Топ-100 ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 128

ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 128



                                               

वादिराज

वादिराज एक जैन आचार्य कवि दार्शनिक थे जिनका समय दसवीं शताब्दी माना जाता है। इनका जन्म दक्षिण मद्रास प्रान्त में हुआ था। इनके गुरु का नाम मतिसागर था। इन्होंने जैन धर्म की महती प्रभावना की, तत्कालीन चालुक्य वंश के राजा जयसिंह वादिराज का भक्त था। इन ...

                                               

विजयानन्दसूरी

आचार्य विजयानन्द सूरी जिन्हें आत्माराम के नाम से भी जाना जाता है, आधुनिक समय में आचार्य शीर्षक पाने वाले प्रथम श्वेताम्बर मूर्तिपुजक जैन साधु थे।

                                               

विनीतसागर

                                               

विमलसूरि

जैन पुराण की परंपरा लगभग विक्रम की तीसरी सदी से मानी गयी है। इस प्रकार का सर्वप्रथम काव्य विमलदेव सूरि के पउमचरियं को माना गया है। यह प्राकृत में रचित महाकाव्य है, जिसमें पद्मप्रभ अर्थात् रामचन्द्र की कथा वर्णित है। विमल सूरि ने अपनी कृति की समाप ...

                                               

शांतिसागर

आचार्य शांति सागर महाराज, चरित्र चक्रवर्ती २०वीं सदी के एक प्रमुख दिगंबर आचार्य थे। वह कईं सदियों बाद उत्तरी भारत में विचरण करने वालें प्रथम दिगम्बर जैन संत थे।

                                               

शिवकोटि

शिवकोटि को स्वामी समन्तभद्राचार्य का राजवंशी शिष्य बताया है जिन्होंने अपने गुरु की सलाह से अपने भाई शिवायन के साथ सन्यास लेकर मुनि दीक्षा ले ली थी। जिन्होंने आचार्य उमास्वामी के ‘तत्त्वार्थसूत्र’ पर ‘रत्नमाला’ नामक टीका रची थी। यह भी कहा जाता है ...

                                               

समन्तभद्र

आचार्य समन्तभद्र दूसरी सदी के एक प्रमुख दिगम्बर आचार्य थे। वह जैन दर्शन के प्रमुख सिद्धांत, अनेकांतवाद के महान प्रचारक थे। उनका जन्म कांचीनगरी में हुआ था। उनकी सबसे प्रख्यात रचना रत्नकरण्ड श्रावकाचार हैं।

                                               

सिद्धसेन

सिद्धसेन दिवाकर पाँचवी शताब्दी के प्रसिद्ध जैन आचार्य थे। वे दिवाकर की भांति जैन धर्म को प्रकाशित करने वाले थे, इसलिये उन्हें दिवाकर कहा गया। कहा जाता है कि उन्होने अनेक ग्रन्थों की रचना की किन्तु वर्तमान समय में उनमें से अधिकांश उपलब्ध नहीं हैं। ...

                                               

सुधर्मास्वामी

आचार्य सुधर्मास्वामी भगवान महावीर के पांचवे गणधर थे वर्तमान में सभी जैन आचार्य व साधू उनके नियमों का समान रूप से पालन करते हैं। इनका जन्म ६०७ ईसा पूर्व हुआ था तथा इन्हें ५१५ ईसा पूर्व में केवलज्ञान प्राप्त हुआ एवं ५०७ ईसा पूर्व में १०० वर्ष की आय ...

                                               

महामस्तकाभिषेक

महामस्तकाभिषेक, दो शब्दों के मेल से बना है– महा और मस्तकाभिषेक जिसका अर्थ होता है, बड़े स्तर पर आयोजित होने वाला अभिषेक। सबसे प्रचलित महामस्तकाभिषेक गोमटेश्वर बाहुबली का होता है जो १२ वर्ष के अन्तराल पर दक्षिण भारत के कर्नाटक राज्य के श्रवणबेलगोल ...

