Топ-100 ⓘ राजा शालिनीवाहन. इ. स. 78 में शालिवाहन ने शकों को परास्त कर
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ⓘ राजा शालिनीवाहन. इ. स. 78 में शालिवाहन ने शकों को परास्त करते हुए शालिवाहन शक का आरंभ किया। उन्होंने प्रसिद्ध यज्ञ अश्वमेध का अनुष्ठान किया, तथा पर्शीया तक समस ..



                                     

ⓘ राजा शालिनीवाहन

इ. स. 78 में शालिवाहन ने शकों को परास्त करते हुए शालिवाहन शक का आरंभ किया। उन्होंने प्रसिद्ध यज्ञ अश्वमेध का अनुष्ठान किया, तथा पर्शीया तक समस्त राष्ट्रों को अपने अधिन कर लिया। सम्राट विक्रमादित्य परमार के 59 वर्ष पश्चात सम्राट शालिवाहन परमार का राज्यभिषेक 78 ई. में हुआ था । अम्बावती अर्थात् वर्तमान उजैन के तत्कालीन शासन चक्रवर्ती शालिवाहन 78 ई. में राज्यसिंहासनारूढ़ होकर धारराजधानी तथा सेलरा - मोलरा पहाडीयों पर भारतवर्ष के संपुर्ण भूमंडल पर अपना वर्चस्व प्रतिष्ठित किया। देवात्मा हिमालय से लेकर कन्याकुमारी के दक्षिण तट तक विक्रमादित्य के भांति महान पराक्रमी बन दृतिय विश्व विजयेता होने का गौरव हासिल किया।

चक्रवर्ती शालिवाहन के सिंहासनारूढ़ होते ही कलिवर्ष 3179 में शालिवाहन के विशाल सेना द्वारा करोडों के संख्या में अश्शुरों पर युध्दाक्रमण कर आर्यावर्त को पुन्ह खंड से अखण्ड कर दिया। अखंड आर्यावर्त पर अपना अधिपत्य स्थापित कर वेदों के विरोधी म्लेच्छ के स्थानों को उध्वस्त कर उनकी भारी नुकसान कर दिया। आर्यावर्त को म्लेच्छो से मुक्त करने हेतु शालिवाहन ने युध्द अभियान चलाकर शक, चीन, तार्तर, रोम, खोरासन, बह्लिक इन सब राज्यों एवं राष्ट्रों पर आक्रमण कर दिया तथा 92 करोड़ से भी ज्यादा शक एवं अश्शुरों का भीषण नरसंहार कीया।संपुर्ण आर्यावर्त को शको से मुक्त कर उन्हें खदेड़ दिया। उन्हें उचित दंड दिया, अपने राज्य के प्रजाजनों को ऋण रहित कर दिया तथा प्रजा के अर्थ को वापस लाया। अखण्ड भारत समेत एक बेहद विशालकाय साम्राज्य का निर्माण किया। करोडों सैन्यों से राज्य की सीमाएं सुरक्षित की तथा कड़ी सुरक्षा का निर्माण किया ताकि पुन्ह किसी भी विदेशी आक्रांताओं का म्लेच्छ,शक आक्रमण सफल न हो पाए।

द्विग्विजय के बाद सम्राट शालिवाहन परमार ने भी समस्त राज्य के लोगों उऋण कर कलिकाल में सतयुग की स्थापना के भांति कार्य किया था। विक्म युग के विक्रम संवत के बाद शालिवाहन संवत् का आरंभ हुआ, जिसे शालिवाहन संवत् कहा जाता है।

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भारतीय संस्कृति अपने कर्मजणित वर्णव्यवस्था के अनुरूप ब्राह्मण-क्षत्रियों के अण्याणोश्रीत संबंधों पर टिकी थी। इस बात को प्रसिद्ध इतिहासकार व्हि. ए. स्मिथ ने भी माना है। व्हि. ए. स्मिथ द्वारा लिखित लेख का अर्थ है कि भारतीय सभ्यता को परकिय आक्रांताओं से रक्षा करने के लिए क्षत्रियों में दो अवतार अवतिर्ण हुए - सम्राट विक्रमादित्य परमार एवं सम्राट शालिवाहन परमार, जिनकी वीरता का कोई सानी नहीं था।

