Топ-100 ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 50

ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 50



                                               

दुर्गा

दुर्गा हिन्दुओं की प्रमुख देवी हैं जिन्हें देवी, शक्ति और शाकम्भरी भी कहते हैं। शाक्त सम्प्रदाय की वह मुख्य देवी हैं जिनकी तुलना परम ब्रह्म से की जाती है। दुर्गा को आदि शक्ति, प्रधान प्रकृति, गुणवती माया, बुद्धितत्व की जननी तथा विकार रहित बताया ग ...

                                               

दुर्गा सप्तशती के सिद्ध-मंत्र

दुर्गा सप्तशती के सिद्ध-मंत्र का अर्थ होता है कि वे मंत्र जो माँ के लिये प्रयुक्त किया जाता हो अर्थात मॉ दुर्गा को नमन करते हुए उनके चरणों में अपने आप को समर्पित करते हुए उनके सिद्ध मंत्रो का जाप करना जिससे माँ दुर्गा प्रसन्न होकर अपने भक्तों को ...

                                               

देवर्षि रमानाथ शास्त्री

देवर्षि रमानाथ शास्त्री संस्कृत भाषा के कवि तथा श्रीमद्वल्लभाचार्य द्वारा प्रणीत पुष्टिमार्ग एवं शुद्धाद्वैत दर्शन के विद्वान् थे। उन्होने हिन्दी, ब्रजभाषा तथा संस्कृत में प्रचुर लेखन किया है। वे बाल्यावस्था से ही संस्कृत में कविता करने लग गए थे ...

                                               

देवहूति

देवहूति स्वयंभुव मनु की कन्या और प्रजकी पत् नी एवं भगवान कपिल की माता थी। देवहूति की माता का नाम शतरूपा था। स्वयंभुव मनु एवं शतरूपा के कुल पाँच सन्तानें थीं जिनमें से दो पुत्र प्रियव्रत एवं उत्तानपाद तथा तीन कन्यायें आकूति, देवहूति और प्रसूति थे। ...

                                               

देवासुर संग्राम

भारतीय शास्त्रों के अनुसार यह देवताओ तथा दानवो एवं दैत्यों का आपसी युद्ध है। स्वर्ग के राज्य की प्राप्ति के लिये दानव एवं दैत्य समय पर देवताओं पर आक्रमण करते है। इस युद्ध में कई बार दैत्यों और कई बार देवताओं की विजय होती रही है।देवासुर संग्राम दे ...

                                               

देवीमाहात्म्य

देवीमाहात्म्यम् हिन्दुओं का एक धार्मिक ग्रन्थ है जिसमें देवी दुर्गा की महिषासुर नामक राक्षस के ऊपर विजय का वर्णन है। यह मार्कण्डेय पुराण का अंश है। इसमें ७०० श्लोक होने के कारण इसे दुर्गा सप्तशती भी कहते हैं। इसमें सृष्टि की प्रतीकात्मक व्याख्या ...

                                               

दैनिक पूजा

दैनिक पूजा विधि हिन्दू धर्म की कई उपासना पद्धतियों में से एक है। ये एक दैनिक कर्म है। विभिन्न देवताओं को प्रसन्न करने के लिये कई मन्त्र बताये गये हैं, जो लगभग सभी पुराणों से हैं। वैदिक मन्त्र यज्ञ और हवन के लिये होते हैं। पूजा की रीति इस तरह है: ...

                                               

धनु

धनु वैदिक काल की हिन्दू लम्बाई मापन की इकाई है। एक धनु बराबर होता है दो दण्ड के। पांच धनु से एक रज्जु बनता है। विष्णु पुराण अनुसार 2 धनुष/दण्ड= एक नाड़िका 4 हस्त= एक धनुष या दण्ड

                                               

धनु ग्रह

धनु ग्रह या धनु वैदिक काल की हिन्दू लम्बाई मापन की इकाई है। एक धनु ग्रह बराबर होता है चार अंगुल के। यानि 62 mm से 83 mm; विष्णु पुराण के अनुसार: 4 हस्त= एक धनुष 2 धनुष = एक नाड़िका

                                               

धनु मुष्टि

विष्णु पुराण के अनुसार मानव हस्त परिमाण इस प्रकार हैं:- अंगुष्ठ से दूरी दांये चित्र में देखें अनामिका तक=गोकर्ण कनिष्ठिका तक= वितस्ति = 12 अंगुल तर्जनी तक=प्रदेश मध्यमा तक=नाल वायु ने मनु के अधिकार के अन्तर्गत उपरोक्त समान गणना दी है, जो कि मनु स ...

