अनु के वंशज, महान मनु के पोता ने अनवा साम्राज्य की स्थापना पूर्व में की । तत्परश्चात यह साम्राज्य पांच.


इतिहास जनपद आगरा, उत्तर प्रदेश सरकार India Agra.

जिला का संक्षिप्त इतिहास ऐसा कहा जाता है कि जिले का वर्तमान नाम ऋषि जलवान के नाम पर है, जो यहां प्राचीन काल में रहते थे, लेकिन कुछ स्थानीय लोग इसका नाम जलीम, एक संध्याय ब्राह्मण के नाम पर अपना पहला समझौता करने के संस्थापक मानते थे।. इतिहास S3WaaS India Balrampur. स्कन्द पुराण के मानस खण्ड में नैनीताल को त्रिऋषि सरोवर अर्थात तीन साधुवों अत्रि, पुलस्क तथा पुलक की भूमि के रूप में दर्शाया गया है । मान्यता है कि यह तीनों ऋषि यहां पर तपस्या करने आये थे, परंतु उन्हें यहां पर उन्हें पीने का पानी नहीं. इतिहास जिला हरदोई,उत्तर प्रदेश सरकार भारत Hardoi. इतिहास. महाराजा सुम्मेर सिंह की धर्म पत्नी ललिता देवी के नाम पर जनपद का नाम ललितपुर पड़ा । ऐसा मानते हैं कि महाराज सुम्मेर सिंह को तालाब में स्नान करने पर चर्मरोग से मुक्ति मिली और फिर उन्हीं के नाम पर तालाब का नाम सुम्मेरा तालाब​.


इतिहास जिला नारायणपुर छत्तीसगढ़ शासन India.

इतिहास. वर्ष १७६४ में बक्सर के युद्ध में अंग्रेजों की जीत के परिणामस्वरूप बिहार का दीवानी और राजस्व अधिकार अंग्रेज कंपनी के हाथ चला गया। सन १९४७ में देश के अन्य प्रान्तों के साथ गया को भी आज़ादी मिली! सन १८६४ तक गया तत्कालीन बेहार तथा. इतिहास जनपद ललितपुर District Lalitpur. प्राचीन इतिहास नर्मदा सहायक नदियों के किनारों में हुए अन्वेषणों से पता चलता है कि जिले के पुरापाषाण काल में भी यहां पर मानव प्रजाति आस्तित्‍वमान थी । कहा जाता है कि खंडवा के उत्तर पश्चिम में लगभग 70 किमी की दूरी पर नर्मदा नदी के तट. इतिहास जिला भदोही, उत्तर प्रदेश सरकार India. जिला के नाम की उत्पत्ति बाराबंकी जिले को पूर्वांचल के प्रवेश द्वार के रूप में भी जाना जाता है, जिसे कई संतों और साधुओं की तपस्या स्थली होने का गौरव प्राप्त है।इस जिले के नामकरण की कई प्राचीन कथाएं प्रचलित हैं। उनमें सबसे लोकप्रिय. इतिहास जिला सहारनपुर, उत्तर प्रदेश सरकार India. जिला का संक्षिप्त इतिहास भागलपुर जिला बिहार राज्य के पूर्वी भाग में गंगा नदी के दक्षिणी तट पर बसा हुआ है भागलपुर शहर भागलपुर प्रमंडल एवं जिला मुख्यालय के साथ सदर अनुमंडल भी है भागलपुर जिला में तीन अनुमंडल नवगछिया, भागलपुर और.


इतिहास नालन्दा जिला, बिहार सरकार भारत.

इतिहास. यह जिला पहले महासू जिले के चीनी तहसील के नाम से जाना जाता था तथा इसे १ मई १९६० को इसे एक स्वतंत्र जिले के रूप में स्थापित किया गया । स्वतंत्रता की पूर्व संध्या पर राज्य का विलय करने से पहले, किन्नौर घाटी पूर्वी बुशहर राज्य का एक. इतिहास मुजफ्फरपुर जिला, बिहार सरकार भारत. इतिहास. सोनीपत नाम संस्कृत शब्द से अपनाया गया है जिसका अर्थ है संस्कृत भाषा में सुवर्णप्रस्थ सोने की जगह । एक लोकप्रिय परंपरा यह मानती है कि यह महाभृत में उल्लेखित पांच पाट या प्रस्थों इंद्रप्रस्थ, पानीपत, तलपत, भघपत और सोनीपत में से. इतिहास जनपद जालौन उत्तर प्रदेश सरकार India. इतिहास. जिला गजेटियर के अनुसार, दरभंगा सन 1325 1525 ईस्वी तक ओनवाड़ा शासको के अन्दर था कुछ अस्थिरता की अस्थायी अवधि के बाद, दरभंगा ओइनवाड़ा के नियंत्रण में आया, जिन्हें कामेश्वर ठाकुर या सुगौना वंश के नाम से भी जाना जाता है।. इतिहास जिला करनाल India District Karnal. इतिहास. पारंपरिक रूप से यह क्षेत्र महाकाव्य रामायण में दंडकारण्य और महाभारत में कोसाला साम्राज्य का हिस्सा है। 450 ईस्वी के आसपास, बस्तर राज्य पर नाला राजा, भावतद्दा वर्मन ने शासन किया था, जिसका उल्लेख है कि पड़ोसी वाकाटक. इतिहास ज़िला अमरोहा, उत्तर प्रदेश सरकार India. फतेहपुर का ज्ञात इतिहास वैदिक युग के रूप में पुराना है। जनरल कर्णिंग ने वैदिक युग के अवशेषों के बारे में चर्चा करते हुए इस जिले के भितौरा और असनी स्थानों के बारे में लिखा है। इस बात के सबूत हैं कि चीनी यात्री ह्वेनसंग ने इस जिले के.