                                               

अनुयोगद्वार सूत्र

अनुयोगद्वार सूत्र ईसा से १०० वर्ष पूर्व रचित जैन ग्रन्थ है। इस ग्रन्थ में बड़ी-बड़ी संख्याएं आयी हैं जैसे, 10 96 । इसके अलावा अनेक गणितीय संक्रियाओं के बारे में बताया गया है, जैसे घातों के गुण।

                                               

कल्पसूत्र (जैन)

कल्पसूत्र नामक जैनग्रंथों में तीर्थंकरों का जीवनचरित वर्णित है। भद्रबाहु इसके रचयिता माने जाते हैं। पारंपरिक रूप से मान्यता है कि इस ग्रन्थ की रचना महावर स्वामी के निर्वाण के १५० वर्ष बाद हुई। आठ दिवसीय पर्यूषण पर्व के समय जैन साधु एवं साध्वी कल् ...

                                               

जैनेन्द्र व्याकरण

जैन धर्म की मान्यतानुसार भगवान महावीर, जो की जन्म से ही मति, श्रुत एवं अवधि ज्ञान के धनी थे, उनके माता पिता उन्हें अध्ययन हेतु एक अध्यापक के पास ले कर जाते हैं. उस समय सौधर्म देवलोक के देवराज इंद्र को यह बात पता चलने पर वे विचार करते हैं की महावी ...

                                               

पुरुषार्थ सिद्धयुपाय

पुरुषार्थ सिद्धयुपाय एक प्रमुख जैन ग्रन्थ है जिसके रचियता आचार्य अमृत्चंद्र हैं। आचार्य अमृत्चंद्र दसवीं सदी के प्रमुख दिगम्बर आचार्य थे। पुरुषार्थ सिद्धयुपाय में श्रावक के द्वारा धारण किये जाने वाले अणुव्रत आदि का वर्णन हैं पुरुषार्थ सिद्धयुपाय ...

                                               

प्रभावकचरित

प्रभावकचरित एक इतिहास-ग्रन्थ है जिसके रचयिता प्रभाचन्द्र हैं जो श्वेताम्बर जैन आचार्य थे। इसकी रचना १२७७-७८ में हुई थी। प्रभावकचरित में श्वेताम्बर जैन विद्वानों के जीवनचरित का वर्णन है, किन्तु इस ग्रन्थ का उल्लेख प्रायः आचार्य हेमचन्द्राचार्य के ...

                                               

महापुराण

महापुराण जैन धर्म से संबंधित दो भिन्न प्रकार के काव्य ग्रंथों का नाम है, जिनमें से एक की रचना संस्कृत में हुई है तथा दूसरे की अपभ्रंश में। संस्कृत में रचित महापुराण के पूर्वार्ध के रचयिता आचार्य जिनसेन हैं तथा उत्तरार्ध के रचयिता आचार्य गुणभद्र। ...

                                               

मूलाचार

मूलाचार पहली शताब्दी में लिखा गया एक प्रमुख जैन ग्रन्थ हैं। यह दिगम्बर जैन सम्प्रदाय का प्रमुख ग्रंथ है। इसके रचयिता आचार्य वट्टकेर हैं। यह बारह अधिकारों में विभक्त प्राकृत भाषा की १२४३ गाथाओं में निबद्ध है।

                                               

रत्नकरण्ड श्रावकाचार

रत्नकरण्ड श्रावकाचार एक प्रमुख जैन ग्रन्थ हैं जिसके रचियता आचार्य समन्तभद्र हैं। इस ग्रंथ में जैन श्रावक की चर्या का वर्णन है। आचार्य समन्तभद्र ने जैन श्रावक कैसा होना चाहीए इसके बारे में विस्तार से बताया है|

                                               

लोकविभाग

लोकविभाग विश्वरचना सम्बंधी एक जैन ग्रंथ है। इसकी रचना सर्वनन्दि नामक दिगम्बर साधु ने मूलतः प्राकृत भाषा में की थी जो अब अप्राप्य है। किन्तु बाद में सिंहसूरि ने इसका संस्कृत रूपान्तर किया जो उपलब्ध है। इस ग्रंथ में शून्य और दाशमिक स्थानीय मान पद्ध ...

                                               

षट्खण्डागम

षट्खण्डागम दिगम्बर जैन संप्रदाय का सर्वोच्च और सबसे प्राचीन पवित्र धर्मग्रंथ है। दिगंबर परंपरा के अनुसार मूल धर्मवैधानिक शास्त्र महावीर भगवान के निर्वाण के कुछ शताब्दियों के बाद ही लुप्त हो गये थे। अतः, षट्खण्डागम को आगम का दर्जा दिया गया है और इ ...

