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ⓘ महाराजा कुमारपाल भड़ाना II. कुमारपाल द्वितीय भड़ाना राजवंश के पांचवे और अंतिम शासक थे। सोहन पाल के पश्चात् कुमारपाल भड़ाना देश की गद्दी पर बैठा। उसके शासनकाल मे ..


                                     

ⓘ महाराजा कुमारपाल भड़ाना II

कुमारपाल द्वितीय भड़ाना राजवंश के पांचवे और अंतिम शासक थे। सोहन पाल के पश्चात् कुमारपाल भड़ाना देश की गद्दी पर बैठा। उसके शासनकाल में सन् 1192 ई0 में मोहम्मद ग़ोरी ने भड़ाना राज्य पर आक्रमण किया और त्रिभुवन नगरी को जीत लिया। इस आक्रमण से भड़ानक देश का पतन हो गया और कुछ समय पश्चात् हम बयाना को दिल्ली सल्तनत के अंग के रूप में देखते हैं। भड़ाना राज्य का यदि मूल्यांकन किया जाये तो हम कह सकते हैं कि यह एक विस्तृत राज्य था जो कि दिल्ली के दक्षिण में अलवर, भरतपुर, मथुरा, करौली एवं धौलपुर क्षेत्र में फैला हुआ था। स्कन्द पुराण के अनुसार इसमें 1.25.000ग्राम थे। इस राज्य का शासक महाराजाधिराज की उपाधि धारण करता था। भड़ानक राज्य की गणना समकालीन शक्तिशाली राज्यों से की जा सकती है। जैन विद्वान ने भड़ानों की शक्तिशाली गज सेना की प्रशंसा की है। भड़ानक राज्य दो शताब्दियों तक स्थिर रहा और उसने तत्कालीन भारतीय राजनीति को प्रचुर मात्रा में प्रभावित किया।

भड़ानक या भड़ाना राज्य के पतन हो जाने पर भी भड़ानकों की शक्ति पूरी तरह समाप्त नहीं हुई और वो आने वाले समय में भी अपने साहस और बहादुरी की पहचान बनाये रहे। बारहवीं शताब्दी के अन्त में तराईन के द्वितीय युद्ध में चौहानों की तुर्कों से हार के फलस्वरूप उत्तर भारत में तुर्कों की सल्तनत की स्थापना हुई। तुर्क मध्य एशिया के निवासी थे और भारत में उनका शासन एक विदेशी शासन था। इस विदेशी शासन के प्रति भारतीयों ने अनेक विद्रोह किये। भड़ानकों अथवा भड़ानों ने भी संगठित होकर दो बार विदेशी सल्तनत का विरोध किया। समकालीन मुस्लिम इतिहासकारों के अनुसार सुल्तान बलबन 1246-84 ई0 के शासनकाल में दिल्ली के समीप मेवातियों और भड़ानकों ने जोरदार विद्रोह किया था। बलबन ने बड़ी निर्दयता एवं क्रूरता से इस विद्रोह का दमन किया, हजारों मेवाती और भड़ाने मारे गए। आज भी दिल्ली के दक्षिण में फरीदाबाद से लेकर भरतपुर तक मुस्लिम मेव भड़ाने गूजरों की आबादी बहुसंख्या में है।