                                               

धर्मशाला

उन घरों या स्थानों को धर्मशाला कहते हैं जहाँ तीर्थयात्रियों को निःशुल्क या अत्यन्त कम शुल्क पर ठहरने की व्यवस्था होती है। प्राचीन काल से ये भारत में प्रचलित हैं।

                                               

धौम्य

धौम्य नाम के कई व्यक्ति हुए हैं जिनमें एक धर्मशास्त्र के ग्रंथ के लेखक हैं। पर सबसे प्रसिद्ध हैं देवल के छोटे भाई जो पांडवों के कुलपुरोहित थे। ये अयोद ऋषि के पुत्र थे। इसलिये वे बहुधा आयोद धौम्य के नाम से जाने जाते हैं। आज से ५००० वर्ष पूर्व द्वा ...

                                               

ध्रुव मण्डल

हिन्दू धर्म में विष्णु पुराण के अनुसार, कृतक त्रैलोक्य -- भूः, भुवः और स्वः – ये तीनों लोक मिलकर कृतक त्रैलोक्य कहलाते हैं। ध्रुव मण्डल सप्तर्षि मण्डल से एक लाख योजन ऊपर ध्रुव मण्डल है।

                                               

नक्षत्र

आकाश में तारा-समूह को नक्षत्र कहते हैं। साधारणतः यह चन्द्रमा के पथ से जुड़े हैं, पर वास्तव में किसी भी तारा-समूह को नक्षत्र कहना उचित है। ऋग्वेद में एक स्थान पर सूर्य को भी नक्षत्र कहा गया है। अन्य नक्षत्रों में सप्तर्षि और अगस्त्य हैं। नक्षत्र स ...

                                               

नक्षत्र मंडल

यह वर्णन हिन्दू धर्म के विष्णु पुराण के अनुसार वर्णित है।हिन्दू धर्म में विष्णु पुराण के अनुसार, कृतक त्रैलोक्य -- भूः, भुवः और स्वः – ये तीनों लोक मिलकर कृतक त्रैलोक्य कहलाते हैं।

                                               

नटराज

नटराज शिवजी का एक नाम है उस रूप में जिस में वह सबसे उत्तम नर्तक हैं। नटराज शिव का स्वरूप न सिर्फ उनके संपूर्ण काल एवं स्थान को ही दर्शाता है; अपितु यह भी बिना किसी संशय स्थापित करता है कि ब्रह्माण्ड में स्थित सारा जीवन, उनकी गति कंपन तथा ब्रह्माण ...

                                               

नवकलेवर

नवकलेवर अधिकांश जगन्नाथ मंदिरों से जुड़ा एक प्राचीन उत्सव है जब भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा और सुदर्शन की पुरानी मूर्तियों को बदलकर नयी मूर्तियाँ स्थापित की जातीं हैं। नवकलेवर = नव+कलेवर, अर्थात जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा और सुदर्शन पुराना शरीर ...

                                               

नाग स्तोत्र

नाग स्तोत्र नाग देवताओ के नौ अवतारो को सम्बोधन करने के उद्देश्य से रचित है, इस स्तोत्र में विभिन्न नाग देवताओ के नाम के साथ स्तुति कर भक्त नाग देवो को प्रसन्न करता है, क्योंकि यहि वो निम्नलिखित नागो के नाम है जो इस पृथ्वी के भार को अपने मणि पर ग् ...

                                               

नागा साधु

नागा साधु हिन्दू धर्मावलम्बी साधु हैं जो कि नग्न रहने तथा युद्ध कला में माहिर होने के लिये प्रसिद्ध हैं। ये विभिन्न अखाड़ों में रहते हैं जिनकी परम्परा आदिगुरु शंकराचार्य द्वारा की गयी थी।

                                               

नाथ

नाथ सम्प्रदाय भारत में एक शैव धार्मिक पंथ है। इसका संबंध योग और हठयोग पद्धतियों का अनुसरण करने वाले समुदाय से भी है। इसका आरम्भ आदिनाथ शंकर से हुआ माना जाता है। जबकि कुछ लोग इसे मछेंदरनाथ द्वारा स्थापित मानते हैं। इस पंथ के सबसे प्रसिद्द संत गोरख ...