                                               

सर्वार्थसिद्धि

सर्वार्थसिद्धि एक प्रख्यात जैन ग्रन्थ हैं। यह आचार्य पूज्यपाद द्वारा प्राचीन जैन ग्रन्थ तत्त्वार्थसूत्पर लिखी गयी टीका हैं। इसमें तत्त्वार्थसूत्र के प्रत्येक श्लोक को क्रम-क्रम से समझाया गया है।

                                               

सूर्यप्रज्ञप्ति सूत्र

सूर्यप्रज्ञप्ति सूत्र जैन धर्म का एक ग्रन्थ है। श्वेताम्बर जैन सम्प्रदाय इसकी शिक्षाओं का अनुसरण करता है। इसको सूर्य पन्नति भी कहते हैं। वस्तुतः यह उपांग आगम है। यह ग्रन्थ सूर्य एवं ग्रहों के बारे में है। इसमें इन सबका वृहद वर्णन है। सूर्य एवं ग् ...

                                               

कार्कल

कर्नाटक राज्य के दक्षिणी हिस्से में स्थित कार्कल नगर मूर्ति निर्माण कला में निपुणता के लिए विश्व विख्यात है। यहां के उत्साही मूर्तिकार पत्थरों में जान डालने की क्षमता रखते हैं। उनकी कला का प्रत्यक्ष प्रमाण यहां देखा जा सकता है। मंगलौर से 35 किमी ...

                                               

खड़ोतिया

खड़ोतिया, मध्यप्रदेश के इंदौर जिले की देपालपुर तहसील का एक मध्यम आकार का गांव है, जहाँ लगभग 117 परिवार निवास करते हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार गांव की जनसंख्या 651 है, जिसमें से 332 पुरुष और 319 महिलाएँ हैं। खड़ोतिया,मध्य प्रदेश राज्य के इंदौर ज ...

                                               

पपौरा जी

पपौरा जी जो पमपापुर नाम से भी प्रसिद्ध है एक जैन तीर्थ क्षेत्र है जो मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ से ५ किमो पूर्व में स्थित है। यह एक अतिशय क्षेत्र है जहाँ १०८ जिनालय है।

                                               

पावापुरी

पावापुरी, जिसे पावा भी कहा जाता है, भारत के बिहार राज्य के नालंदा ज़िले जिले में राजगीऔर बोधगया के समीप स्थित एक शहर है। यह जैन धर्म के मतावलंबियो के लिये एक अत्यंत पवित्र शहर है क्यूंकि माना जाता है कि भगवान महावीर को यहीं मोक्ष की प्राप्ति हुई ...

                                               

पुष्पगिरि जैन तीर्थ

पुष्पगिरि जैन तीर, मध्य प्रदेश में इंदौर-भोपाल मार्ग पर सोनकच्छ से चार किलोमीटर दूर जैन धर्म के प्राचीन स्थल पर नवनिर्मित एक ऐसा जैन तीर्थ-स्थल है जो कोलाहल एवं प्रदूषण की दुनिया से बहुत दूर है। इस तीर्थस्थल के प्रणेता आचार्य श्री पुष्पदंतसागरजी ...

                                               

फाजिल नगर

फाजिलनगर उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले का छोटा सा कस्बा है। यह कुशीनगर से २० किमी पूरब में राष्ट्रीय राजमार्ग २८ पर स्थित है। गोरखपुर से इसकी दूरी ७१ किमी है। फाजिल नगर को पावापुरी भी कहा जाता है। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि जैन धर्म की वास्तवि ...

                                               

बदामी, कर्नाटक

बादामी, जिसका पूर्व नाम था वातापी, कर्नाटक राज्य के बागलकोट जिले का एक तालुक है। यह ५४०-७५७ ई० में बादामी चालुक्य राजवंश की राजधानी रहा था। यह अपने पाषाण शिल्प कला के मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है।

                                               

बावनगजा

बावनगजा मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में स्थित एक प्रसिद्ध जैन तीर्थ है। यहाँ का मुख्य आकर्षण पहाड़ से काटकर निर्मित प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव जी की विशाल प्रतिमा है। यह प्रतिमा 84 फिट ऊँची प्रतिमा है। इसका निर्माण १२वीं शताब्दी में हुआ था। यह बड़वानी ...

