Топ-100 ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 46

ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 46



                                               

विहार

बौद्ध अनुयायीओं के प्रार्थना स्थल या उपासनास्थल मठों को विहार कहते हैं। विहारों में बुद्ध प्रतिमा होती है। विहार में बौद्ध भिक्षु निवास करते है। उच्च शिक्षा में धार्मिक विषयों के अलावा अन्य विषय भी शामिल थे, और इसका केन्द्र बौद्ध विहार ही था। इनम ...

                                               

शबरपा

शबरपा सिद्ध साहित्य की रचना करने वाले प्रमुख सिद्धों में से एक हैं। इनका जन्म ७८० ई॰ में क्षत्रिय कुल में हुआ था। इन्होंने सरहपा से ज्ञान प्रप्त किया। शबरों की तरह जीवन व्यतीत करने के कारण इन्हें शबरपा कहा जाने लगा। इनकी प्रसिद्ध पुस्तक चर्यापद ह ...

                                               

श्रावस्ती

भारतवर्ष के उत्तर प्रदेश प्रांत के गोंडा-बहराइच जिलों की सीमा पर यह प्रसिद्ध बौद्ध तीर्थ स्थान है। गोंडा-बलरामपुर से १२ मील पश्चिम में आज का सहेत-महेत गाँव ही श्रावस्ती है। प्राचीन काल में यह कौशल देश की दूसरी राजधानी थी। भगवान राम के पुत्र लव ने ...

                                               

श्रीलंका में बौद्ध धर्म

थेरवाद बौद्ध धर्म श्रीलंका की जनसंख्या में 70.2% है। यह श्रीलंका द्वीप तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में इस तरह के बुद्धघोष के रूप में प्रख्यात विद्वानों के उत्पादन और विशाल पाली के सिद्धांतों के संरक्षण में बौद्ध धर्म की शुरूआत के बाद बौद्ध छात्रवृत्त ...

                                               

श्रीवत्स

श्रीवत्स हिन्दू धर्म और बौद्ध धर्म, दोनों के लिए ही मंगलकारी चिह्न है। ब्रह्म पुराण में लक्ष्मी व भगवान विष्णु का क्रीड़ा स्थल द्रोण पर्वत को बताया गया है। इस पुराण में विष्णु के वक्षस्थल पर श्रीवत्स के चिन्ह का वर्णन मिलता है। श्रीवत्स के चिन्ह ...

                                               

श्वेत अश्व मंदिर

श्वेत अश्व विहार चीन के हेनान प्रांत के ल्युओयांग शहर में स्थित है। चीन में सरकार द्वारा संचालित यह बौद्ध विहार चीनी एवं भारतीय संस्कृतियों की संगमस्थली है और सांस्कृतिक मेलजोल की शानदार उपलब्धियों का प्रतीक है। कई भारतीय नेता इस विहार का दर्शन क ...

                                               

षष्ट बौद्ध संगीति

छठी बौद्ध संगीति का आयोजन 1954 में बर्मा के काबाऐ, यगूंन में किया गया था। इसका आयोजन बर्मा की सरकार के संरक्षण के तहत हुआ था और इसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री यूनू द्वारा की गयी थी। संगीति का आयोजन बौद्ध धर्म के 2500 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में कि ...

                                               

संयुक्त निकाय

यह पाँच वर्ग्गो वर्गो और 56 संयुत्तों में विभक्त हैं। पाँच वग्गों में क्रमश: 11, 10, 13, 10 और 12 संयुत्त अध्याय संगृहीत है। इस निकाय में छोटे और बड़े सुत्तों का समावेश है। तदनुसार नामकरण की बात बतागई है। लेकिन विषयवार सुत्तों के वर्गीकरण के अनुस ...

                                               

संस्कृत भाषा में रचित बौद्ध ग्रन्थ

बौद्ध धर्म के धर्मग्रन्थ केवल पालि में ही नहीं हैं बल्कि बहुत बड़ी संख्या में संस्कृत में भी हैं। कुछ ग्रन्थ पालि और संस्कृत के मिश्रित भाषा में भी रचे गये हैं। बुद्धवचनों के अलावा बौद्ध विद्वानों ने दर्शन, न्याय, आदि के ग्रन्थ संस्कृत में लिखे ह ...