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1. युध्द

शालिवाहन परमार का पहला युद्ध अभियान: सन ७८ ईस्वी में शालिवाहन परमार के प्रथम युद्ध अभियान किये जाने का प्रमाण मिलता है। जहाँग हैन मूलतः चीन का सम्राट था और हाँग राजवंश का शासक था। जिनका वर्चस्व तार्तर भूभाग पर रहा। ये अत्यंत क्रूर थे। इनकी आक्रमण कितने क्रूर होते थे, इसके बारे में यूक्रेन की लिपि फ्रॉम प्री-हिस्ट्री यूक्रेन-रूस, दिमनिक मार्टिन कृत में वर्णित हैं। इस राजवंश के सम्राट ने यूक्रेन के शासक एलाख को परास्त कर उनके वंश का समूल नाश किया। राजा एलाख की गर्भवती पत्नी को मगरमच्छ से भड़े तलाब में फ़ेंक दिया। उक्रेन के 4 लाख प्रजाजनों की हत्या कर दियी। ऋण ना चुका पाने की वजह से क्रूरतम दण्ड से दण्डित कर प्रजा का नरसंहार किया। इस राजवंश के राजा जहाँग हैन की मलेच्छ कदम चीन और भारतवर्ष की तत्कालीन सीमारेखा आराकानयोमा पर रखने की दुसाहस किया था जिससे शालिवाहन परमार ने जहाँग हैन को परास्त कर दिया। जहाँग हैन की मृत्यु हो गयी। रणभूमि एवं चीन के क्रूर राजवंश के हाथो से तार्तर के सम्पूर्ण भूभाग स्वतंत्र हो गया । चीन से लेकर तार्तर तक सम्राट शालिवाहन परमार ने केसरिया ध्वज लहराया था ।

सम्राट शालिवाहन परमार के समय में विलुप्त हो चुकी रोम राज्य को अपनी खोयी हुयी पहचान पुन्ह प्राप्त हो गई। शालिवाहन परमार रोम राज्य की प्रजाजनों के स्थिति से दुखी थे। रोम राज्य में ग्लेडियेटर्स उत्सव के नाम पर हूण निर्दोष मनुष्य को मारते थे। नारियों का शील भंग करते थे। रोम की धरती पर त्राहि त्राहि मच गयी थी,अराजकता की स्थिति आ गयी थी। ऐसे राजकीय परिस्थितियों में आर्यावर्त के सम्राट शालिवाहन परमार ने 1 करोड़ 43 लाख सैन्यबल के साथ ८१ ईस्वी 81A.D रोम पर आक्रमण किया था। बर्बर हूण कबीलों के साथ युद्ध हुआ। हूणों की सैन्य संख्या 2 करोड़ 78 लाख थी । सम्राट शालिवाहन परमार ने हूणों को परास्त कर खदेड़ा नही बल्कि मृत्यु दण्ड दे दिया। अश्शुरों को जीवन दान देने का अर्थ क्या होता हैं, ये दुर्दार्शीय सम्राट भलिभाँति जानते थे। इसलिए जर्मन से लेकर रोम तक शासन करनेवाले हूणों का समूल विनाश कर दिया। रोम से लेकर गेर्मानिया वर्त्तमान जर्मन तक बर्बर हूण के कबीलों को ध्वस्त कर भारतीय संस्कृति एवं विकशित राष्ट्र चिकित्सालय, विद्यालय, रस्ता, नगर निर्माण इत्यादि कई तरह के उन्नत कार्य किये। रोम से लेकर गेर्मानिया वर्त्तमान जर्मन तक अत्याचार के काले बादल हटा दिए एवं भारतीय राजपूत सम्राट के हाथो एक नवयुग का आरंभ हुआ। शालिवाहन के इस शासन काल को शालिवाहन युग के नाम से भी जाना जाता है।

Bharatiya Eras, The kings of Agni Vamsa, by Kota Venkatachalam Chapter 12)

टाइटस ग्रीक-रोम के राजा था। टाइटस ने त्रिविष्टप पर आक्रमण किया था। सन ८० ई. ग्रीक-रोम के इस शासक ने ३०० घुड़सवार सैनिक ६०,००० पैदल सैनिको के साथ आक्रमण किया था। भारतीय पुराणों में ग्रीक-रोम निवासीयों को गुरूंड कहाँ गया है। त्रिविष्टप पर सम्राट शालिवाहन मात्र १२००० की सेना के साथ तैयार थे। जय महाकाल नामक युध्द घोषणा के साथ परमार सेना का आक्रमण रोम आक्रमणकारियों पर तुट पड़ा। सन ८० ई. से रोम आक्रमणकारियों का भारत पर आक्रमण निरंतरता के साथ होता रहा पर कभी आर्यावर्त को परतंत्र नहीं कर पाया।