                                               

लक्कुंडी

लक्कुण्डी दक्षिण भारत के राज्य कर्नाटक के उत्तरी भाग में गडग जिला स्थित एक छोटा सा ग्फ़्राम है। यह हम्पी को (होसपेट से हुबली जाने वाले मार्ग में स्थित है। लक्कुण्डी पूर्व में गडग से ११ कि.मी दूर है। यह दम्बल से १४ कि.मी एवं इतगी के महादेव मंदिर स ...

                                               

शिखरजी

शिखरजी या श्री शिखरजी या पारसनाथ पर्वत भारत के झारखंड राज्य के गिरीडीह ज़िले में छोटा नागपुर पठापर स्थित एक पहाड़ी है जो विश्व का सबसे महत्वपूर्ण जैन तीर्थ स्थल भी है। श्री सम्मेद शिखरजी के रूप में चर्चित इस पुण्य क्षेत्र में जैन धर्म के 24 में स ...

                                               

सुदी

सुदी, कर्नाटक के गडग जिला में एक पंचायत कस्बा है। यह बादामी से ३६ कि., मी, गजेन्द्रगढ़ से १२ कि.मी एवं इतगी से ३ कि॰मी॰ दूर है। १०० ई. में यह पश्चिमी चालुक्य वंश का एक महत्त्वपूर्ण शहर रहा है।

                                               

सोनागिरि

सोनागिरि, ग्वालियर से 60 कि॰मी॰ दूर जिला दतिया मध्य प्रदेश में स्थित है। यह स्थान मुख्यतः जैन तीर्थ है। सोनागिरि में 108 मंदिर हैं, जिनमे क्रमांक 57वा मंदिर मुख्य है। इस मंदिर मे भगवन चंद्रप्रभु की 11फिट ऊँची मूर्ति स्थापित है, तथा यहाँ एक विशाल ...

                                               

हलसी

हलसी जिसे हालसी या हालशी भी कहते हैं, उत्तरी कर्नाटक के बेलगाम जिला के खानपुर ताल्लुक का का एक शहर है। यह खानापुर से १४ कि.मी और कित्तूर से २५ कि.मी दूर है। यह कदंब वंश की राजधानी रहा है। इस कारण यहां अनेक ऐतिहासिक स्मारक एवं इमारतें हैं। हलसी की ...

                                               

गुजरात के जैन तीर्थ

                                               

तीर्थंकर

जैन धर्म में तीर्थंकर उन २४ व्यक्तियों के लिए प्रयोग किया जाता है, जो स्वयं तप के माध्यम से आत्मज्ञान प्राप्त करते है। जो संसार सागर से पार लगाने वाले तीर्थ की रचना करते है, वह तीर्थंकर कहलाते हैं। तीर्थंकर वह व्यक्ति हैं जिन्होनें पूरी तरह से क् ...

                                               

क्षमावणी

क्षमावणी या "क्षमा दिवस" जैन धर्म के अनुयायियों द्वारा मनाया जाने वाला एक पर्व है। दिगम्बर इसे अश्विन कृष्ण मास की एकम को मनाते हैं। श्वेतांबर इसे अपने ८ दिवसीय पर्यूषण पर्व के अंत में मनाते है। इस पर्व पर सबसे अपने भूलों की क्षमा याचना की जाती ह ...

                                               

जैन त्योहार

जैन समाज कई त्योहार मनाती है।इनके प्रमुख उत्सव तो अनाधिनिधन होते हैं।पर कुछ पर्व तीर्थंकर,जिनवाणी और गुरुओं के होते हैं।

                                               

महावीर जयन्ती

महावीर जयंती चैत्र शुक्ल १३ को मनाया जाता है। यह पर्व जैन धर्म के २४वें तीर्थंकर महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक के उपलक्ष में मनाया जाता है। यह जैनों का सबसे प्रमुख पर्व है।

                                               

रक्षाबंधन(जैन धर्म)

काम चल रहा है रक्षाबंधन पर्व जैन समुदाय द्वारा हर्षपूर्वक मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन विष्णु कुमार मुनिराज ने ७०० मुनियों पर हो रहे उपसर्ग को दूर किया था। जैन धर्म में रक्षाबंधन इसी कारण से मनाया जाता है।