                                               

समानता की प्रतिमा

समानता की प्रतिमा या डॉ॰ बाबासाहेब आम्बेडकर स्मारक भारत के प्रथम कानून मंत्री तथा भारतीय संविधान के पिता डॉ॰ भीमराव आम्बेडकर को समर्पित एक प्रस्तावित स्मारक है, जो भारतीय राज्य महाराष्ट्र के मुंबई में स्थित है। यह स्मारक मुंबई के दादर में इंदू मि ...

                                               

सहज

सहज का शाब्दिक अर्थ है - एक साथ उत्पन्न या बिना परिश्रम के प्राकृतिक रूप से उत्पन्न है यह शब्द भारतीय तथा तिब्बती बौद्ध दर्शन में महत्वपूर्ण है। सहज दर्शन का आरम्भ ८वीं शताब्दी में बंगाल में हुआ। यह सहजिया सिद्ध नामक बौद्ध योगियों में प्रचलित था।

                                               

साँची का स्तूप

{{Infobox building | image = Sanchi Stupa from Eastern gate, Madhya Pradesh.jpg | image_caption = साँची का स्तूप | pushpin_map = India#India Madhya Pradesh | pushpin_relief = 1 | pushpin_map_caption = सांची | building_type = स्तूप | location = सा ...

                                               

सारनाथ

सारनाथ, काशी अथवा वाराणसी के १० किलोमीटर पूर्वोत्तर में स्थित प्रमुख बौद्ध तीर्थस्थल है। ज्ञान प्राप्ति के पश्चात भगवान बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश यहीं दिया था जिसे "धर्म चक्र प्रवर्तन" का नाम दिया जाता है और जो बौद्ध मत के प्रचार-प्रसार का आरंभ थ ...

                                               

सुत्तपिटक

सुत्तपिटक बौद्ध धर्म का एक ग्रंथ है। यह ग्रंथ त्रिपिटक के तीन भागों में से एक है। सुत्त पिटक में तर्क और संवादों के रूप में भगवान बुद्ध के सिद्धांतों का संग्रह है। इनमें गद्य संवाद हैं, मुक्तक छन्द हैं तथा छोटी-छोटी प्राचीन कहानियाँ हैं। यह पाँच ...

                                               

स्प्रिंग टैम्पल बुद्ध

स्प्रिंग टैम्पल बुद्ध, वैरोचन बुद्ध की एक सबसे विशालकाय बुद्ध प्रतिमा है, जो कि हेनान के जाओकुन कस्बे में, चीन में स्थित है। यह फ़ोदुशान सीनिक एरिया में, नेश्नल फ़्रीवे नम्बर 311 में स्थित है। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी 182 मीटर के बाद यह विश्व की दुसरी ...

                                               

हिन्दू धर्म में गौतम बुद्ध

गौतम बुद्ध को भी हिन्दुओं के वैष्णव सम्प्रदाय में को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। तथापि हिन्दू ग्रंथों में जिन बुद्ध की चर्चा हुई है उनकी भिन्नता शाक्य मुनि से प्रदर्शित है। "बुद्धोनाम्नाजनसुतः कीकटेषु भविष्यति" श्रीमद्भागवत इस भागवतोक्त श ...

                                               

हीनयान

प्रथम बौद्ध धर्म की दो ही शाखाएं थीं, हीनयान निम्न वर्गगरीबी और महायान उच्च वर्ग अमीरी, हीनयान एक व्‍यक्त वादी धर्म था इसका शाब्दिक अर्थ है निम्‍न मार्ग। यह मार्ग केवल भिुक्षुओं के ही संभव था। हीनयान संप्रदाय के लोग परिवर्तन अथवा सुधार के विरोधी ...

                                               

ह्वेन त्सांग

ह्वेन त्सांग एक प्रसिद्ध चीनी बौद्ध भिक्षु था। वह हर्षवर्द्धन के शासन काल में भारत आया था। वह भारत में 15 वर्षों तक रहा। उसने अपनी पुस्तक सी-यू-की में अपनी यात्रा तथा तत्कालीन भारत का विवरण दिया है। उसके वर्णनों से हर्षकालीन भारत की सामाजिक, आर्थ ...