शालिवाहन से पराजित होने के पश्चात रोम साम्राज्य का ५२% हिस्सा शालिवाहन ने हिन्दू राज्य में सम्मिलित कर लिया था। इस युद्ध का ऐतिहासिक वर्णन Cassius Dio, Roman History LXV.15 में किया गया हैं ।

सम्राट शालिवाहन परमार ने अपना दृतिय महत्वपूर्ण युद्ध सन 82 इ.में दोमिटियन Domitian के विरुद्ध लड़ा था। इस युध्द में शालिवाहन परमार ने दोमिटियन को परास्त किया था। जो की रोम एवं फ्रैंको वर्तमान में फ्रांस का राजा था। जिसने स्पेन तक अपनी साम्राज्य विस्तार किया था। इस युद्ध का वर्णन Heinrich Friedrich Theodor ने अपनी पुस्तक" A history of German” में लिखा था एवं Previte Orton द्वारा लिखा गया पुस्तक" The Shorter Medieval History” vol:1 पृष्ठ-: १५१ एवं Suetonius, The Lives of Twelve Caesars, Life of Vespasian 9 में आपको मिलेगा सम्राट शालिवाहन परमार के साथ कुल तीन युद्ध हुए थे। प्रथम दो युद्धों में भारतवर्ष पर आक्रमण करने के कारण शालिवाहन परमार के हाथों हाकर वापस लौटना पड़ा | Suetonius, The Lives of Twelve Caesars.Life of Vespasiun 9.

तीसरे युद्ध में शालिवाहन ने फ्रैंको पर आक्रमण कर दोमिटियन Domitian को हराकर पूर्वी फ्रान्किया वर्तमान जर्मन और स्पेन पे अधिकाकर लिया था । दोमिटियन ने शालिवाहन शासित राज्य परतंगण पर आक्रमण किया था। यह राज्य वर्तमान में भारत चीन सीमांत क्षेत्र में मानसरोवर के पास उपस्थित हैं। दोमिटियन की सेना ८०,००० की थी तथा घुड़सवाऔर पैदल सैनिक २५-२७,००० थे। शालिवाहन की सेना ३०००० से ४० हज़ार की थी। शालिवाहन की युद्धकौशल, रणनीति कौशल के समक्ष यवन पीछे हटने पर मजबूर हो गये थे। दोमिटियन की लाखों की सेना के साथ आये थे। पर इस ऐतिहासिक युद्ध को जिक्र विदेश इतिहासकारों ने" war of blood” के नाम से घोषित किया क्योंकी यह भयंकर युद्ध इतिहास में सायद ही दोबारा हुआ होगा। १ लाख से अधिक सेना के साथ आक्रमण करनेवाले दोमिटियन रोम में मात्र १२०० सैनिक के साथ वापस लौटा था । इसके बाद शालिवाहन ने मात्र ४५,००० सेना के साथ स्पेन पर आक्रमण कर दिया था। स्पेन के राजा दोमिटियन युद्ध करने का साहस नहीं कर पाया और समझौता कर दिया। स्पेन का आधा राज्य और पूर्वी फ्रान्किया पर भी शालिवाहन ने अपना भगवा ध्वज लहरा दिया था । इस तरह शालिवाहन ने स्पेन पर विजय प्राप्त कीं।

ट्राजन Trajan मेसोपोटामिया एवं अर्मेनिया के ज़ार राजा थे। जिन्होंने भारतवर्ष पर सन ११४ ई. में आक्रमण किया था। स्वीडिश एवं स्कॅन्डिनेवियन Scandinavian जर्नल में लिखा गया हैं कि शालिवाहन शासित राज्य विदेह जो नेपाल की राजधानी जनकपुर का हिस्सा हैं, वहा आक्रमण किया था। ज़ार को पराजय देखनी पड़ी थी। शालिवाहन के पास ६७ रणनीति में कुशल, शस्त्र विद्या में पारंगत, युद्ध व्यू रचने में भी पारंगत सेनापतियों की टोली थी। सेनापति अह्वान परमार के साथ शालिवाहन ने १५००० की सेना के साथ ज़ार ट्राजन को पराजित कर दिया। स्कॅन्डिनेवियन पर शालिवाहन ने सनातन वैदिक राज की स्थापना कि एवं ज़ार के साथ लड़े गए युद्ध, मेरु युद्ध जो मेसोपोटामिया में लड़ा गया था उसमें शालिवाहन ने मेसोपोटामिया की ३ चौथाई राज्य जीत लिया था ।