                                               

नलिनी बलबीर

नलिनी बलबीर एक फ्रांसीसी इंडोलॉजिस्ट हैं जो पेरिस में रहती हैं। वह संस्कृत, प्राकृत, पाली, जैन, बौद्ध और हिंदू धर्म की विद्वान है। वह इंडोलॉजिस्ट कोलेट कैलेट की प्रत्यक्ष छात्रा थी। वह जैनोलॉजी संस्थान द्वारा प्रकाशित ब्रिटिश लाइब्रेरी की जैन पां ...

                                               

पॉल डुंडस

पॉल डुंडस एडिनबर्ग विश्वविद्यालय में एक विद्वान और संस्कृत भाषा के वरिष्ठ लेक्चरर और एशियाई अध्ययन के अध्यक्ष हैं। उनके अध्ययन और शोध के प्रमुख क्षेत्र जैन धर्म, बौद्ध धर्म, संस्कृत साहित्य और मध्य भारत-आर्याई भाषाएँ है। वे विश्व के प्रसिद्ध जैन ...

                                               

मेरी विटनी केल्टिंग

मेरी विटनी केल्टिंग एक अमरीकी नृवंशवैज्ञानिक और जैन धर्म की विदुषी हैं। वे नॉर्थईस्टर्न विश्वविद्यालय के सामाजिक अध्ययन कॉलेज में एसोसिएट प्रोफ़ेसर हैं। केल्टिंग के शोध अध्ययन में दक्षिण एशिया के धर्म, प्रथा सिद्धांत, लिंग अध्ययन और साँस्कृतिक अध ...

                                               

विलास आदिनाथ संगावे

विलास आदिनाथ संगावे एक समाजशास्त्री और जैनधर्मविद हैं। उनका जन्म 2 जून 1920 को एक सोलापुर, महाराष्ट्र के एक जैन परिवार में हुआ। 1 मार्च 2011 को उनका देहान्त हुआ था।

                                               

पदमावती

जैन धर्म की मान्यता के अनुसार माता पद्मावती 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ की अधिष्ठायिका देवी है। जो भी भक्त भगवान पार्श्वनाथ की सेवा करते हैं, पद्मावती देवी उनकी सदैव सहायता करती है।

                                               

अजमेर जैन मंदिर

अजमेर जैन मंदिर स्‍थापत्‍य कला की दृष्टि से एक भव्य जैन मंदिर है। इसे सोनीजी की णसियन के नाम से भी जाना जाता है। इसका निर्माण १९वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में हुआ। इसके मुख्य कक्ष को स्वर्ण नगरी कहा जाता है। इस कक्ष में सोने से परिरक्षित लकड़ी की ...

                                               

अवन्ति पार्श्वनाथ उज्जैन

मंदिरों के शहर उज्जैन मे शिप्रा किनारे स्थित अवन्ति पार्श्वनाथ जैन मंदिर कोई साधारण मंदिर नहीं है। देश के जैन मतावलंबियों के लिए तो ये एक महत्वपूर्ण तीर्थ है ही, इतिहास की दृष्टि से भी, इसमें विराजित प्रतिमा उज्जयिनी की सबसे प्राचीन धरोहरों में स ...

                                               

गोरी मंदिर, नागरपारकर

गोरी मंदिर नगरपारकर में एक जैन मंदिर है। यह विरवा मंदिर से 14 मील उत्तर पश्चिम में स्थित है। इसे 1375-1376 में बनाया गया था। मंदिर को विशेष रूप से २३ वें जैन तीर्थंकर पार्श्वनाथ को आवंटित किया गया था। इस मंदिर को नागपाकर के जैन मंदिरों के साथ 201 ...

                                               

जैन ग्लास मंदिर, कानपुर

जैन ग्लास मंदिर, कानपुर कानपुर शहर में स्थित एक जैन मंदिर है। वर्तमान में यह मंदिर पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र बन गया है। यह खूबसूरत नक्कासीदार मंदिर कमला टॉवर के विपरीत महेश्वरी मोहाल में स्थित है। मंदिर में ताम्रचीनी और कांच की सुंदर सजावट की ...

शब्दकोश

अनुवाद
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