                                               

नामकरण संस्कार

बालक का नाम उसकी पहचान के लिए नहीं रखा जाता। मनोविज्ञान एवं अक्षर-विज्ञान के जानकारों का मत है कि नाम का प्रभाव व्यक्ति के स्थूल-सूक्ष्म व्यक्तित्व पर गहराई से पड़ता रहता है। नाम सोच-समझकर तो रखा ही जाय, उसके साथ नाम रोशन करने वाले गुणों के विकास ...

                                               

नायनमार

हिन्दू धर्म में नयनार भगवान शिव के भक्त सन्त थे। इनका उद्भव मध्यकाल में मुख्यतः दक्षिण भारत के तमिलनाडु में हुआ था। कुल 63 नयनारों ने शैव सिद्धान्तो के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी प्रकार विष्णु के भक्त सन्तों को आलवार कहते हैं। ये सभी ...

                                               

नारायणी

                                               

नाल (इकाई)

विष्णु पुराण के अनुसार मानव हस्त परिमाण इस प्रकार हैं:- अंगुष्ठ से दूरी दांये चित्र में देखें अनामिका तक=गोकर्ण तर्जनी तक=प्रदेश कनिष्ठिका तक= वितस्ति = 12 अंगुल मध्यमा तक=नाल वायु ने मनु के अधिकार के अन्तर्गत उपरोक्त समान गणना दी है, जो कि मनु स ...

                                               

नित्यकर्म

प्रतिदिन किया जानेवाला प्रात्य्ह्रक कर्म नित्यकर्म कहलाता है। इसके अनुसार एक प्रात:काल से दूसरे प्रातःकाल तक शास्त्रोक्त रीति से, दिन-रात के अष्टयामों के आठ यामार्ध कृत्यों यथा- ब्राह्म मुहूर्त में निद्रात्याग, देव, द्विज और ऋषि स्मरण, शौचादि से ...

                                               

निधि

हिन्दू धर्मग्रन्थों के सन्दर्भ में कुबेर के कोष का नाम निधि है जिसमें नौ प्रकार की निधियाँ हैं। ये निधियाँ हैं- महापद्म, पद्म, महाशङ्ख, मकर, कच्छप, कुमुद, कुन्द, नील, खर्व।

                                               

निम्बार्काचार्य

निम्बार्काचार्य भारत के प्रसिद्ध दार्शनिक थे जिन्होने द्वैताद्वैत का दर्शन प्रतिपादित किया। आधुनिक शोधों से इनका समय आदि शंकराचार्य जी से पूर्व सिद्ध होता है, अर्थात ईसापूर्व ५ वीं शती से पहले। किन्तु निम्बार्क सम्प्रदाय का मानना है कि निम्बार्क ...

                                               

नियोग

नियोग, मनुस्मृति में पति द्वारा संतान उत्पन्न होने पर या पति की अकाल मृत्यु की अवस्था में ऐसा उपाय है जिसके अनुसार स्त्री अपने देवर अथवा सम्गोत्री से गर्भाधान करा सकती है। उस में स्त्री की मर्जी होनी जरुरी हैं यदि पति जीवित है तो वह व्यक्ति स्त्र ...

                                               

निर्गुण ब्रह्म

निर्गुण उपासना पद्धति में ईश्वर के निर्गुण रूप की उपासना की जाती है। हिन्दू ग्रंथ में ईश्वर के निर्गुण और सगुण दोनों रूप और उनके उपासकों के बारे में बताया गया है। निर्गुण ब्रह्म ये मानता है कि ईश्वर अनादि, अनन्त है वह न जन्म लेता है न मरता है, इस ...