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शालिवाहन के परमार साम्राज्य पर ई.125 में पर्शिया के शासक हद्रियन ने आक्रमण किया था। उसका लक्ष्य था - भारतवर्ष के अमुल्य धन संपत्ति की लूट करना और परमार शालिवाहन को बंदि बनाकर अपना गुलाम बनाकर आर्यावर्त पर अपना अधिपत्य प्राप्त करना। पर्शिया के राजा हद्रियन की नज़र भारतवर्ष की धन दौलत पर पड़ी थी। सम्राट शालिवाहन परमार को गुप्तचर शिव सिंह से सुचना मिली की हद्रियन अपने लश्कर के साथ निकल चूका है। हद्रियन ने सिंघल्द्वीप श्रीलंका पर आक्रमण किया था। तीस से चालीस हज़ार पैदल लश्कर ९,००० घुड़सवाऔर ग्यारह से बारह हज़ार की तादात पर धनुर्धारी लश्कर की फ़ौज थी। शालिवाहन परमार ने बाज़ व्यूह का उपयोग किया था। सम्राट शालिवाहन ने २१नये युद्ध व्यूह की रचना कि। जिससे पलक जपकते ही दुश्मन दल को नेस्तनाबूद कर सकते थे। इसलिए सम्राट शालिवाहन की सात से नौ हज़ार की घुड़सवार फ़ौज और विश्व के श्रेष्ठ धनुर्धरों सैनिको ने हद्रियन को धूल चटा दिया था।

==राजवंश==

परमार प्रमार या पोवार अग्निवंश के अत्यंत शक्तिशाली शासक थे। "पृथ्वी पँवारो की है ऐसी कहावत यह दर्शाती है कि उनका प्रभुत्व व्यापक था।विक्रमादित्य के समय और शकारि शालिवाहन के समय इस वंश ने चक्रवर्ती राज किया था। उनकी 35 शाखाएं थीं।परमार राजवंश की सूची ईसा पूर्व में उनके शासनकाल सहित -

*1.परमार392-386

*2.महामारा386-383

*3. देवापी383-380

*4. देवदत्ता380-377

*5. 377-182 शकों से पराजित होकर परमार उजैन को छोड़कर श्रीशैलाम चलें गए। अप्रभावी और अनामिक राजा पुराणों में इनके नामों का कोई जीक्र नहीं किया गया है क्योंकि यह शासन में नहीं थे।

*6. गंधर्वसेन182-132 सर्वप्रथम शकों को परास्त किया। अम्बावतीउज्जैन को मुक्त करवाया। शासनकाल:50 वर्ष।गंधर्वसेन के बड़े पुत्र सम्राट भर्तृहरि थे तथा उनके अनुज विक्रमसेन परमार थे।विक्रम सेन का जन्म कलियुग वर्ष 3000 संवत् को हुआ था।

*7.शंखराज132-102 सम्राट गंधर्वसेन अपने ज्येष्ठ पुत्र शंखराज को राजपाठ सौंप कर सन्यास लेकर तप करने चले गये थे। शंखराज ने ३० वर्ष तक शासन किया। 132-102 ईस्वी पूर्व तक शंखराज की अकाल मृत्यु होने के पश्चात महाराज गंधर्वसेन को राज्य की सुरक्षा के लिए तप छोड़कर फिरसे राजपाठ संभालना पड़ा। 102-82 ईस्वी पूर्व तक गंधर्वसेन परमार ने शासन किया। अपने पुत्र विक्रमादित्य को 82 ईस्वीपूर्व में राजपाठ सौंपकर सन्यास ले लिए एवं तपस्या करने चले गये ।

*8. सम्राट विक्रमादित्य परमार 82ई.पू-19ई. ने संपुर्ण विश्व पर 100 वर्ष शासन किया।

*9. देवभक्त 19-29ई. मात्र 10 वर्ष तक शासन किया था।

*10. 29-78 ई. यह अनामिक राजाओं का शासन काल रहा। पुराणों में इनका नाम दर्ज नहीं है।

*11. चक्रवर्ती शालिवाहन परमार 78-138ई. 60 वर्ष तक शासन किये थे।

*12-20).138-638ई. सलीहोत्र, सालिवर्धन, सुहोत्र, हावीहोत्र, इन्द्रपाल, मलायावन, सम्भुदत्ता, भौमाराज,वत्सराज इन सभी राजाओ ने कुल मिलाकर ५० 50 वर्ष १३८-६३८ ईस्वी तक शासन किया।