                                               

१९वें कुशक बकुला रिनपोछे

१९वें कुशक बकुला रिनपोछे कुशक बकुला रिनपोछे के अवतार माने जाते हैं। वे लद्दाख के सर्वाधिक प्रसिद्ध लामाओं में से एक थे। वे भारत के अन्तरराष्ट्रीय राजनयिक भी थे। उन्होने मंगोलिया एवं रूस में बौद्ध धर्म के पुनरुत्थान के लिये उल्लेखनीय योगदान दिया त ...

                                               

आत्मनिवेदन

आत्मनिवेदन भारतीय संस्कृति या इनकी असर से जन्मे हिन्दू, बौद्ध, जैन इत्यादि धर्मो के भक्ति मार्ग का एक प्रकार है। धार्मिक ग्रंथो में नवधा भक्ति का वर्णन किया गया है जिनमे से एक आत्मनिवेदन है। आत्मनिवेदन भक्त के द्वारा अपने जीवन में आनेवाली समस्याए ...

                                               

गोस्वामी गोकुलनाथ

गोस्वामी गोकुलनाथ वल्लभ संप्रदाय की आचार्य परंपरा में वचनामृत पद्धति के यशस्वी प्रचारक के रूप में विख्यात हैं। आप गोस्वामी विट्ठलनाथ के चतुर्थ पुत्र थे। आपका जन्म संवत्‌ 1608, मार्गशीर्ष शुक्ला सप्तमी को प्रयाग के समीप अड़ैल में हुआ था। गोस्वामी ...

                                               

तिरुमंत्रम्

शैव भक्तिसाहित्य दो भागों में विभाजित किया जा सकता है: स्तोत्र ग्रंथ और शास्त्र ग्रंथ। शैव संतों द्वारा रचित भक्ति साहित्य को स्तोत्र ग्रंथ कहते हैं। इनकी संख्या 12 है। शैव धर्म के दार्शनिक आचार्यो द्वारा रचे गए ग्रंथ शास्त्र ग्रंथ कहलाते हैं। इन ...

                                               

पुष्टिमार्ग

भक्ति के क्षेत्र में महापुभु श्रीवल्‍लभाचार्य जी का साधन मार्ग पुष्टिमार्ग कहलाता है। पुष्टिमार्ग के अनुसार सेवा दो प्रकार से होती है - नाम-सेवा और स्‍वरूप-सेवा । स्‍वरूप-सेवा भी तीन प्रकार की होती है -- तनुजा, वित्तजा और मानसी। मानसी सेवा के दो ...

                                               

ब्रजबुलि

ब्रजबुलि उस काव्यभाषा का नाम है जिसका उपयोग उत्तर भारत के पूर्वी प्रदेशों अर्थात् मिथिला, बंगाल, आसाम तथा उड़ीसा के भक्त कवि प्रधान रूप से कृष्ण की लीलाओं के वर्णन के लिए करते रहे हैं। नेपाल में भी ब्रजबुलि में लिखे कुछ काव्य तथा नाटकग्रंथ मिले ह ...

                                               

भक्ति काव्य

भारतीय सामाजिक सांस्कृतिक और साहित्यिक इतिहास के मध्यकाल की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता को भक्ति आन्दोलन के रूप में पहचाना जा सकता है। साहित्य के क्षेत्र में यह भक्ति काव्य के विराट रस श्रोत के रूप में प्रकट हुआ।

                                               

भक्तिरसशास्त्र (वैष्णव)

महाप्रभु चैतन्य की प्रेरणा से वृंदावन के षट्गोस्वामियों में अन्यतम रूपगोस्वामी ने वैष्णव संप्रदाय के धर्मदर्शन की छाया में भक्तिरसशास्त्र का प्रवर्तन किया। "भक्तिरसामृत सिंधु" तथा "उज्ज्वलनीलमणि", जिसमें कामशास्त्र की परंपराओं का रिक्थ है, वैष्णव ...

                                               

अघोर पंथ

अघोर पंथ, अघोर मत या अघोरियों का संप्रदाय, हिंदू धर्म का एक संप्रदाय है। इसका पालन करने वालों को अघोरी कहते हैं। इसके प्रवर्त्तक स्वयं अघोरनाथ शिव माने जाते हैं। रुद्र की मूर्ति को श्वेताश्वतरोपनिषद में अघोरा वा मंगलमयी कहा गया है और उनका अघोर मं ...