                                               

नेपाल में हिंदू धर्म

हिंदू धर्म मुख्य, सबसे बड़ा धर्म है। 2011 की नेपाल की जनगणना में, लगभग 81.3 प्रतिशत नेपाली लोगों ने खुद को हिंदुओं के रूप में पहचाना, हालांकि पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिया कि 1981 की जनगणना में हिंदुओं के रूप में माने जाने वाले बहुत से लोग बौद्ध धर् ...

                                               

नेहरा

नेहरा भारत और पाकिस्तान में जाटों का एक गोत्र है। ये राजस्थान, दिल्ली, हरयाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और पाकिस्तान में पाए जाते है। नेहरा की उत्पत्ति वैवस्वत मनु के पुत्र नरिष्यंत से मानी जाती है। पहले ये पाकिस्तान के सिंध प्रान्त में नेहरा पर्वत पर ...

                                               

पंचतीर्थ, पुरी

पंचतीर्थ, जगन्नाथ पुरी में स्थित पाँच स्थान है जहाँ के जल में स्नान करना हिन्दू पवित्र मानते हैं और जगन्नाथ पुरी की तीर्थयात्रा तभी पूर्ण मानी जाती है। ये पाँच स्नानस्थल ये हैं- समुद्र - स्वर्गद्वार अंचल के समुद्र को महोदधि महा+उदधि=महान समुद्र क ...

                                               

पंजाब गौशाला महासंघ

पंजाब गौशाला महासंघ भारत के पंजाब राज्य का एक संगठन है जो पंजाब की ४०४ गौशालाओं का संचालन करता है। यह गायों के कल्याण के लिए, उनकी चिकित्सा के लिए, तथा उनके अच्छे रखरखाव के लिए काम करता है। यह एक अशासकीय संगठन है जिसके अध्यक्ष रोमेश गुप्ता हैं।

                                               

पण्डित लेखराम आर्य

पंडित लेखराम आर्य, आर्य समाज के प्रमुख कार्यकर्ता एवं प्रचारक थे। उन्होने अपना सारा जीवन आर्य समाज के प्रचार प्रसार में लगा दिया। वे अहमदिया मुस्लिम समुदाय के नेता मिर्जा गुलाम अहमद से शास्त्रार्थ एवं उसके दुस्प्रचारों के खण्डन के लिए विशेष रूप स ...

                                               

पद (इकाई)

विष्णु पुराण के अनुसार मानव हस्त परिमाण इस प्रकार हैं:- अंगुष्ठ से दूरी दांये चित्र में देखें मध्यमा तक=नाल तर्जनी तक=प्रदेश अनामिका तक=गोकर्ण कनिष्ठिका तक= वितस्ति = 12 अंगुल वायु ने मनु के अधिकार के अन्तर्गत उपरोक्त समान गणना दी है, जो कि मनु स ...

                                               

परमाणु (इकाई)

विष्णु पुराण के अनुसार मानव हस्त परिमाण इस प्रकार हैं:- अंगुष्ठ से दूरी दांये चित्र में देखें कनिष्ठिका तक= वितस्ति = 12 अंगुल अनामिका तक=गोकर्ण मध्यमा तक=नाल तर्जनी तक=प्रदेश वायु ने मनु के अधिकार के अन्तर्गत उपरोक्त समान गणना दी है, जो कि मनु स ...

                                               

पराशक्ति

पराशक्ति भगवान शिव के तीन पहलुओं में से एक है। इसका अर्थ "सर्वोच्च ऊर्जा" या "श्रेष्ठ शक्ति" है। शैव सिद्धांत के अनुसार जो शैव सम्प्रदाय का हिस्सा है; पराशक्ति सर्वव्यापी, शुद्ध चेतना, सर्वोच्च शक्ति है और समस्त वस्तुओं का मूल पदार्थ है। शैव सम्प ...

                                               

परिक्रमा

भारतीय धर्मों में पवित्र स्थलों के चारो ओर श्रद्धाभाव से चलना परिक्रमा या प्रदक्षिणा कहलाता है। मन्दिर, नदी, पर्वत आदि की परिक्रमा को पुण्यदायी माना गया है। चौरासी कोसी परिक्रमा, पंचकोसी परिक्रमा आदि का विधान है। परिक्रमा की यात्रा पैदल, बस या दू ...