*21.भोजराज परमार 638-693-94ई. 56 वर्ष तक शासन किया था।

*22-28). सम्भुदत्ता, बिन्दुपल, राजापाल माहिनारा, सोमवर्मा, कामवर्मा, भूमिपाल अथवा वीरसिंह ३००300 वर्ष तक शासन किये थे ६९३-९९३-९४ 693-993-94 तक ।

*29-30).रंगापाल,कल्पसिंह २०० 200 वर्ष तक शासन किये थे ९९३-११९३-९४ 993-1193-94 ईस्वी तक ।

*31) गंगासिंह परमार राजवंश का अंतिम गंगा सिंह परमार थे।

                                     
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शब्दकोश

अनुवाद

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पुल्लिंग. 1. प्राचीन काल में शकद्वीप में रहनेवाली एक समृद्ध जाति. 2. तातार देश के निवासी, तातारी. 3. शकों का एक राजा शालिवाहन. मूल. सं॰. हिंदी में शक की मुख्य परिभाषा. शकशक. शक. पुल्लिंग. 1. संदेह, शंका जैसे पुलिस को इस बदमाश पर पुनः शक हो. Nahay khay today. हिन्दू नववर्ष के पहले दिन शालिवाहन शक की शुरुआत इसी दिन से होती है। शालिवाहन राजा ने शंक पर विजय हासिल की और तभी से शालिवाहन कालगणना की शुरुआत हुई। शालिवाहन राजा की सत्ता आंध्रप्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र में होने से यह त्योहार.


Jitiya Vrat 2019 Know All About Date Time And Importance Puja.

सिंहासन बत्तीसी सिंहासन द्वात्रिंशिका परवर्ती राजा भोज परमार को 32 पुतलियों से जड़ा स्वर्ण सिंहासन प्राप्त हुआ। विक्रमादित्य की मृत्यु के पश्चात शकों के उपद्रव पुनः प्रारंभ हो गये तब उन्ही के प्रपोत्र राजा शालिवाहन ने शकों को. Gudi Padwa 2019: गुड़ी पड़वा के ये 10 उपाय दिलाएंगे. चर्चित किताब के अनुसार, इस्राइल के राजा सुलेमान के समय से ही भारत और इस्राइल के बीच घनिष्ठ व्यापार संबंध थे। जिसमें जिक्र है कि कुषाण राजा शालिवाहन की मुलाकात हिमालय क्षेत्र में सुनहरे बालों वाले एक ऐसे ऋषि से होती. सासाराम बिहार प्रान्त का एक शहर BiharStory. शकारि शालिवाहन परमार के चलाए संवत् को शक संवत् नाम से आज जाना जाता है। शालिवाहन संवत् को ही शालिवाहन परमार का ऐतिहासिक काल शालिवाहन युग माना जाता है। शालिवाहन परमार का शासनकाल लगभग ई. 78 से आरंभ होता है। यादव राजा की तासगाव. राजा शालिनीवाहन Everybody Bios &. महाकालेश्वर के. आशीर्वाद से उसने गर्भ धारण किया। फलत: महा तेजस्वी शालिवाहन का. जन्म हुआ। एक दूसरी किंवदंती के अनुसार नर्मदा तट पर सुधी नामधारी. एक बाक्षण ऋषि का आश्म था। राजा विक्रमादित्य ने एक दिन राजमद. में आकर मुनि का अपमान कर.


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय.