                                               

दीन-ए-इलाही

दीन-ए-इलाही 1581 ईस्वी में मुगल सम्राट अकबर द्वारा समरूप एक समरूप धर्म था, जिसमें सभी धर्मों के मूल तत्वों को डाला, इसमे प्रमुखता हिंदू एवं इस्लाम धर्म थे। इनके अलावा पारसी, जैन एवं ईसाई धर्म के मूल विचारों को भी सम्मलित किया। हाँलाँकि इस धर्म के ...

                                               

भारत में ईसाई धर्म

माना जाता है कि भारत में ईसाई धर्म की शुरुवात ईसा मसीह के बारह मूल धर्मदूतों में से एक थॉमस के सन ५२ में केरल में आने के बाद हुई। विद्वानों की सहमति है कि ईसाई धर्म निश्चित तौपर ६वीं शताब्दी ईस्वी से भारत में स्थापित हो गया था। भारत की २०११ की जन ...

                                               

सिख धर्म

सिख धर्म 15वीं सदी में भारतीय संत परंपरा से निकला एक पन्थ है, जिसकी शुरुआत गुरु नानक देव ने की थी। इसमें सनातन धर्म का व्यापक प्रभाव मिलता है। इस पन्थ के अनुयायीयों को सिख कहा जाता है। सिखों के धार्मिक ग्रन्थ श्री आदि ग्रंथ या गुरु ग्रंथ साहिब तथ ...

                                               

हिन्दू धर्म

हिन्दू धर्म संस्कृत: सनातन धर्म एक धर्म या, जीवन पद्धति है जिसके अनुयायी अधिकांशतः भारत,नेपाल और मॉरिशस में बहुमत में हैं। इसे विश्व का प्राचीनतम धर्म कहा जाता है। इसे वैदिक सनातन वर्णाश्रम धर्म भी कहते हैं जिसका अर्थ है कि इसकी उत्पत्ति मानव की ...

                                               

एकात्मता मंत्र

एकात्मता मन्त्र एक संस्कृत मन्त्र है जिसका वाचन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखाओं में किया जाता है। इस म्न्त्र का मूल भाव यह है कि प्रभु एक ही है उसको लोग अलग-अलग नामों से जानते हैं।

                                               

गायत्री मन्त्र

गायत्री महामंत्र वेदों का एक महत्त्वपूर्ण मंत्र है जिसकी महत्ता ॐ के लगभग बराबर मानी जाती है। यह यजुर्वेद के मन्त्र ॐ भूर्भुवः स्वः और ऋग्वेद के छन्द 3.62.10 के मेल से बना है। इस मंत्र में सवितृ देव की उपासना है इसलिए इसे सावित्री भी कहा जाता है। ...

                                               

महामृत्युञ्जय मन्त्र

महामृत्युञ्जय मन्त्र या महामृत्युंजय मंत्र जिसे त्रयंबकम मंत्र भी कहा जाता है, यजुर्वेद के रूद्र अध्याय में, भगवान शिव की स्तुति हेतु की गयी एक वन्दना है। इस मन्त्र में शिव को मृत्यु को जीतने वाला बताया गया है। यह गायत्री मन्त्र के समकक्ष हिंदू ध ...

                                               

मूल मंत्र

मूल मंतर सिख धर्म पुस्तक आदि ग्रन्थ का सर्वप्रथम छंद है जिसमें सिख मान्यताओं को संक्षिप्त रूप में बताया गया है। यह गुरु ग्रन्थ साहिब में सौ से अधिक बार आया है।

                                               

मोहनमंत्र

मोहनमंत्र वह मंत्र है जिसके द्वारा किसी व्यक्ति को या समुदाय को मोहित किया जाता है। इसके द्वारा मनुष्य की मानसिक क्रियाओं पर प्रभाव डालकर उसको वश में किया जाता है। राज्याभिषेक के समय राजा को एक मणि, जो पर्ण वृक्ष की बनाई जाती थी, मोहनमंत्र से अभि ...

                                               

मानी

मानी एक ईरानी मूल का धर्म-संस्थापक था जिसने मानी धर्म की स्थापना करी। यह धर्म किसी ज़माने में मध्य एशिया, ईरान और अन्य क्षेत्रों में बहुत फैला हुआ था लेकिन समय के साथ-साथ पूरी तरह ख़त्म हो गया। मानी का जन्म पार्थिया के अधीन असुरिस्तान क्षेत्र में ...