इतिहास जिला खण्‍डवा, मध्‍यप्रदेश शासन भारत.

सिद्धार्थनगर जनपद का विस्तार 270 N से 270 28 N और 820 45 E से 830 10 E के मध्य उत्तर प्रदेश के उत्तरी पूर्वी सीमा के सन्निकट नेपाल राष्ट्र के दक्षिणी सीमा से सटा हुआ है। जिले का इतिहास बौध धर्म के संस्थापक भगवान गौतम बुद्ध के जीवन से जुड़ा. संस्‍कृति और विरासत प्राचीन इतिहास भारत के बारे. इतिहास. ज़िला अमरोहा पूर्ववर्ती ज्योतिबा फुलेनगर दिनांक 15 अप्रैल 1997 को राज्य सरकार द्वारा स्थापित किया गया जिसका मुख्यालय अमरोहा नगर को बनाया गया नवनिर्मित जनपद में तीन तहसील शामिल की गयीं – अमरोहा, धनौरा, एवं हसनपुर। वर्तमान.


आज सरकारी छुट्टी है क्या.

बनबसा छुट्टी आए आर्मी जवान की सड़क हादसे में. फरवरी में 29 दिन, यह साल लीप ईयर सितंबर अक्टूबर में अधिक मास 2020 में सबसे कम त्योहार जून, जुलाई और दिसंबर के महीने में Hindu Festivals Government Bank Public Holidays Panchang Calendar 2020 भारत छुट्टियों या 2020 के. कल स्कूल की छुट्टी है क्या 2019. छुट्टी के नियमों के अनुसार केंद्र सरकार के. मुख्य पृष्ठ Document कार्यालय आदेश छुट्टी की सूची 2020. प्रिंट Share Facebook Twitter. छुट्टी की सूची 2020. छुट्टी की सूची 2020. शीर्षक, दिनांक, View Download. छुट्टी की सूची 2020, 23 01 2020, देखें 2 MB वेबसाइट नीतियां मदद हमसे संपर्क करें​. छुट्टी समाचार 2019. New year most holidays in April, 3 chances of taking long holidays in. Year 2020 Holiday Calendar UP school Holiday Calendar 2020 नए साल को लेकर बच्चों से लेकर बड़ों तक के मन में कई उत्सुकताएं होती हैं। इनमें सबसे ज्यादा उत्सुकता होती है छुट्टियों की।.


नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं संदेश.

वर्ष 2019 20 के लिए प्रस्तावित कलेक्टर दर जिला. महत्वपूर्ण सूचनाएं. मौसम मंजूषा वर्ष 2019, अंक 29 राजभाषा नीति सिंहावलोकन 2018 मौसम मंजूषा वर्ष 2019, अंक 28 उपलब्धियां वार्षिक कार्यक्रम 2018 19 मौसम विज्ञान के बढ़ते चरण. नव वर्ष 2020. वर्ष 2019: हिंदू राष्ट्र के एजेंडे को जारी रखने का. Meaning of आगामी वर्ष in English आगामी वर्ष का अर्थ आगामी वर्ष ka Angrezi Matlab Pronunciation of आगामी वर्ष आगामी वर्ष play. Meaning of आगामी वर्ष in English. Noun. Ensuing year Aagami varsh, aagaamee varsh, aagami warsh. आज का मुहूर्त. muhurat. शुभ समय में शुरु.


कार्तिक मास के भजन.

अधिक मास किंवा पुरुषोत्तम मास या मासाचे. हिंदू पंचांग मास 2020 – भारतीय पंचांग के अनुसार महीनों के नाम क्या हैं? कब कौनसा माह आरंभ हो रहा है? भारतीय कैलेंडर का पहला महीना कौनसा होता है? इन सब सवालों के जवाब आपको इस लेख में मिलेंगें।. कार्तिक मास की कथा pdf. कार्तिक मास में स्नान करना बहुत लाभकारी Hindustan. हिंदी चेतना मास 2019 का शुभारंभ. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में 02 सितंबर, 2019. को हिंदी चेतना मास 2019 का शुभारंभ हुआ, जिसका उद्घाटन संस्थान के प्रभारी निदेशक डॉ. जानकी शरण मिश्र द्वारा संपन्न हुआ डॉ. कार्तिक मास २०१९. ये हैं ज्येष्ठ मास के प्रमुख व्रत और Jansatta. पौष का महीना पंचांग के अनुसार दसवां महीना कहलाता है. पौष मास की पूर्णिमा को चन्द्रमा पुष्य नक्षत्र में रहता है और इसी कारण इस महीने को पौष का महीना कहा जाता है. इस महीने में भगवान सूर्यनारायण की विशेष पूजा अर्चना से उत्तम.





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