जनश्रुति के अनुसार हरसू पाण्डेय सकरवार वंशी चैनपुर के राजा शालिवाहन के प्रधान मंत्री तथा राजपुरोहित थे। राजा द्वारा किये गए अपमान से क्षुव्ध होकर उन्होंने आमरण अनशन कर किले में हीं प्राण त्याग दिये। यह घटना जनवरी 1428 ई० में. Bihar News In Hindi Sasaram News jitiya mothers kept nirjala fast. इनमें प्रसिद्ध राजा शालिवाहन ने कोट नामक एक नगर बसाया था और उसे अपनी राजधानी बनाया था। मुंडावर प्रान्त के सिंहाली ग्राम में उपरोक्त नगर के प्राचीन खण्डरों के चिन्ह अब भी पाए जाते हैं। इसी शालिवाहन ने इस नगर से लगभग २५ मील पश्चिम की. Religious Places in Uttarakhand उत्तराखंड के प्रमुख. भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय २ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण प्रतिसर्गपर्व तृतीय भाग अध्याय – २ राजा शालिवाहन तथा ईशामसीह की कथा. सूतजीने कहा ऋषियों!. अनटाइटल्ड Shodhganga. इसके साथ हीं तालाब या नदी के किनारे शालिवाहन राजा के पुत्र धर्मात्मा जीमूतवाहन की कुशा से निर्मित प्रतिमा को शुद्ध जल या मिट्टी के पात्र में स्थापित कर अरियार बरियार को साक्षी मानकर उन्हें पीला व लाल रंग की रूई से. Dictionary भारतवाणी Part 1090. जो लोग बच गये थे, वे भारतीय आर्यों और विशेषतः ब्राह्मणों से मिलकर शाकद्वीपी ब्राह्मण कहलाने लगे थे। राजा शालिवाहन का एक नाम। ४. बहुत बड़ा या मारके का युद्ध और उसमें होनेवाली विजय। पुं० बहुत कुछ अनुमान पर आधारित ऐसी धारणा कि अमुक. भारत पर आक्रमण करने वाले आखिर शक कौन थे? जानिए. इस समय उत्तरी भारत में राजा शालिवाहन का राज्य था। फिलिस्तीन इजराइल की दुखद घटनाओं के कारण दुबारा जब वे भारत आये तब यहीं कश्मीर में बस गये और मृत्युपर्यंत यहीं रहे। अपनी उक्त कृति में हुसैन ने ईसा के कश्मीर में बस गये और मृत्युपर्यंत.





Vikram Samvat 2076 नव संवत्सर का राजा Oneindia Hindi.

शालिवाहन भारत के एक अनुश्रुत राजा थे। राजा शालिवाहन के पिता जी को उनके ही सामंतों ने धोका दिया जिस कारण उनका. शक संवत क्या हैं, इसकी शुरुआत कब व किसने की What is. शक काल शक संवत का निर्देश क्षण या शककाल विक्रमादित्य के 135 वर्ष बाद पडता है. दिखा रहा है पृष्ठ 1. मिला 1 वाक्यांश मिलान वाक्य शक संवत.0 एमएस में मिला है.अनुवाद यादें मानव द्वारा बनागई हैं, लेकिन कंप्यूटर, जो गलतियों के कारण हो सकता. Rajasthan Alwar Bhogolik, Etihasik Pristhbhumi Sthapana IGNCA. विक्रमादित्य के पौत्र शालिवाहन का नाम गायब कर एक काल्पनिशक राजा कनिष्क खोजा गया जो ७८ ई में शक आरम्भ करने वाला विदेशी नहीं था। राजतरंगिणी के अनुसार कनिष्क कश्मीर के गोनन्द वंश का ४३वां राजा था तथा शालिवाहन शक.


शक in English शक English translation शक meaning in English.

तालाब के निकट एक पाकड़ की डाल लाकर खड़ा कर शालिवाहन राजा के पुत्र धमाज़्त्मा जीमूतवाहन की कुश निर्मित मूर्ति जल या मिट्टी के पात्र में स्थापित कर पीली और लाल रूई से उसे अलंकृत कर धूप, दीप, अक्षत, फूल, माला एवं विविध प्रकार के नैवेद्यों. Jaisalmer News: रेगिस्तान के लंबे कद के राजा महारावल. मनागई बाबा हरसू ब्रह्म की जयंती. प्रखण्ड के पंडित के रामपुर स्थित हरसू ब्रह्म बाबा के मंदिर में रविवार को उनकी जयंती धूमधाम से मनाई गई। हर वर्ष राजा शालिवाहन के गुरु महापंडित हरसू ब्रह्म बाबा की जयंती माघ शुक्ल पक्ष के नवमी तिथि को. Hindi information article Emperor Vikramaditya उज्जयिनी. वर्षु, सालु, सनु, सन् सम्राट विक्रमादित्य जे समय खां हलियल वर्ष – गणना राजा शालिवाहन जे समय खां मञी वेंदड़ वर्ष.


भविष्य पुराण और इस्लाम!!!!! mymandir धार्मिक सोशल.