                                               

परिदेश

विष्णु पुराण के अनुसार मानव हस्त परिमाण इस प्रकार हैं:- अंगुष्ठ से दूरी दांये चित्र में देखें मध्यमा तक=नाल अनामिका तक=गोकर्ण कनिष्ठिका तक= वितस्ति = 12 अंगुल तर्जनी तक=प्रदेश वायु ने मनु के अधिकार के अन्तर्गत उपरोक्त समान गणना दी है, जो कि मनु स ...

                                               

परिषद हिन्दू धर्म

                                               

पशुपति मुहर

                                               

पाकिस्तान में हिन्दू धर्म

 लेखक -Govind तिवारी फतेहपुर पाकिस्तान में हिंदु धर्म का अनुसरण करने वाले कुल जनसंख्या के लगभग 2% है। पूर्वतन जनगणना के समय पाकिस्तानी हिंदुओं को जाति 1.6% और अनुसूचित जाति 0.25% में विभाजित किया गया। पाकिस्तान Hindustan se vibhajit 14 अगस्त, ...

                                               

पाञ्चजन्य

पाञ्चजन्य भगवान विष्णु का शंख है। विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण पाञ्चजन्य नामक एक शंख रखते थे ऐसा वर्णन महाभारत में प्राप्त होता है। श्रीमद्भगवद्गीता जो कि महाभारत का अङ्ग है उस में वासुदेव द्वारा कुरुक्षेत्र युद्ध के दौरान इसका इस्तेमाल किया जाना बत ...

                                               

पाणिग्रहण

                                               

पाताल

यह समस्त भूमण्डल पचास करोड़ योजन विस्तार वाला है। इसकी ऊंचाई सत्तर सहस्र योजन है। इसके नीचे सात पाताल नगरियां हैं। ये पाताल लोक इस प्रकार से हैं:- महातल सुतल नितल अतल गभस्तिमान वितल पाताल सुन्दर महलों से युक्त वहां की भूमियां शुक्ल, कृष्ण, अरुण औ ...

                                               

पार्वती

पार्वती हिमनरेश हिमावन तथा मैनावती की पुत्री हैं, तथा भगवान शंकर की पत्नी हैं। उमा, गौरी भी पार्वती के ही नाम हैं। यह प्रकृति स्वरूपा हैं। पार्वती के जन्म का समाचार सुनकर देवर्षि नारद हिमनरेश के घर आये थे। हिमनरेश के पूछने पर देवर्षि नारद ने पार् ...

                                               

पिण्ड

पिण्ड चावल और जौ के आटे, काले तिल तथा घी से निर्मित गोल आकार के होते हैं जो अन्त्येष्टि में तथा श्राद्ध में पितरों को अर्पित किये जाते हैं। पूर्वज पूजा की प्रथा विश्व के अन्य देशों की भाँति बहुत प्राचीन है। यह प्रथा यहाँ वैदिक काल से प्रचलित रही ...

                                               

पितृ पक्ष

आश्विन कृष्ण प्रतिपदा से लेकर अमावस्या पंद्रह दिन पितृपक्ष पितृ = पिता के नाम से विख्यात है। इन पंद्रह दिनों में लोग अपने पितरों पूर्वजों को जल देते हैं तथा उनकी मृत्युतिथि पर पार्वण श्राद्ध करते हैं। पिता-माता आदि पारिवारिक मनुष्यों की मृत्यु के ...

                                               

पितृ विसर्जन अमावस्या

पितृ विसर्जन अमावस्या हिंदुओं का धार्मिक कार्यक्रम है जिसे प्रत्येक घर में श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस दिन हिंदुओं में अपने अग्रजों की मृत्यु के पश्चात् जिन्हें पितृ की संज्ञा दी जाती उनके सम्मान में,उनके प्रति श्रद्धा भाव व्यक्त करने के लिए ...

                                               

पितृपक्ष

पितृ पक्ष या पितरपख, १६ दिन की वह अवधि है जिसमें हिन्दू लोग अपने पितरों को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हैं और उनके लिये पिण्डदान करते हैं। इसे सोलह श्राद्ध, महालय पक्ष, अपर पक्ष आदि नामों से भी जाना जाता है। पूर्वज पूजा की प्रथा विश्व के अन्य देशों ...

शब्दकोश

अनुवाद
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