फरीदाबाद के भड़ानकों ने सुल्तान शेरशाह सूरी 1540-45ई0 के शासन काल में दूसरी बार सशस्त्र विद्रोह किया। इस बार विद्रोह की कमान स्वयं भड़ानों के हाथों में थी। दिल्ली की सीमा के निकट फरीदाबाद जिले के पाली और पाखल ग्रामों के भड़ानों ने इस विद्रोह में प्रमुख भूमिका निभाई। पाली और पाखल के भड़ानों ने मजबूत गढियों का निर्माण कर अपने सैन्य संगठन को शक्तिशाली बना लिया था। भड़ानकों का साहस इतना बढ़ गया था कि उन्होंने दिल्ली के दरवाजों तक हमले किये। जिस समय शेरशाह सूरी दिल्ली की किले बन्दी कर उत्तर भारत में अपने पैर जमा रहा था उस समय भड़ानकों ने उसे बहुत परेशान किया। एक बार भड़ानकों ने शेरशाह के सैन्य शिविपर छापा मार हमला बोल कर उसके हाथियों को छीन लिया और इन हाथियों को अरावली पहाडि़यों में छिपा दिया। जहाँ इन हाथियों को छिपाया गया था वह स्थान आज भी हथवाला के नाम से जाना जाता है। भड़ानकों में हाथियों के प्रति आसक्ति शायद उनकी गज सेना की परम्परा की देन थी। भड़ानकों के बढ़ते साहस ने सुल्तान को विचलित कर दिया। भड़ाना अपना खोया हुआ वैभव पाना चाहते थे। विद्रोह इतना शक्तिशाली था कि सुल्तान शेरशाह सूरी ने उसकी गम्भीरता को समझते हुए स्वयं शाही सेना की कमान सम्भाली और पाली और पारवल पर हमला बोल दिया। भड़ाने वीरता और साहस से लड़े परन्तु शाही सेना बहुत बड़ी और बेहतर रूप से संगठित थी, उसके पास तोपें थीं। अन्त में तोपों की सहायता से गढि़या गिरा दी गई। हजारों भड़ाने मारे गए। आर0वी0 रसैल ने इस विषय में लिखा है The Gurjars of Pali and Pahal became exceedingly audacious while Sher Shah was fortifying Delhi and he marched to the hills and expelled them so that not a vestige was left

                                     
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शब्दकोश

अनुवाद

Gurjar Samrat Mihir Bhoj पोस्ट Facebook.

इस समय भड़ाना देश पर कुमारपाल प्रथम अथवा उसके उत्तराधिकारी अजयपाल भड़ाना का शासन था। 4 अजयपाल के बाद महाराजा हरिपाल भड़ाना राज्य का उत्तराधिकारी हुआ, एक अभिलेख के अनुसार 1170 ई0 में शासन कर रहा था। 5 6. By Historian Dr.Sushil Bhati under him and he used to govern a broad area. In the second half of 12th century, there were political conflicts of the Chauhan Gurjar dynasty of Shakumbari and. Vinay Pradhan अजयपाल भड़ाना 11 वीं शताब्दी में एक. पूर्वाधिकारी, कुमारपाल भड़ाना प्रथम इस समय भड़ाना देश पर कुमार पाल प्रथम अथवा उसके उत्तराधिकारी अजय पाल का शासन था​। अजयपाल के बाद महाराजा हरिपाल भड़ाना राज्य का उत्तराधिकारी हुआ, एक अभिलेख के अनुसार 1170 ई0 में शासन कर रहा था। page 102 103, Dashrath Sharma. ↑ See his Mohaban Prasasti of the year, V. 1207, Epigraphica India pp. 289ff and II 276ff. ↑ Epigraphica Indica Vol. II page 275. महाराजाधिराज अजयपाल भड़ाना Everybody Bios &. इस समय भड़ाना देश पर कुमार पाल प्रथम अथवा उसके उत्तराधिकारी अजय पाल का शासन था। अजय पाल एक शक्तिशाली एवं सम्प्रभुता सोहन पाल के पश्चात् महाराजा कुमारपाल भड़ाना II द्वितीय भड़ानक देश की गद्दी पर बैठा। वह इस राज्य का अन्तिम शासक था।.

भड़ाना देश Everybody Bios &.

अजयपाल भड़ाना 11 वीं शताब्दी में एक विस्तृत क्षेत्पर शासन करते थे। इनके राज्य की पूर्वी सीमा पर ग्वालियरराज्य तथा पूर्वोत्तर दिशा में कन्नौज राज्य तक थी व अन् य सीमाएँ शाकुम्भरी के चौहान गुर्जरो के राज्य से मिलती थी। 1 यह क्षेत्र.

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