नाम की उत्पत्ति सिरमौर जिले के नामकरण के बारे में काफी कुछ अनुमान हैं। एक मत के अनुसार यह जिला पहाड़ी रियासतों मे अपनी अहम् भुमिका रखने के कारण सभी जिलो का सिर का ताज था जिस कारण सिरमौर कहा गया था। एक मत यह भी हैं कि राजा शालिवाहन. शक shak meaning in English and Hindi, Meaning of शक in English. शक जाति के एक राजा शालिवाहन द्वारा चलाया गया एक संवत्. View word No image found. शकच्छद. noun. दालचीनी की जाति के एक पेड़ का पत्ता जो खाद्य मसाले के रूप में उपयोग होता है. View word No image found. शकट. noun. कृष्ण को मारने के लिए कंस द्वारा भेजा. शक Meaning in Hindi शक का हिंदी में मतलब Shak GyanApp. राजा शालिवाहन ने हिमालय की पहाड़ियों में एक तपस्यालीन पुरुष। को देखा। तब इस पुरुष ने बताया कि मेरा नाम ईसा मसीह है। और उसे एक कुंवारी मां ने जन्म दिया है। जहां बुराइयों का अंत नहीं है। मैं उस क्षेत्र से आया हूं। वहां पर मसीहा.


शक अंग्रेजी हिंदी शब्दकोश.

स्मृति में शाके शालिवाहन सम्वत चलाया । यह शालिवाहन कौन था? ऐतिहासिक पुस्तकों में. विक्रमादित्य नामधारी राजा का शालिवाहन नामधारी राजा से पराजित होना मिलता नहीं है। शालिवाहन के जन्म के बारे में वैसवाड़ा की किंवदंतियाँ भी. गुड़ी पड़वा 2030 तिथि, पूजा शुभ मुहूर्त, इतिहास और. रोहतास गढ़ के नाम पर ही इस क्षेत्र का नामकरण रोहतास होता रहा है। कभी भारत के बादशाह शाहजहां भी इस किले में अपनी बेगम के साथ रहे हैं। मुगल साम्राज्य से पूर्व भी 1494 ई. में दिल्ली के सुल्तान सिकंदर लोदी ने राजा शालिवाहन को चैनपुर व रोहतास. Dictionary भारतवाणी Part 23863. चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 6 अप्रैल शनिवार से नव संवत्सर विक्रम संवत 2076 और शालिवाहन शक संवत 1941 प्रारंभ हो रहा है। आचार्य वराहमिहिर के नव संवत्सर का राजा शनि है इसलिए प्रजा को कई तरह के कष्टों से गुजरना होगा। परेशानी उन्हें ही. Jaisalmer News: कैशियर की बाइक को टक्कर मार अज्ञात. ५. पुराणानुसार सात द्वीपों में से एक द्वीप । विशेष दे॰ ​शाकद्वीप । ६. एक प्राचीन जाती । विशेष दे॰ शक को॰ । ७. शक राजा शालिवाहन का संवत् । ८. शक्ति । बल । ताकत । शाक २ वि॰ १.


नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से होता है क्यों?.

जगेश्वर में इन मंदिर समूहों का निर्माण किसने करवाया इस सवाल का जबाब खोजने पर भी नही मिलता किन्तु इन मंदिरों के जीर्णोद्धार का काम राजा शालिवाहन द्वारा अपने शासन काल में करवाया गया था.पौराणिक काल में भारत में कौसल,मिथिला. भविष्य पुराण में उपलब्ध हैं वर्तमान युग की. शैक्षणिक भ्रमण की पहली पसंद बना जैसलमेर. जैसलमेर 31 दिन पहले. image. रजत कुमार व्यास. रेगिस्तान के लंबे कद के राजा महारावल शालिवाहन सिंह द्वितीय. जैसलमेर 16 घंटे पहलेे. image. रजत कुमार व्यास. जैसलमेर का विलुप्त होता प्राचीन. गौतमीपुत्र सातकर्णि शासक. ऐसा कहा जाता है कि जब राजा शालिवाहन ने साकों को हराया और पैठण में वापस आए, तो लोगों ने गुड़ी फहराई क्योंकि इसे जीत का प्रतीक माना जाता है। कुछ लोग छत्रपति शिवाजी की विजय के उपलक्ष्य में गुड़ी फहराते हैं। कुछ लोगों ने.


शक हिंदी में परिभाषा Oxford Living Dictionaries.

कुमारपालन. राजा शालिवाहन. कुमारभृत्या. छोटे छोटे बच्चों की देखरेख. कुमारभृत्या. गर्भावस्था में स्त्री की देखरेख,. Jivitputrika Vow पुत्र कामना व पुत्री की लम्बी आयु के. शालिवाहन राजा ने शंक पर विजय हासिल की और तभी से शालिवाहन कालगणना की शुरुआत हुई। शालिवाहन राजा की सत्ता आंध्रप्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र में होने से यह त्योहार बड़े धूमधाम से लेकिन अपनी अपनी तरह से मनाया जाता है।. शालिवाहन नाम का अर्थ या मतलब shalivahan Zealthy. मुगल साम्राज्य से पूर्व भी 1494 ई. में दिल्ली के सुल्तान सिकंदर लोदी ने राजा शालिवाहन को चैनपुर व रोहतास का राज्य सौंपा था। सर्वप्रथम 1764 ई. में मीर कासिम को बक्सर युद्ध में अंग्रेजों से पराजय के बाद यह क्षेत्र अंग्रेजों के.