                                               

मानी धर्म

मानी धर्म एक प्राचीन धर्म था जो ईरान के सासानी साम्राज्य के अधीन बेबीलोनिया क्षेत्र में शुरू होकर मध्य एशिया और उसके इर्द-गिर्द के इलाक़ों में बहुत विस्तृत हो गया। इसकी स्थापना मानी नामक एक मसीहा ने की थी और इसमें बौद्ध धर्म, ज़रथुष्टी धर्म और ईस ...

                                               

अतुम

                                               

अतेन

                                               

ओसिरिस मिथक

ओसिरिस मिथक प्राचीन मिस्र के पौराणिक कथाओं में सबसे व्यापक और प्रभावशाली कहानी हैं। यह भगवान ओसिरिस, मिस्र के एक आदिम राजा, और उनकी हत्या के परिणामों से संबंधित है। ओसिरिस के कातिल, उसके भाई सेत, उनका सिंहासन हड़प लेता हैं। इस बीच, ओसिरिस की पत्न ...

                                               

थोथ

                                               

नुत

                                               

बास्त

बास्त प्राचीन मिस्र के धर्म की एक देवी है। प्राचीन मिस्र के द्वितीय राजवंश से लेकर इस देवी की पूजा की जा रही थी। वे परिवार, हिफ़ाज़त, ख़ुशी, नाच-गानों और बिल्लियों की देवी है।

                                               

मिन

प्राचीन मिस्र के धर्म का एक देवता जिनके पंथ का उदय पूर्वअधिवंशीय काल में हुआ था। उन्हें अधिकतर मानव रूप में दर्शाया जाता है जिनके बाएँ हाथ में खड़ा हुआ लिंग व दाहिने हाथ में मूसल है। खेम या मिन के रूप में वे प्रजनन के देवता थे और ख्नुम के रूप में ...

                                               

रा

रा प्राचीन मिस्र के धर्म में सूर्य देवता का नाम है। उन्हें सामान्यतः एक मनुष्य के रूप में दर्शाया जाता है जिसका मुख बाज़ का है, व सर के ऊपर सूर्य दर्शाया जाता है। प्राचीन मिस्र की मान्यता अनुसार रा ने स्वयं प्रकट हुए थे व शू, तेफ्नु व होरस उनकी क ...

                                               

होरस

होरस प्राचीन मिस्र में आकाश के देवता माने जाते थे और सूर्य को होरस की शक्ति का प्रतीक माना जाता था। होरस को बाज़ के सर के साथ दिखाया जाता है और बाज़ होरस का प्रतीक है। मिस्र में होरस की पूजा 2925 ईसा पूर्व से पहले और प्राचीन मिस्र के राजघरानों की ...

                                               

अब्राहम

अब्राहम ईश्वर के आदेश से मेसोपोतेमिया के ऊपर तथा हारान नामक शहरों को छोड़कर कनान और मिस्र चले गए। बाइबिल में अब्राहम का जो वृत्तांत मिलता है, उसकी रचना लगभग 1000 ई.पू. में अनेक परंपराओं के आधापर हुई थी। इसमें संस्कृति और रीति-रिवाजों का जो वर्णन ...

                                               

इज़राइल का इतिहास

इज़राइल संसार के यहूदी धर्मावलंबियों के प्राचीन राष्ट्र का नया रूप है। इज़रायल का नया राष्ट्र 14 मई सन् 1948 को अस्तित्व में आया। इज़रायल राष्ट्र, प्राचीन फ़िलिस्तीन अथवा पैलेस्टाइन का ही बृहत् भाग है।

                                               

इब्रानी भाषा

इब्रानी सामी-हामी भाषा-परिवार की सामी शाखा में आने वाली एक भाषा है। ये इस्राइल की मुख्य और राष्ट्रभाषा है। इसका पुरातन रूप तौराती इब्रानी यहूदी धर्म की धर्मभाषा है और तौरात, बाइबिल का पुराना नियम, इसी में लिखा गया था। ये इब्रानी लिपि में लिखी जात ...

शब्दकोश

अनुवाद
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