कछवाहे राजपुतों की सच्चाई ब्रह्म्क्षत्रिय पंडुई.

राजा शालिवाहन ने इन्हें शरण दीं थीं. वैदिक सनातनी चतुर वर्ण आपस में परस्पर हैं और पुर्ण हैं लेकिन मर्यादा अपनी अपनी है. इसी मर्यादा के रक्षण हेतु हमने कच्छवाहे राजपुतों को उजागर किया है. क्युंकि 1200 वर्षो की गुलामी में हमें भर्ष्ट करने. Himachal Pradesh GK Himachal GK in Hindi 4 HPGK The. अल्मोड़ा उत्तराखंड राज्य का एक पहाड़ी जिला है अल्मोड़ा की स्थापना राजा बालो कल्याण चंद III ने 1558 ई0 में की थी! जिसको सन 1892 को यह जटागंगा नदी के किनारे बसा है इसका निर्माण कत्यूर राजा शालिवाहन देव ने 8वी सदी में कराया!​इसके अन्दर. Bhartiya Varsh Religion Facts And Science. आठवीं से दसवीं शती में निर्मित इन कलात्मक मंदिरों का निर्माण कत्यूरी राजा शालिवाहन देव ने कराया था। यहां जागनाथ. इतिहास ज़िला सिरमौर. हिमाचल प्रदेश सरकार भारत. राजा शालिवाहन बैस राजा शालिवाहन बैस जिसे कभी कभी गौतमीपुत्र शताकर्णी के रूप में भी जाना जाता है को शालिवाहन.


BBNEWS अनब्याही माताएं.

सौ वर्ष पूर्व भारत के कुछ भागो पर अधिकार करके लगभग दो सौ वर्ष तक राज्य किया। कनिष्शक जातीय राजा था । राजा शालिवाहन को चलाया हुआ सवत् जो ईसा के ७८ वर्ष पश्चात् आरभ हुआ था। You might also like. literature. संस्कृत लोकोक्ति कोश Sanskrit Lokokti Kosh. Wordnet सर्च Wordnet Search. पारसी राजा मिथिदातस द्वितीय 123 88 ईपू ने शकों के आक्रमणों विक्रमादित्य के बाद लगभग 135 साल बाद राजा शालिवाहन. शालिवाहन भारत के एक अनुश्रुत राजा थे। राजा. एक मत यह भी हैं कि राजा शालिवाहन द्वितीय के पौत्र राजा रसालू के पुत्र सिरमौर के नाम पर इस जिले का नाम सिरमौर पड़ा। पहाड़ी बोली के सिरमौरी शब्द का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि लोग आज भी इसे ठेठ पहाड़ी में सरमऊर बोलते है. अपने भीतर की आग को न बुझने दें कभी Webdunia Hindi. शालिवाहन शालिवाहन राजा, शालिवाहन जिसे कभी कभी गौतमीपुत्र शताकर्णी के रूप में भी जाना जाता है को शालिवाहन शक के शुभारम्भ का श्रेय दिया जाता है जब उसने वर्ष 78 में उजयिनी के नरेश विक्रमादित्य को युद्ध मे हराया था और इस युद्ध की.


क्या सचमुच ईसा कभी भारत आए थे? Akhandjyoti December.

जो लोग बच गये थे, वे भारतीय आर्यों और विशेषतः ब्राह्मणों से मिलकर शाकद्वीपी ब्राह्मण कहलाने लगे थे। राजा शालिवाहन का एक नाम। हुत बड़ा या मारके का युद्ध और उसमें होनेवाली विजय। अ० बहुत कुछ अनुमान पर आधारित ऐसी धारणा कि अमुक काम. गुड़ी पड़वा विशेष गुड़ी बनाकर समझें अपनी देह और. शालिवाहन राजा के पुत्र धर्मात्मा जीमूतवाहन की कुशनिर्मित मूर्ति जल या मिट्टी के पात्र में स्थापित कर पीली और लाल रुई से अलंकृत करे तथा धूप, दीप, अक्षत, फूल माला एवं विविध प्रकार के नैवेद्यों से पूजन करें। मिट्टी तथा गाय.


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